बीपीएस मेडिकल कालेज में बड़ा फेरबदल, डायरेक्टर पद से डाक्टर बत्रा को हटाकर डाक्टर रेनू को कुर्सी पर बैठाया
अमर उजाला ब्यूरो
गोहाना/सोनीपत। खानपुर कलां के बीपीएस राजकीय महिला मेडिकल कॉलेज में सरकार ने अचानक से बड़ा फेरबदल किया है। जहां डा. एपीएस बत्रा को डायरेक्टर पद से हटा दिया गया है और उनकी जगह डा. रेनू गर्ग को कुर्सी पर बैठा दिया गया है। सरकार की ओर से फैक्स आते ही डा. रेनू गर्ग ने डायरेक्टर की कुर्सी पर कब्जा जमा लिया है। डायरेक्टर रहे डा. एपीएस बत्रा ने तीन महीने पहले कालेज के अस्पताल में सुविधाएं नहीं होने की बात कहते हुए एसीएस व विभाग के डायरेक्टर को इस्तीफा सौंप दिया था तो वह अपने विभाग के खिलाफ भर्ती निकालने पर कोर्ट भी चले गए थे। इस कारण ही डा. बत्रा को हटाने की तैयारी चल रही थी और अब उनको केवल प्रैक्टिस के साथ पढ़ाई की जिम्मेदारी दी गई है।
बीपीएस मेडिकल कालेज खानपुर में डायरेक्टर रहे डा. पीएस गहलौत के सेवानिवृत्त होने के बाद डा. एपीएस बत्रा को डायरेक्टर बनाया गया था। डा. एपीएस बत्रा ने जून 2018 को डायरेक्टर का पद संभाला था। वह अगस्त 2016 से अक्टूबर 2016 तक भी डायरेक्टर रह चुके थे और उनको सीनियर होने के कारण ही अब दोबारा से डायरेक्टर बनाया गया था। क्योंकि डा. एपीएस डीन एकेडमिक, प्रशासनिक अधिकारी जैसे अहम पदों पर भी रह चुके थे। लेकिन अब अचानक सरकार ने उनको बड़ा झटका दिया है और उनको डायरेक्टर पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह पर बायोकैमेस्ट्री विभाग की हेड रह चुकीं व इस समय डीन एकेडमिक डा. रेनू गर्ग को डायरेक्टर बना दिया गया है। डा. रेनू गर्ग जून 2016 से अगस्त 2016 तक कार्यवाहक डायरेक्टर भी रह चुकी हैं। यह कहा जा रहा है कि मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च विभाग के अधिकारी कई महीनों से डायरेक्टर डा. एपीएस बत्रा को कुर्सी से हटाने में लगे हुए थे और अब उनको अचानक फैक्स भेजकर हटा दिया गया। डा. एपीएस बत्रा को फिलहाल कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई है और वह अभी केवल प्रैक्टिस के साथ ही शिक्षण कार्य करेंगे। वहीं डा. रेनू गर्ग ने भी आदेश आते ही डायरेक्टर के पद को संभाल लिया है।
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डा. एपीएस बत्रा ने अस्पताल में सुविधा नहीं होने की बात कहकर सौंपा था इस्तीफा
डा. एपीएस बत्रा उस समय ज्यादा चर्चा में आए थे, जब उन्होंने विभाग की मीटिंग में डायरेक्टर व एसीएस को कालेज के अस्पताल में सुविधाएं नहीं होने की बात कहते हुए इस्तीफा सौंप दिया था। डा. एपीएस बत्रा ने उन हालात में काम नहीं कर पाने में असमर्थता जताई थी। क्योंकि लांड्री का टेंडर नहीं छोड़ा जा रहा था तो ऑक्सीजन की सप्लाई का टेंडर खत्म हो चुका था। बायोमेडिकल वेस्ट का टेंडर भी नहीं हुआ था और अस्पताल का एचवीएसी प्लांट भी खराब होने से बिजली आपूर्ति ठप हो जाती थी और एसी व मशीनें बंद होने से मरीजों की जान पर आफत आ जाती थी। डा. एपीएस बत्रा ने निदेशक मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च को 30 जुलाई को पत्र भेजा था, लेकिन इनमें से एक भी समस्या को दूर करने की अनुमति नहीं देने पर अगस्त के आखिरी दिनों में इस्तीफा सौंप दिया था। उस समय उनको नहीं हटाया गया था, लेकिन विभाग में अंदरूनी तौर पर उनको हटाने की शुरूआत कर दी गई थी। इसके लिए ही डायरेक्टर के लिए विज्ञापन निकाला गया था, जिसके नियम गलत होने के कारण डा. एपीएस बत्रा कोर्ट भी चले गए थे।
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डाक्टर एपीएस बत्रा ने खुद ही इस्तीफा सौंपा था और उसके लिए कहा था कि वह निजी कारणों से डायरेक्टर नहीं रहना चाहते हैं। उन्होंने केवल शिक्षण कार्य करने की बात कही थी और इस कारण ही उनको हटाया गया है। वहीं महिला मेडिकल कालेज है तो डायरेक्टर भी महिला ही रहेगी तो वहां ज्यादा बेहतर कार्य हो सकेगा। अमित झा, एसीएस मेडिकल शिक्षा विभाग