प्रीतम ने खुद देश को चैंपियन बनाया, अब महिला हॉकी की कर दी फौज तैयार
देश को अपनी कप्तानी में राष्ट्रमंडल खेलों में गोल्ड दिला चुकी है अर्जुन अवार्डी प्रीतम
रविंद्र कौशिक
सोनीपत। ऐसे बहुत खिलाड़ी मिल जाएंगे जो अपने लिए खेलते हैं। लेकिन प्रीतम सिवाच महिला हॉकी का वह नाम है, जिसने पहले खुद को कॉमनवेल्थ चैंपियन बनाया और अब महिला हॉकी में पूरी फौज ही तैयार कर डाली। बेटियों को हॉकी में आगे लाने के साथ ही उनको भारतीय टीम तक पहुंचाने में प्रीतम हर समय लगी रहती हैं और यह सबकुछ निस्वार्थ किया जा रहा है। यही कारण है कि वह इस समय 130 बेटियों को हॉकी खेलना सिखा रही हैं, जिनमें जूनियर व सीनियर में 40 से ज्यादा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल रही हैं। इनमें नेहा गोयल, किरण, ज्योति, महिमा जैसे बड़े नाम भी शामिल है।
भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान रही प्रीतम सिवाच देश को महिला हॉकी में ओलंपिक पदक दिलाने से चूक गई थी। अपने उसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने सोनीपत के औद्योगिक क्षेत्र में लड़कियों को प्रशिक्षण देना शुरू किया था। वह 2004 से लड़कियों को प्रशिक्षण दे रही हैं। उनकी ख्वाहिश है कि वह देश के लिए इस तरह खिलाड़ी तैयार करें जो ओलंपिक में पदक दिला सकें। यही सपना लेकर वह 130 बेटियों को हर रोज हॉकी की नई तकनीक सिखाती हैं। उनकी महिला हॉकी के प्रति इस लग्न को देखते हुए ही पिछले साल हुए एशिया कप में भारतीय टीम की कोच बनाया गया था और वहां भी वह टीम को चैंपियन बनाकर लाई थी। प्रीतम कहती है कि खेलों में बेटियों को आगे बढ़ाना जरूरी है और इसका ही बीड़ा उठाकर वह बेटियों को हॉकी का प्रशिक्षण देती हैं, जिससे बेटियां देश का नाम रोशन करती रहें।
वर्ष 1987 में थामी थी हॉकी स्टिक
गुरुग्राम के गांव झाड़सा में जन्मी प्रीतम सिवाच ने वर्ष 1987 में अपने हाथों में स्टिक थामी थी। उस समय वह सातवीं कक्षा की छात्रा थीं। उन्होंने 1990 में पहली राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लिया, जिसमें सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का खिताब मिला। उन्होंने 1992 में जूनियर एशिया कप में पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में भाग लिया था।
ये उपलब्धियां हैं उनके नाम
1992 में पहले अंतरराष्ट्रीय मुकाबले जूनियर एशिया कप में बेस्ट प्लेयर का खिताब।
1998 में एशियाड में देश की कप्तानी करते हुए बैंकाक में 15 वर्ष बाद प्रतियोगिता का रजत पदक।
2002 में मेनचेस्टर इंग्लैंड में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक।
2008-चाइना में एशियन गेम में टीम को प्रशिक्षण दिया।
2010 राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय महिला हाकी टीम की प्रशिक्षक बनी।
2010 अर्जेंटीना में हुए विश्व कप में टीम को प्रशिक्षण दिया।
2017 एशिया कप स्वर्ण पदक विजेता टीम को प्रशिक्षण दिया।