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कल होंगेे नगर परिषद चेयरमैन के चुनाव

Sun, 11 Dec 2016 12:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
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सिरसा। नगर परिषद के चेयरमैन व वाइस चेयरमैन पद को लेकर चाह्वान पार्षदों ने ताकत झोंक दी है। अब केवल रविवार का दिन बीच में शेष है। सभी पार्टियां बाजी मारने के लिए प्रयास कर रही हैं तो भाजपा में दो गुटों के बीच खिंचातान ज्यों की त्यों बरकरार है। अब देखना यह है कि सोमवार को जीत का सेहरा किस के सिर सजता है।
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नप अध्यक्ष पद के लिए एक बार फिर चुनावी शतरंज बिछने लगी हैं। अब जैसे-जैसे चुनाव का समय नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे गोटियां फिट करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। भाजपा जहां अपना चेयरमैन बनाने के लिए एडी-चोटी का जोर लगा रही है वहीं एकजुट हलोपा और कांग्रेस गठजोड़ कर भाजपा को पटखनी देने की रणनीति बनाए हुए है। सोमवार को  को नगर परिषद के चेयरमैन व वाइस चेयरमैन के चुनाव होने निश्चित हैं। उल्लेखनीय है कि बीती 25 सितंबर को नगर परिषद के सभी 31 वार्डों में पार्षद पद के लिए चुनाव हुए थे। चेयरमैन व वाइस चेयरमैन के चुनाव के लिए बीती 18 नवंबर को बैठक भी बुलाई गई थी लेकिन इस बैठक में सत्तारूढ़ भाजपा के पार्षद शामिल नहीं हुए थे। अब चुनावी बैठक 12 दिसंबर को आहूत की गई है। गैर-भाजपा पार्षदों की ओर से इस बैठक में निर्णायक चुनाव करवाए जाने की मांग की गई है। सूत्र बताते है कि चेयरमैन के चुनाव को लेकर गैर-भाजपाई एकजुट है और वे भाजपा को पटखनी देने की तैयारी किए हुए है। हलोपा व कांग्रेस के पार्षद तो एकजुट है ही, वहीं इनेलो का भी उन्हें मूक समर्थन हासिल है। भाजपा के लिए धड़ेबंदी सिरदर्द बनी हुई है, जिसका कोई परिणाम नहीं निकल पाया है। पिछली बैठक के समय चेयरमैन का चुनाव भाजपा प्रदेशाध्यक्ष पर टाल दिया गया था। लेकिन पार्टी की ओर से अभी तक किसी का नाम चेयरमैन व वाइस चेयरमैन के लिए घोषित नहीं किया गया है। यदि सोमवार को अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हो जाते हैं तो रविवार सभी के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण रहेगा। अंतिम समय में सभी पार्टियां पूरी ताकत झोंक कर अपना वर्स्चव स्थापित करना चाहती हैं। बता दें कि इससे पूर्व इनेलो की कमेटी बनी थी।
नगर परिषद में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं है। 31 सदस्यीय सदन में भाजपा को 15, हलोपा को छह, कांग्रेस को पांच, इनेलो को दो तथा तीन आजाद उम्मीदवारों ने हासिल की है। चेयरमैनी के गणित में भाजपा व गैर-भाजपा दलों के लिए एक-एक वोट बहुत कीमती है। सभी दलों द्वारा अपना वजूद बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे है। गुप्त मतदान की स्थिति में कौन-किसे वोट देगा, यह भी पता नहीं चल पाएगा।
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