फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

निरंकारी मिशन की 60 देशों में संगत, अब 12

विज्ञापन
विज्ञापन
निरंकारी मिशन की 60 देशों में संगत, अब 128 देशों में शुरू हुए सत्संग, वहां भी बनाए जाएंगे भवन
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। निरंकारी संत समागम में ऐसे ही लाखों श्रद्धालु नहीं पहुंच रहे हैं, बल्कि निरंकारी मिशन की राह पर चलने वाले श्रद्धालु भारत के साथ ही 60 देशों में मौजूद हैं। निरंकारी मिशन का 60 देशों का यह दायरा भी तेजी से बढ़ रहा है और अब 128 देशों में सत्संग होने शुरू हो गए हैं। लेकिन वहां अभी तक निरंकारी भवन नहीं हैं और वहां जल्द ही इसको रजिस्टर्ड कराकर भवन बनाने की तैयारी है। जिस तरह से विदेशों तक में श्रद्धालुओं की तादाद बढ़ रही है, उससे यह जरूर साफ हो रहा है कि निरंकारी मिशन में संगत तेजी से बढ़ती जा रही है। इसमें सद्गुरु माता सुदीक्षा के गद्दी संभालने के बाद भी तेजी आई है और निरंकारी मिशन की आवाज को हर जगह पहुंचाने के लिए काम किया जा रहा है।
निरंकारी मिशन के प्रेस एवं पब्लिसिटी इंचार्ज कृपा सागर ने बताया कि निरंकारी मिशन की संगत इस समय 60 देशों के अंदर है, जिसमें यूरोप के सभी देश शामिल हैं तो एशिया के काफी देश शामिल हो चुके हैं। इन 60 देशों के अंदर 200 निरंकारी भवन हैं जो उन देशों में रजिस्टर्ड हैं। लेकिन इसमें चंद साल में बड़ी तेजी आई है और निरंकारी सत्संग 128 देशों में होने शुरू हो गए हैं। हालांकि 60 से ज्यादा देशों में अभी निरंकारी भवन नहीं हैं, लेकिन जिन देशों में सत्संग हो रहे हैं और वहां संगत बन गई है। वहां पर जल्द ही निरंकारी भवन बनाने की तैयारी की जा रही है, जिनको उस देश में रजिस्टर्ड भी कराया जाएगा। कृपा सागर बताते हैं कि निरंकारी मिशन के अनुसार मानवता का संदेश पूरी दुनिया में पहुंचाना है और इसके लिए ही संगत को बढ़ाया जा रहा है। जिससे मानवता का संदेश पूरी दुनिया में एक-एक इंसान के पास तक पहुंच सके।
विज्ञापन

