जिला परिषद की मीटिंग में एक भी अफसर नहीं पहुंचने से भड़के पार्षद, कहा अब कार्रवाई नहीं हुई तो सौंप देंगे इस्तीफा
अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। जिले के अधिकारी जिला परिषद को कुछ नहीं मानते हैं और यही कारण है कि एक भी अधिकारी जिला परिषद की मीटिंग में नहीं पहुंचता है। इसको लेकर ही सोमवार को पार्षद भड़क गए और वहां साफ कर दिया गया कि अब अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती है तो वह अपना इस्तीफा सौंप देंगे। क्योंकि पिछले दो साल से अधिकतर विभागों के अधिकारी मीटिंग में नहीं पहुंच रहे हैं और उनको नोटिस तक जारी हो चुका है। इसको लेकर ही घंटों तक हंगामा चलता रहा और पार्षदों ने अधिकारियों की लापरवाही के कारण ही समस्याओं का समाधान व विकास कार्य नहीं होने का आरोप लगाया। सीईओ ने पार्षदों को शांत करके इस बार अधिकारियों के खिलाफ सीधे सीएम को शिकायत करने की बात कही। उसके बाद पार्षदों ने मीटिंग की खानापूर्ति करते हुए सीईओ के सामने समस्या रखी, जिनको विभागों में भिजवाने की बात कही गई।
जिला परिषद बोर्ड की आखिरी मीटिंग अक्टूबर 17 में हुई थी और इस तरह अब चार महीने बाद सोमवार को मीटिंग कराई गई। जिला परिषद कार्यालय में चेयरमैन मीना नरवाल, वाइस चेयरमैन बिजेंद्र मलिक के अलावा 14 पार्षद व सीईओ जितेंद्र कुमार पहुंच गए। लेकिन वहां बिजली, पब्लिक हेल्थ, सिंचाई, समाज कल्याण विभाग, खेल विभाग, शिक्षा विभाग, एचएसआईआईडीसी, पीडब्ल्यूडी, बैंक आदि से एक भी जिला स्तरीय अधिकारी नहीं पहुंचा। वहां 10 विभागों के कर्मी पहुंचे थे, जिनमें क्लर्क तक शामिल थे। वहां मीटिंग की कार्रवाई शुरू हुई और पार्षदों ने अपने वार्डों की समस्याओं को रखना शुरू किया तो उनसे संबंधित अधिकारियों को देखा गया। लेकिन वहां अधिकारी नहीं मिले तो उससे पार्षदों का गुस्सा भड़क गया। पार्षदों ने आरोप लगाया कि जिला परिषद को अधिकारी सीरियस नहीं लेते है और दो साल से कोई भी अधिकारी मीटिंग में नहीं आता है। अधिकारियों के मीटिंग में नहीं आने से जनता की जिन समस्याओं को लेकर मीटिंग में आते है, उनका समाधान नहीं हो पाता है तो अधिकारियों के नहीं आने से विकास कार्य भी नहीं हो रहे हैं। जबकि पहले भी कई बार मीटिंग में नहीं आने पर उनको नोटिस भेजे जा चुके हैं और उसके बाद भी वह नहीं सुध रहे है। उन नोटिस का जवाब लिखकर भेज दिया जाता है कि वह छुट्टी पर थे या मीटिंग में व्यस्त थे। पार्षदों ने साफ कहा कि जब अधिकारी इस तरह का रवैया अपना रहे है और उनके यहां कोई विकास कार्य नहीं हो रहा है तो इस तरह वह इस्तीफा दे देंगे। जिसपर सीईओ जितेंद्र कुमार ने कहा कि इस बार मीटिंग में नहीं आने वालों के उच्च अधिकारियों व सीएम को पत्र भेजकर शिकायत की जाएगी। वहीं खेल विभाग के अधिकारियों के खिलाफ अलग से कार्रवाई कराने के लिए पत्र लिखा जाएगा, क्योंकि वह जिला परिषद के सामने कार्यालय होने के बावजूद एक भी बार मीटिंग में नहीं आए। इस तरह अधिकारियों को लेकर घंटों तक हंगामा होता रहा और पार्षदों ने चेयरमैन व सीईओ के सामने ही अपनी समस्याएं रखी।
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ऑफिस में जाने पर अधिकारी काम करना दूर, बैठने तक को नहीं कहते
जिला परिषद वार्ड 2 से पार्षद अशोक आहुलाना ने लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं होने पर अपना दर्द चेयरमैन मीना नरवाल व सीईओ जितेंद्र के सामने बयां किया। पार्षद ने कहा कि उनके यहां सबसे बड़ी समस्या बुजुर्ग पेंशन को लेकर है और बुजुर्गों को खेड़ी मिरधापुर समेत कई गांवों में पेंशन ही नहीं मिल रही है। उनकी समस्या को लेकर वह अधिकारियों के पास जाते है तो उनका काम करना दूर, उनको बैठने या पानी तक के लिए नहीं पूछा जाता है। पार्षद ने कहा कि इस हालात में अगर वह दोबारा गांवों में वोट लेने जाएंगे तो लोग उनको ईंट मारकर भगा देंगे। इसपर सीईओ जितेंद्र कुमार ने कई विभागों से आए कर्मियों को कहा कि पार्षद को किसी भी लाइन में नहीं लगने दिया जाए और उनकी समस्या को तुरंत सुना जाए। वहीं पार्षदों को सिटीजन चार्टर के आधार पर काम कराने के लिए कार्यालय से प्रार्थना पत्र की रिसीविंग लेकर आने को कहा गया।
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एक साल से खराब पड़ा ट्यूबवैल, सड़कें भी टूटी पड़ी
वार्ड 23 से पार्षद नंदकिशोर चौहान ने समस्या रखी कि पबसरा गांव में एक साल से ट्यूबवेल खराब है, जिससे पानी की समस्या है। उसकी शिकायत करने के बाद भी ठीक नहीं कराया जा रहा है। वहीं खटकड़ गांव के स्कूल में पंजाबी पढ़ने के लिए छात्र नहीं है तो वहां पंजाबी की शिक्षक कार्यरत है और मनौली गांव के स्कूल में 75 बच्चों को अकेला शिक्षक पढ़ाता है। जिससे वहां बच्चे सही से पढ़ भी नहीं पाते है। वहीं अटेरना से जखौली, अटेरना से पतला, जाटी कलां से दहिसरा तक की सड़कें टूटी हुई है, जिनको जल्द बनवाया जाए। वार्ड 10 की पार्षद यशवंती ने भठगांव के स्कूल के ग्राउंड के हालात खराब बताए, जहां लोगों ने उपले रखे हुए है और लड़कियों के खेलने की जगह नहीं है। कहा कि वहां आवारा किस्म के युवक बैठे रहते है और लड़कियों के साथ अभद्रता भी करते हैं।
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12 गांवों के लोगों को अप्रैल से बैंक से मिलेगी पेंशन
जिले के 12 गांवों के लोगों की पेंशन अभी तक वोडाफोन कंपनी की ओर से बांटी जाती है। लेकिन इस कंपनी की पेंशन बांटने में बड़ी लापरवाही सामने आ रही है और इसको देखते हुए ही अब इन गांवों के बुजुर्गों की पेंशन भी बैंक से कराई जा रही है, जिसके लिए पेंशन धारकों के खाते पहले बैंक में खुलवाए जा रहे है। यह प्रक्रिया अप्रैल से शुरू कर दी जाएगी। समाज कल्याण विभाग से पहुंचे कर्मी ने पेंशन की समस्या उठाए जाने पर मीटिंग में यह बात बताई।
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चेयरमैन पर लगे आरोप, सीईओ ने कहा विजिलेंस जांच चल रही
मीटिंग में पार्षद जयदीप यादव ने आरटीआई दिखाते हुए मामला उठाया कि चेयरपर्सन जिस गाड़ी के नाम से सरकार से तेल का पैसा ले रही है, वह गाड़ी उनके पास नहीं है। वहीं अन्य कई मामलों में जिला परिषद में भ्रष्टाचार फैल रहा है, जहां ग्रांट देने के नाम पर कमीशन मांगा जाता है। इसको लेकर चेयरमैन पक्ष के पार्षदों ने खड़े होकर विरोध भी जताया और पार्षद आपस में नोकझोंक करने लगे। इसपर सीईओ ने उनको कहा कि इन सभी मामलों की जांच विजिलेंस, एडीसी कर रहे है। वहां स्थिति साफ हो जाएगी कि भ्रष्टाचार है या नहीं।
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पार्षद के पिता को पुलिस ने बाहर निकाला
मीटिंग में पार्षद आरती बरौणा नहीं पहुंच सकी थी, जिससे उसके पिता मीटिंग में जाकर बैठ गए। वह चेयरमैन पर भ्रष्टाचार को लेकर आरोप लगाने लगे तो तब उनसे बेटी की जगह मीटिंग में बैठने का कारण पूछा गया। उन्होंने बेटी के किसी कारण से नहीं आ पाने की बात कही तो पुलिस ने उनको पकड़कर बाहर निकाल दिया।
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जिला परिषद का विवाद खत्म कराने पहुंचे जिलाध्यक्ष, हंगामा हुआ
जिला परिषद में चेयरमैन मीना नरवाल व वाइस चेयरमैन बिजेंद्र मलिक का गुट बना हुआ है और दोनों गुटों में पार्षद भी बंटे हुए है। इस तरह दोनों गुटों के बीच आए दिन विवाद रहता है। इस विवाद को खत्म कराने के लिए ही भाजपा जिलाध्यक्ष धर्मवीर नांदल भी सोमवार को परिषद कार्यालय में पहुंचे। जिलाध्यक्ष ने पहले वाईस चेयरमैन व उनके साथी पार्षदों को समझाया और उसके बाद चेयरपर्सन पक्ष के पार्षदों को समझाया। वाईस चेयरमैन पक्ष के पार्षदों ने उनके सामने हंगामा भी किया, लेकिन उनको शांत किया गया। वहीं वाईस चेयरमैन बिजेंद्र मलिक ने मामला उठाया कि आगे से चेयरपर्सन के कार्यालय की जगह मीटिंग हॉल में मीटिंग होगी और वह चेयरमैन के कार्यालय में नहीं आएंगे।
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स्कूलों में आरओ व सोलर सिस्टम लगवाने को आगे आए पार्षद
मीटिंग में पार्षदों ने कहा कि जिला परिषद को स्कूलों को बेहतर करने के लिए कदम उठाने चाहिए और उसके लिए स्कूलों में सबसे पहले आरओ व सोलर सिस्टम लगवाने चाहिए। वहीं स्कूलों में स्मार्ट क्लास बनाने की बात भी उठाई गई, जिसपर सीईओ ने प्रस्ताव मांगे है। वहीं पहली मीटिंग की कार्रवाई पढ़कर सुनाते हुए कहा गया कि गांवों में सोल लाइट लगवाने का प्रस्ताव पास हुआ था, जिसके लिए पार्षद गांवों के नाम नहीं दे रहे है। कचरे से खाद बनाने के लिए प्लांट लगवाने के प्रस्ताव पर भी पार्षदों ने गांवों के नाम नहीं दिए है। इनको जल्द ही देने के लिए कहा गया।
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मनरेगा का 999 लाख का बजट पास तो परिषद को 4 करोड़ मिले
सीईओ जितेंद्र कुमार ने बताया कि मनरेगा का जिले को बजट मिलता है, जिसको जिला परिषद की मीटिंग में पास कराना होता है। जिससे जिला परिषद भी मनरेगा के तहत काम करा सके। कहा कि जिले को 999.35 लाख का बजट मिला है, जिसे सभी पार्षदों ने पास करने की मंजूरी दी। वहीं बताया गया कि जिला परिषद को राज्य वित्त विभाग से 4 करोड़ 14 लाख 86 हजार रुपये मिले है तो एससी क्षेत्रों में काम कराने को 10 लाख रुपये मिले है। यह राशि सभी पार्षदों में काम कराने के लिए बराबर बांटी जाएगी।