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सरपंचों व पंचायतों पर पांच हजार तक का जुर्माना

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सोनीपत। जिले को स्ट्रे कैटल फ्री बनाने के लिए अधिकारियों ने पशुओं को लावारिस छोड़ने के कारण सरपंचों व पंचायतों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जिन गांवों में लावारिस पशु घूमते हुए मिल रहे है और वहां के सरपंच और पंचायत उनको पकड़वाने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहे है। ऐसे ही सरपंचों व पंचायतों पर जुर्माना लगाया गया है और उनका चालान काट दिया गया है। यह जुर्माना पांच हजार रुपये तक का लगाया गया है और इसके लिए स्ट्रे कैटल फ्री अभियान की टीम खुद गांवों में जाकर निरीक्षण कर रही है। इस कार्रवाई से सरपंचों व पंचायतों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि यह कार्रवाई इस तरह ही आगे भी जारी रहेगी।
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सरकार ने प्रदेश को स्ट्रे कैटल फ्री करने के लिए अभियान छेड़ा हुआ है। उसके लिए ही जिले में सरकारी विभागों की कमेटी बनाकर काम किया जा रहा है। यहां नगर निगम व पंचायत विभाग के अलावा वेटरनरी विभाग से डॉ. रितु सिंह को स्ट्रे कैटल फ्री अभियान का नोडल अधिकारी बनाया हुआ है। इन तीनों विभागों के अधिकारी सड़कों पर घूमने वाले लावारिस गोवंश को पकड़वाकर गोशाला में भिजवा रहे है। इस अभियान के दौरान ही जानकारी में आया था कि लोग दूध देना बंद करने पर पशुओं को सड़कों पर लावारिस छोड़ देते है। ऐसा करने वालों पर अभी तक शहर में कार्रवाई की जा रही थी, लेकिन अब यह कार्रवाई गांवों तक पहुंच गई है। जिसमें सरपंचों व पंचायतों दोनों पर कार्रवाई की जा रही है। इसके तहत ही बेगा गांव में लावारिस पशु मिलने पर वहां के सरपंच यशपाल के नाम पांच हजार रुपये का चालान काटा गया है। वहीं दातौली गांव में लावारिस पशु मिलने पर पंचायत सदस्य जयनारायण के नाम पांच हजार रुपये का चालान काटा गया है। इनके अलावा खेड़ी गुज्जर की इशरत पर 1500 रुपये, भिगान की सविता पर पांच हजार रुपये, विकास नगर के जगदीश पर तीन हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस तरह कार्रवाई होने पर पंचायतों में हड़कंप मच गया।
सरपंचों को भेजा गया था नोटिस
सड़कों पर लावारिस पशु छोड़ने पर अभी तक केवल शहर में लोगों पर जुर्माना लगाया जा रहा था। वहीं डीडीपीओ की ओर से सभी सरपंचों को नोटिस जारी किया गया था कि वह अपने गांव के क्षेत्र में घूमने वाले लावारिस पशुओं को गोशाला में छुड़वाए। उस नोटिस में यह भी साफ कहा गया था कि इसमें कोई सरपंच लापरवाही बरतता है तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। इसका सबसे बड़ा कारण यह था कि सरपंचों के भेजने पर गोशाला संचालक पशुओं को लेने से इंकार नहीं करते है, क्योंकि उनकी ओर से गोशालाओं में चंदा दिया जाता है। इसके बावजूद सरपंच इसपर ध्यान नहीं दे रहे है और इस कारण ही अब जुर्माने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
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नंदी लेने वाली गोशालाओं को सरकारी मदद
गोशाला संचालक अपने यहां नंदी लेने से इंकार करते है। वहीं ऐसे भी गोशाला संचालक है जो अब प्रशासन की मदद के लिए आगे आए है और अपने यहां नंदी लेने लगे है। ऐसे ही गोशाला संचालकों को प्रशासन की ओर से सरकारी मदद दी जा रही है। इसके तहत ही खेड़ी गुज्जर की एक गोशाला के डीसी केएम पांडुरंग ने टिन शेड लगाने में मदद की। डीसी ने साफ कहा है कि जिले को स्ट्रे कैटल फ्री बनाने में प्रशासन की मदद करने वाले गोशाला संचालकों की जरूर के अनुसार मदद की जाएगी।
जिले को स्ट्रे कैटल फ्री बनाने के लिए सरपंचों व पंचायतों को डीडीपीओ की ओर से नोटिस जारी करके लावारिस पशुओं को गोशाला में छुड़वाने के लिए कहा गया था। इसमें कुछ सरपंच मदद कर रहे है तो कुछ सरपंच लापरवाही बरत रहे है। इस कारण ही सरपंचों व पंचायतों पर जुर्माना लगाना शुरू कर दिया गया है और गन्नौर क्षेत्र की कई पंचायतों पर जुर्माना लगाया गया है। यह कार्रवाई जारी रहेगी और इसमें लापरवाही बरतने वालों के चालान काटे जाएंगे। डॉ. रितु सिंह, नोडल अधिकारी स्ट्रे कैटल फ्री अभियान
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