--
सद्गुरु माता सुदीक्षा का पहला समागन होने से श्रद्धालुओं की भारी भीड़
गन्नौर के पास जीटी रोड के किनारे शुरू हुए निरंकारी संत समागम में भारी भीड़ पहुंच रही है। इसका एक बड़ा कारण यह भी माना जा रहा है कि सद्गुरु माता सुदीक्षा का यह पहला समागम है। क्योंकि सद्गुरु माता सुदीक्षा ने 16 जुलाई 2018 को गद्दी संभाली है और उनसे पहले सद्गुरु माता सविंदर हरदेव महाराज थी। उनके निधन के बाद ही माता सुदीक्षा को गद्दी सौंपी गई और गन्नौर में पहली बार अपनी 600 एकड़ जमीन पर विशाल संत समागम करने का फैसला लिया गया। इससे पहले दिल्ली के बुराडी में संत समागम होता था, लेकिन वहां जगह काफी कम होती थी। इस कारण ही यहां संत समागम कराने का निर्णय लिया गया।
--
महिला श्रद्धालु अपने छोटे बच्चों के साथ पहुंचीं
निरंकारी संत समागम में सद्गुरु माता सुदीक्षा का आशीर्वाद दिलाने के लिए महिला श्रद्धालु अपने नन्हे- मुन्ने बच्चों के साथ पहुंची हैं। वहीं समागम में माता से आशीर्वाद लेने के लिए संगत में उत्साह देखते ही बनता है और हर कोई सद्गुरु माता सुदीक्षा की एक झलक पाना चाहता है। जिससे उनका आशीर्वाद मिलने पर संगत निहाल हो सके।
--
सद्गुरु माता की बहनें भी समागम में परिजनों संग पहुंची
संत समागम के पहले दिन सद्गुरु माता सुदीक्षा की बड़ी बहन समता निरंकारी व उनसे छोटी बहन रेनूका निरंकारी भी परिजनों के साथ समागम में पहुंची। समागम के पहले दिन सद्गुरु माता सुदीक्षा ने विश्व के नाम संदेश दिया। उस समय भी सद्गुरु माता सुदीक्षा की बहनें समागम स्थल में सत्संग सुनती रहीं।
--
निरंकारी प्रदर्शनी बन रही है आकर्षण का केंद्र
समागम में लगाई गई प्रदर्शनी में निरंकारी मिशन के दर्शन, इतिहास, समाज एवं मानवता के प्रति की गई विभिन्न गतिविधियों को दर्शाया गया है। निरंकारी प्रदर्शनी वहां आने वाली संगत के लिए आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है। निरंकारी प्रदर्शनी में संत समागम के संदेश निराकार-सहज जीवन का आधार विषय पर सहजता की रूह पर एक विशेष अनुभाग बनाया गया है, जिसमें मानव के संतुलित और आनंदित जीवन को प्रदर्शित किया गया है। वहीं प्रदर्शनी में माता सुदीक्षा के संदेश में दर्शाया गया है कि आज मानवता जाति-पाति, भाषा व संस्कृति के भेदभाव से ग्रस्त हो रही है। आम व्यक्ति नकारात्मकता की सोच से ऊपर उठ कर शांति एवं सौहार्द में जीवन व्यतीत करना चाहता है।
--
हर टेंट पर नंबर, प्रदेश का नाम भी लिखा
समागम में देश व विदेश से आए श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी नहीं हो सके, उसके लिए अलग-अलग राज्यों व जिलों के टेंट लगाए गए हैं। उन टेंट में श्रद्धालुओं के रुकने की व्यवस्था की गई है। उन टेंट पर नंबर लिखे गए हैं तो प्रदेश व जिले का नाम भी लिखा गया है। जिससे उस प्रदेश व जिले के श्रद्धालु अपने ही टेंट में रुके और वह किसी अन्य जगह पर नहीं रहे। इस तरह पूरी व्यवस्था की गई है।
विज्ञापन

--
सेवा भाव के साथ लगे रहे सेवादार, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही
समागम में जिस तरह से भीड़ पहुंच रही है, उसके बावजूद किसी तरह की अव्यवस्था नहीं दिख रही है। क्योंकि वहां बड़ी संख्या में हर जगह पर सेवादार तैनात है जो वहां व्यवस्था बनाए हुए हैं। सड़क से लेकर पार्किंग तक वाहनों को पहुंचवाने में सेवादार लगे हैं तो समागम स्थल पर भी पूरी व्यवस्था सेवादार संभाले हुए हैं। समागम स्थल के मंच के पास किसी को ऐसे नहीं जाने दिया जा रहा है और वहां सेवादार व पुलिस कर्मियों की आठ बार की चेकिंग के साथ ही अधिकृत लोगों को जाने दिया जाता है। इस तरह वहां सेवादार व भारी पुलिस बल सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा संभाले हुए हैं।
--
निरंकारी मिशन के छह महाराज का इस तरह रहा सफर
बाबा बूटा सिंह-1929 से 1943
बाबा अवतार सिंह-1943 से 1962 (गद्दी खुद छोड़कर सौंपी)
बाबा गुरुवचन सिंह-1962 से 1980
बाबा हरदेव सिंह-1980 से 2016 (कनाड़ा में दुर्घटना में शरीर त्यागा)
सद्गुरु माता सविंदर हरदेव-2016 से 2018
सद्गुरु माता सुदीक्षा-16 जुलाई 2018 से अबतक
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें