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3 करोड़ से लगने थे 450 कैमरे, लगे मिले केवल 384, फाइल भी गायब

Mon, 10 Apr 2017 12:41 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, सोनीपत
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दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी मुरथल - फोटो : sonipat
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दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी मुरथल में सीसीटीवी कैमरे लगवाने में गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। यहां तीन करोड़ रुपये की लागत से लगभग 450  सीसीटीवी कैमरे लगने थे, लेकिन यूनिवर्सिटी में केवल 384 कैमरे ही लगे मिले हैं। इनमें कुछ कैमरों ने काम करना बंद कर दिया तो इनकी जांच कराने के लिए फाइल तलाशी गई। हैरानी की बात यही रही कि इनकी फाइल भी गायब मिली। यह तक नहीं पता चल रहा कि किस कंपनी से कितने रुपये के कैमरे खरीदे गए हैं, उनको खरीदने से लेकर मेंटेनेंस तक की नियम और शर्तें क्या हैं। हालांकि, गड़बड़ी का खुलासा होने पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जांच कमेटी गठित कर दी गई है। जांच होने से जिम्मेदारों पर गाज गिरनी तय मानी जा रही है, लेकिन इसकी भी रिपोर्ट दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
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यह है मामला
दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी मुरथल में सुरक्षा के मद्देनजर हॉस्टल, मार्केट, गेट, एडमिन ब्लाक, टीचिंग ब्लाक, रोड आदि जगहों पर 2010 के बाद कई चरण में सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए। साल 2015 तक सीसीटीवी कैमरे लगवाने के लिए लगभग तीन करोड़ रुपये खर्च किए गए। इस लागत में करीब 450 कैमरे लगने थे। पिछले पांच साल में कई कंपनियों की ओर से सीसीटीवी लगवाए गए। उक्त कंपनियों को कैमरों का पूरा ध्यान रखने की जिम्मेदारी तक की गई। लेकिन अब सीसीटीवी कैमरे लगवाने में बड़ा झोल सामने आ रहा है, जिसको लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने जांच बैठा दी है। 

इस तरह सामने आया झोल
यूनिवर्सिटी में कई कैमरों ने काम करना बंद कर दिया और उनकी जांच कराने पर पता चला कि वह खराब हो गए हैं। इसके बाद तय हुआ कि उनकी फाइल देखी जाए, जिससे पता चल सके कि जिस कंपनी ने उनको लगाया है, वह कितने दिन तक उनका मेंटेनेंस करेगी। जब फाइल मंगवाई गई तो फाइल ही गायब मिली। उन कैमरों के बारे में ना यह पता चल सका है कि उनको किस-किस कंपनी से खरीदा गया है, कितने रुपयों में खरीदा गया है और किन नियम व शर्तों के तहत उनको लगवाया गया है। उसके बाद कैमरों की गिनती कराई गई तो काफी कम मिले। इस समय ये लगभग 384 बताए जा रहे हैं। गड़बड़ी सामने आने के बाद इस मामले में जांच के लिए प्रो. डीपी तिवारी की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है। जांच में कई जिम्मेदारों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
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यूनिवर्सिटी में कैमरे लगवाने से लेकर उनकी फाइल गायब करने का मामला सामने आया था, जिसमें जांच के लिए कमेटी बनाई गई है। कैमरे भी काफी कम मिले हैं तो उनके बारे में ज्यादा कोई जानकारी भी नहीं मिल रही है। इसमें कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही ज्यादा कुछ बताया जा सकता है। 
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- केपी सिंह, रजिस्ट्रार दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी, मुरथल
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