फोटो 21: सोनीपत शहर का विहंगम दृश्य। संवाद
सोनीपत। पौराणिक पहचान से लेकर आधुनिक औद्योगिक और शहरी विकास तक का सफर तय करता सोनीपत आज अपने गठन के 53 वर्ष पूरे कर चुका है। 22 दिसंबर 1972 को रोहतक से अलग होकर जिला बने सोनीपत ने पांच दशकों में खुद को हर क्षेत्र में बदला है। कभी स्वर्णप्रस्थ के नाम से विख्यात यह क्षेत्र आज मेट्रो, रैपिड रेल और बड़े औद्योगिक निवेश के दम पर विकास के नए दौर में प्रवेश कर चुका है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में शामिल सोनीपत अब परिवहन क्रांति की ओर बढ़ रहा है। मेट्रो परियोजना जमीन पर उतर चुकी है जबकि दिल्ली से सोनीपत, पानीपत और करनाल को हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली दिल्ली-पानीपत-करनाल आरआरटीएस (रैपिड रेल) परियोजना अब वास्तविक निर्माण की दिशा में बढ़ती नजर आ रही है।
दोनों प्रोजेक्ट चार साल में धरातल पर आ जाएंगे। वहीं ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर मानेसर से सोनीपत की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। इन तीनों परियोजनाओं के साकार होने से न केवल दिल्ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद से कनेक्टिविटी मजबूत होगी, बल्कि व्यापार, शिक्षा और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। 53वें स्थापना दिवस पर सोनीपत आज उस मुकाम पर है, जहां अतीत की गौरवशाली विरासत और भविष्य की ऊंची उड़ान एक साथ दिखाई देती हैं। मेट्रो, रैपिड, उद्योग और प्रशासनिक बदलावों के साथ ‘म्हारा सोनीपत’ विकास की नई इबारत लिखते हुए आगे बढ़ रहा है।
उन्नति के साथ नए प्रशासनिक प्रयास : रोहतक से अलग होकर जिले का दर्जा पाने के बाद सोनीपत ने अपनी अलग पहचान बनाई है। अब गोहाना को नया जिला बनाने के प्रयास भी तेज हो रहे हैं, जिससे प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी और ग्रामीण क्षेत्रों को सीधे लाभ मिलेगा। यह कदम क्षेत्रीय संतुलन और स्थानीय विकास को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
फोटो 21: सोनीपत शहर का विहंगम दृश्य। संवाद