नियम-134 ए के तहत अभिभावकों द्वारा निजी स्कूलों में बच्चों के दाखिले को लेकर चल रही तनातनी पर विराम देने के लिए उपायुक्त राजीव रतन ने सभी निजी स्कूलों के संचालकों की लघु सचिवालय में बैठक बुलाई।
बैठक में उन्होंने सभी निजी स्कूल संचालकों को स्पष्ट आदेश दिया कि बीपीएल और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के दाखिले में कोई देरी न करें। बैठक के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि दाखिले के दौरान यदि बच्चों को किसी भी तरह के प्रमाण पत्रों की कोई दिक्कत आती है तो वह दाखिले के बाद भी पूरी हो सकती है।
ऐसे में निजी स्कूल दाखिले को प्राथमिकता दें। इधर, निजी स्कूल के संचालकों ने बैठक के एजेंडे को लेकर आपत्ति जताई और कहा कि उन्हें तो नियम-134 ए को लेकर बुलाई बैठक के बारे में किसी तरह की कोई जानकारी ही नहीं दी गई। बैठक के दौरान स्कूल संचालकों ने उपायुक्त के सामने दाखिले को लेकर कुछ मुद्दों पर अपनी आपत्ति भी जाहिर की।
बैठक में 13 स्कूलों के बारे में ली जानकारी
बैठक के दौरान उपायुक्त ने कहा कि ड्रॉ के तहत बीपीएल और आर्थिक रूप से कमजोर श्रेणी के लगभग सभी बच्चों को दाखिला दे दिया है। ड्रॉ के तहत 13 स्कूलों में दाखिले को लेकर आ रही परेशानी के बारे में उन्होंने ऐसे सभी स्कूल संचालकों से स्पष्टीकरण भी मांगा। उपायुक्त के स्पष्टीकरण के बाद स्कूल संचालकों ने आधे-अधूरे प्रमाण पत्र पूरे न होने की बात रखी और कहा कि उन्हीं बच्चों के दाखिले नहीं हो पा रहे हैं, जो अपने मूल प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं कर सके हैं।
उपायुक्त ने कहा-बच्चों को न भुगतने दें खामियाजा
बैठक में दाखिले को लेकर उपायुक्त ने बच्चों का पक्ष लिया और कहा कि नियम-134 ए के तहत के दाखिले के मामले में बच्चों को परेशानी में न डालें। उन्होंने कहा कि जो भी अभिभावक प्रमाण पत्र पूरे नहीं करता उन्हें एक निर्धारित समय दें। बावजूद कोई प्रमाण पत्र पूरे नहीं करता है तो उसकी जिम्मेदारी अभिभावकों की होगी न कि स्कूल संचालकों की।
बैठक में उठा फर्जी दस्तावेज का मामला
बैठक में निजी संचालकों ने फर्जी दस्तावेज का भी मामला उठाया। कुछ स्कूल संचालकों ने बताया कि कुछ अभिभावक अपने बच्चों के दाखिले कराने के लिए फर्जी आय प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर रहे हैं। संचालकों ने कहा कि इस तरह के फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने से दाखिले के दौरान परेशानी आ रही है। इसे लेकर उपायुक्त ने कहा कि यदि इस तरह की बात सामने आती है तो इस बारे में इसकी सूचना उन तक पहुंचाएं। इस बारे में विस्तार से जांच की जाएगी। बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी परमेश्वरी हुड्डा व खंड शिक्षा अधिकारी प्रोमिला भारद्वाज विशेष रूप से मौजूद थीं।
हरियाणा संयुक्त विद्यालय संघ के अध्यक्ष ने की आपत्ति जाहिर
ड्रॉ के तहत बच्चों के दाखिले को लेकर कोई निजी स्कूल संचालक भेदभाव नहीं कर रहा है। कुछ लोगों की वजह से निजी स्कूलों को बदनाम किया जा रहा है। कुछ ही ऐसे बच्चे हैं जिनके दाखिले लेने में परेशानी आ रही है। खासकर उनके जिन्होंने अपने प्रमाण पत्र आधे-अधूरे जमा करा रखे हैं। सबसे बड़ी दिक्कत यह आ रही है कि दाखिले के लिए इकोनामिक वीकर सेक्शन के तहत आने वाले अभिभावक नहीं आ रहे बल्कि फर्जी आय प्रमाण पत्र लेकर आ रहे हैं। इससे जो सही मायने में गरीब बच्चा है वह वंचित हो रहा है, जबकि इसके तहत दाखिले का फायदा कोई और उठा रहा है। -बृजेंद्र मान, अध्यक्ष, हरियाणा संयुक्त विद्यालय संघ
छात्र-अभिभावक संघ ने किया स्वागत
छात्र-अभिभावक संघ के जिला संयोजक विमल किशोर ने उपायुक्त के इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य गरीब अभिभावकों के बच्चों का दाखिले से है। सभी निजी स्कूलों को दाखिले को लेकर स्पष्ट रवैया रखना चाहिए।
-विमल किशोर, संयोजक, छात्र अभिभावक संघ
नियम 134-ए के तहत दाखिला नहीं होने को लेकर एआईएसएफ के नेतृत्व में कुछ बीपीएल अभिभावकों ने भी उपायुक्त राजीव रतन से मुलाकात की। उन्होंने खंड शिक्षा कार्यालय पर बीपीएल बच्चों के प्रमाण पत्र गुम करने का आरोप लगाया। इस पर उपायुक्त ने उन्हें जिला शिक्षा विभाग से संपर्क साधकर इस समस्या को हल करने को कहा। बाद में सभी उप जिला शिक्षा अधिकारी से मुलाकात की और उन्हें सभी प्रमाण पत्र गुम होने को लेकर बात रखी। इस पर उन्होंने सभी को 11 सितंबर को जिला शिक्षा कार्यालय में बुलाया और इस संबंध में जांच की बात कही।