बारिश में बहे किसानों के अरमान
अमर उजाला ब्यूरो,
गोहाना। लगातार दो दिन तक हुई बारिश ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। इस बार बेहतर पैदावार की उम्मीद में बैठे किसानों के सपने टूट गए हैं। बारिश ने फसलों को बुरी तरह से प्रभावित किया है। असमय हुई बारिश का धान, कपास और अन्य फसलों पर काफी बुरा असर हुआ है। किसानों ने बारिश सेे खराब हुई फसलों की विशेष गिरदावरी कराकर मुआवजा देने की मांग की है।
जिले में दो दिनों तक लगातार हुई बारिश ने किसानों की हालत नाजुक कर दी है। बारिश होने से धान की फसल के अलावा सब्जियों और कपास की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। किसानों का कहना है कि गोहाना में आधा दर्जन से अधिक गांवों में तो पहले ही बारिश के कारण फसल बर्बाद हो चुकी हैं। सरकार से बार-बार मदद की मांग करने के बाद भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। अब रही सही कसर इस बारिश ने निकाल दी है। किसानों ने चेतावनी दी है कि जल्द से जल्द फसलों की गिरदावरी कराकर मुआवजा नहीं दिया तो वह आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव
इस मौसम में बारिश होने से किसानों को कई तरह नुकसान होगा। बारिश से जहां धान की फसल गिरने से उत्पादन पर असर पड़ेगा, वहीं गुणवत्ता में भी कमी आएगी। साथ ही जो फसल पककर तैयार है उसमें भी नुकसान होगा। इससे किसानों की फसल का दाम आधा रह जाएगा। बीमा कंपनी बारिश से फसल का नुकसान होने का मुआवजा देने को तैयार नहीं हैं।
राजेंद्र, किसान, कथूरा।
एक ही रात में सब कुछ खत्म
दो दिन तक लगातार हुई बारिश के कारण कपास की फसल पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। एक ही रात में पूरी फसल बर्बाद हो गई। बारिश से सारी कपास जमीन पर गिर गई तथा फसल में जो फल आया हुआ था। वह खराब हो गया है। अब जो फसल खेत में खड़ी है, उसे खेत से बाहर निकालने पर भी दोहरा खर्च होगा। जबकि पैदावार न के बराबर होगी।
जयभगवान, किसान, कथूरा।
पानी के रूप में बरसा जहर
इस मौसम में बारिश होने से किसानों के लिए पानी के रूप में जहर बरसा है। वैसे तो बारिश का पानी फसलों के लिए अमृत के समान होता है, लेकिन बेमौसम बारिश का पानी फसलों के लिए जहर बन जाता है। दो दिन तक हुई बारिश से सबसे ज्यादा प्रतिकूल प्रभाव सब्जियों की फसल पर पड़ेगा।
सुमित, किसान।
तो किसान हो जाएंगे बर्बाद
बारिश होने से खराब हुई फसल का सरकार ने मुआवजा नहीं दिया तो किसान पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा। किसान पहले ही कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। बीमा कंपनी किसानों को फसल का मुआवजा देने को तैयार नहीं है। सरकार बार-बार किसानों को लागत से दोगुना रेट देने की बात कर रही है। जबकि किसान की फसल खराब होने पर उसे मुआवजा देने में आनाकानी की जा रही है।
सत्यवान नरवाल, नेता भाकियू।