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यमुना खादर में जमीन के लिए 50 साल से चल रहा खूनी संघर्ष

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राई (सोनीपत)। यमुना खादर से सटे हरियाणा और यूपी के गांवों में करीब पांच दशक से जमीन के लिए विवाद चला आ रहा है। सोनीपत के जाजल व खुर्मपुर और बागपत के निवाड़ा व नंगला बहलोलपुर के किसान कई बार आमने-सामने आ चुके हैं। चारों गांवों में करीब 450 एकड़ जमीन के लिए हर साल खूनी संघर्ष होता है। तीन दिन पहले ही प्रशासनिक अमला खुर्मपुर के पास यमुना पर पैमाइश करके आया था। उससे पहले ही नंगला बहलोलपुर के किसानों ने खुर्मपुर के किसानों की सरसों की फसल काट दी, तब किसानों ने पुलिस को बुलाया तो वह भाग निकले थे। इसके बाद शुक्रवार को किसानों पर हमला कर दिया गया।
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हरियाणा-यूपी सीमा के गांवों के किसान लंबे समय से जमीन के सीमांकन के लिए आपस में भिड़ते रहते हैं। खासकर फसल की बिजाई व कटाई के समय दोनों ही तरफ के किसान जमीन पर अपना हक जताते हैं। यूपी व हरियाणा के किसानों में लंबे समय से जमीन का विवाद चल रहा है। समस्या के समाधान की मांग भी होती रही है। दीक्षित अवॉर्ड को लागू करने की मांग भी उठती रही है। 1974 में केंद्र सरकार ने विवाद सुलझाने के लिए केंद्रीय सिंचाई मंत्री उमा शंकर दीक्षित की अध्यक्षता में यूपी और हरियाणा के यमुना खादर की सीमा का विवाद निपटाने के लिए एक समिति का गठन किया था जिसे दीक्षित अवॉर्ड का नाम दिया गया। उस समय तय हुआ था कि यूपी के किसानों की जमीन हरियाणा की ओर है तो उस पर हरियाणा के किसान काबिज होंगे और हरियाणा के किसानों की जमीन यूपी की ओर है तो उस पर यूपी के किसान काबिज होंगे। उस पर कब्जा दिलवाने की कार्रवाई प्रशासन को करनी थी, लेकिन उस पर कब्जा नहीं दिलवाया गया, जिस कारण हर साल खूनी संघर्ष जारी है।
कई बार हो चुकी अधिकारियों की बैठक
हरियाणा-यूपी सीमा विवाद को सुलझाने के लिए कई बार अधिकारियों की बैठक हो चुकी है। बैठकों में सोनीपत व बागपत की जमीन का सीमांकन करने का निर्णय लिया गया था। कई बार पैमाइश भी की गई। तीन दिन पहले भी नायब तहसीलदार के नेतृत्व में पैमाइश कराई थी, लेकिन विवाद खत्म नहीं हो रहा है।
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किसान बोले - जल्द किया जाए निपटारा
गांव खुर्मपुर के किसान राजकुमार, मनोज कुमार, धर्मेंद्र, सचिन, रामगोल, धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि लगातार यूपी के किसान खूनी संघर्ष करते आ रहे हैं। लंबे समय से वह न्याय के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। कोर्ट में भी न्याय व सुरक्षा की गुहार लगा चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन को किसानों की मांगों पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही उन्हें न्याय दिलाने के लिए उचित कदम उठाने की जरूरत है।
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