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7वीं तक के स्कूल में सात तो 10वीं तक वाले में 20 बच्चे

Wed, 29 Mar 2017 12:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो सोनीपत।
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सरकार भले ही निजी स्कूलों में नियम 134 ए के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को ज्यादा से ज्यादा दाखिला दिलाने का प्रयास कर रही हो, लेकिन निजी स्कूलों के मालिक हेराफेरी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसा ही बड़ा फर्जीवाड़ा सीटों का ब्यौरा देने में किया गया। स्कूल संचालकों ने अपने यहां कम सीटें बता दीं, जिससे नियम 134 ए के तहत उनके स्कूल में गरीब बच्चों को कम से कम दाखिला देना पड़े। किसी स्कूल ने अपने यहां बच्चों की संख्या 50 तो किसी ने 100 बताई है। हालांकि यह फर्जीवाड़ा अधिकतर छोटे स्कूलों ने किया है, लेकिन बड़े स्कूल भी इसमें ज्यादा पीछे नहीं हैं। जिनके यहां 800-1200 तक बच्चे पढ़ रहे हैं, ऐसे स्कूलों ने सरकार को भेजे डाटा में केवल 300 बच्चे दिखाए हैं। स्कूल संचालक यह फर्जीवाड़ा करके बच नहीं सकेंगे क्योंकि डीईओ किसी भी स्कूल में जांच कर सकते हैं। शिक्षा विभाग के पास स्कूलों का यू-22 के तहत पूरा डाटा मौजूद है। उससे ही स्कूलों से मिले बच्चों के ब्यौरे का मिलान किया जाएगा और फर्जीवाड़ा करने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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250 में से 157 स्कूलों ने ही दिया ब्यौरा
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे भी प्राइवेट स्कूलों में पढ़ सकें, उसके लिए सरकार की ओर से नियम 134 ए बनाया गया। इसके तहत प्राइवेट स्कूलों में अपने यहां पढ़ रहे बच्चों की संख्या के 10 प्रतिशत गरीब परिवारों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा देनी होती है। किस स्कूल में कितने बच्चे पढ़ रहे हैं और उसके आधार पर वहां कितने गरीब परिवारों के बच्चों का एडमिशन हो सकता है, इसके लिए ही सरकार की ओर से स्कूलों को ऑनलाइन यह जानकारी देने के लिए कहा गया था। यह जानकारी 20 मार्च तक सभी स्कूलों को देनी थी। जिले में 250 से ज्यादा स्कूल है, जिनमें सीबीएसई व हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूल शामिल हैं। इन 250 से ज्यादा स्कूलों में केवल 157 ने सीटों का ब्यौरा दिया है। इसमें भी काफी स्कूलों ने बड़ा फर्जीवाड़ा कर दिया और अपने यहां पढ़ रहे बच्चों की संख्या कम बता दी।
विभाग ने सार्वजनिक की सूची
शिक्षा विभाग ने उस सूची को सार्वजनिक किया है, जिन स्कूलों ने सीटों का ब्यौरा दिया है और यह बताया है कि उनके यहां कितनी सीटों पर 134 ए के तहत एडमिशन हो सकता है। उसके बाद ही यह खेल सामने आया है कि स्कूलों ने किस तरह से अपने यहां छात्रों की संख्या काफी कम होने का ब्यौरा दिया है।
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स्कूल संचालकों ने ब्यौरे को बना दिया मजाक
शिक्षा विभाग की ओर से जिस लिस्ट को जारी किया गया है, उसको देखकर खुद डीईओ भी चौंक गए। स्कूल संचालकों ने जो सूची उपलब्ध कराई है, वह किसी मजाक से कम नहीं लग रही है। सातवीं तक के एक स्कूल में हर क्लास में एक-एक बच्चा दिखाया गया है और इस तरह उसमें केवल सात बच्चे पढ़ रहे हैं। एक स्कूल 10वीं तक है, जिसमें 20 बच्चे पढ़ रहे हैं और उसमें 10वीं क्लास में केवल एक बच्चा पढ़ता है। इस तरह के काफी स्कूल हैं जो 8वीं तक होने के बावजूद उसमें 43 बच्चे पढ़ा रहे हैं। 5वीं तक वाले एक स्कूल में 15 बच्चे पढ़ रहे हैं तो तीसरी क्लास तक वाले में 12 बच्चे दिखाए हैं। सूची में ऐसे काफी स्कूल हैं, जिन्होंने अपने यहां केवल 100 से कम बच्चे होने की बात कही है। वहीं ऐसे कई बड़े स्कूलों ने भी गलत सीटों की जानकारी दी है, जिनके यहां 1000 से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं उन्होंने अपने यहां केवल 700 तक बच्चे बताए हैं।
शिक्षा विभाग के पास सभी स्कूलों का यू-22 के तहत पूरा डाटा होता है। उस डाटा से स्कूलों की ओर से दी गई सीटों की जानकारी का मिलान किया जाएगा। जिसने भी कम सीटें बताई हैं और विभाग को गुमराह किया है उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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-जिले सिंह, डीईओ
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