सोनीपत। जिला मुख्यालय से सटे गांव महलाना ने रविवार को सामाजिक चेतना की नजीर पेश की। प्रॉपर्टी और दवा का काम करने वाले रोहित बाल्याण के घर में 35 वर्ष बाद बेटी का जन्म हुआ तो उसके नामकरण के मौके पर 130 गांवों के लोग साक्षी बने।
नामकरण संस्कार में राजदुलारी कामाक्षी और उसकी जननी को ढोल-नगाड़ों और हाथी-घोड़ों व रथ आदि के साथ आयोजन स्थल तक लाया गया। फूलों की वर्षा कर स्वागत किया गया। कामाक्षी का जन्म 6 जनवरी को हुआ था। रविवार को उसका नामकरण संस्कार पूरे पारंपरिक तरीके से किया गया। इस ऐतिहासिक आयोजन में आसपास के करीब 130 गांवों से हजारों लोग शामिल हुए।
शंखनाद के बीच हुआ यज्ञ
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चारण और हवन के साथ हुई। शंखनाद के बीच विधिवत रूप से बेटी का नामकरण संस्कार संपन्न कराया गया। परिवार ने बेटी का नाम कामाक्षी (माता पार्वती का एक रूप) रखा। इसके बाद भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें दूर-दराज से आए लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
बेटों से कम नहीं बेटियां
पिता रोहित बाल्याण ने कहा कि आज बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं हैं। बेटी का जन्म भी उतनी ही खुशी और गर्व का विषय होना चाहिए जितना बेटे का। हमारा यह आयोजन समाज को यह संदेश देने का प्रयास है कि बेटियां परिवार की कमजोरी नहीं बल्कि उसकी सबसे बड़ी ताकत होती हैं। उनके पास पहले से एक बेटा है। अब दूसरे बच्चे के रूप में घर में बेटी ने जन्म लिया है।
ग्रामीणों ने बताया सामाजिक चेतना की मिसाल
ग्रामीणों ने इस आयोजन को बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान का जीवंत उदाहरण बताया। उनका कहना था कि जहां आज भी कुछ स्थानों पर बेटियों के साथ भेदभाव और भ्रूणहत्या जैसी घटनाएं होती हैं वहीं महलाना का यह आयोजन सोच बदलने वाला प्रेरक संदेश देता है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि हर परिवार बेटियों को इसी तरह सम्मान देगा तो समाज अपने आप बेहतर दिशा में आगे बढ़ेगा।
राजनीतिक और सामाजिक लोगों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम में राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियों ने शिरकत की। मुख्यमंत्री नायब सैनी के सलाहकार तरुण भंडारी, कांग्रेस जिला अध्यक्ष कमल दिवान, पूर्व विधायक सुरेंद्र पंवार, अभिषेक ब्रह्मचारी, किसान नेता नरेश टिकैत के पुत्र गौरव टिकैत भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
नन्ही कामाक्षी, गांव महलाना में जिसका नामकरण संस्कार समारोह एक ऐतिहासिक यादगार बन गया। संवाद
नन्ही कामाक्षी, गांव महलाना में जिसका नामकरण संस्कार समारोह एक ऐतिहासिक यादगार बन गया। संवाद
नन्ही कामाक्षी, गांव महलाना में जिसका नामकरण संस्कार समारोह एक ऐतिहासिक यादगार बन गया। संवाद