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सवा करोड़ से छपरा ड्रेन का बनेगा गेट, बाढ़ की समस्या से मिलेगी मुक्ति

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अमर उजाला ब्यूरो
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गोहाना। बनवासा समेत आसपास के आधा दर्जन गांवों को बाढ़ से स्थाई तौर से मुक्ति दिलाने के लिए सिंचाई विभाग ड्रेन-आठ पर छपरा के पास गेट बनवाएगा। इसके लिए सरकार से मंजूरी मिल चुकी है। जल्द ही इसका टेंडर जारी कर दिया जाएगा।
सिंचाई विभाग ने बनवासा के आसपास के गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए छपरा ड्रेन पर गेट बनवाने का फैसला लिया है। विभाग का कहना है कि बनवासा गांव के अलावा आसपास के गांव की जमीन बेहद नीचे होने के कारण वहां थोडी सी बारिश मेें ही खेतों में पानी भर जाता है। गांव बनवासा के पास बनाई गई ड्रेन खेतों की जमीन से कम से कम से सात इंच ऊपर है। इस कारण खेतों में यदि पानी भर जाए तो उसे ड्रेन के माध्यम से नहीं निकाला जा सकता।
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लेवल ठीक नहीं होना भी है बाढ़ का कारण
छपरा ड्रेन का लेवल शून्य बुर्जी से टेल तक मात्र दो फुट का है। शून्य बुर्जी से टेल तक लेवल की लंबाई 14 किलोमीटर है। नियमानुसार एक हजार मीटर पर 0.15 सेमी का लेवल होना चाहिए। जबकि, बनाया गया लेवल मात्र 0.05 सेंमी. है। इस प्रकार 14 किलोमीटर लंबाई के हिसाब से हेड से टेल तक लेवल में छह फुट का अंतर होना चाहिए। लेकिन, बनवासा और आसपास के गांवों की जमीन बेहद नीचे होने के कारण लेवल कम करना पड़ा। इस कारण पानी का बहाव तेज नहीं हो पाता। ड्रेन नंबर आठ का पूरा पानी निकलने के बाद ही बनवासा के खेतों का पानी निकल पाता है।
गेट बंद कर लगाया जाएगा पंप
सिंचाई विभाग अब सवा करोड़ रुपये की लागत से उस स्थान पर गेट बनवाएगा। यहां छपरा माइनर ड्रेन का पानी ड्रेन-आठ में डाला जा रहा है। लेवल के अनुसार फिलहाल ज्यादा पानी आने पर ड्रेन-आठ का पानी छपरा ड्रेन में चला जाता है। गेट बनने के बाद उसे बंद कर छपरा ड्रेन का पानी पंप लगाकर ड्रेन-आठ में डाला जाएगा। उसके बाद बाढ़ का पानी खेतों से आसानी से निकाला जा सकेगा।
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बनवासा और अन्य गांवों के खेतों में भरे पानी को निकालने के लिए पांच पंप लगाए गए हैं। अगले तीन दिनों में खेतों में भरे बारिश के पानी को निकाल दिया जाएगा। क्षेत्र के अन्य गांवों का पानी निकालने के लिए नौ पंप लगाए गए हैं। इससे जल्द से जल्द खेतों का पानी निकाला जा सकेगा।
नवतेज सिंह, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग।
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