न्यायाधीश ने कहा-गवाहों के बयान बदल सकते हैं लेकिन दस्तावेज कभी झूठ नहीं बोलते
दूसरी शादी का प्रमाणपत्र बना मुख्य सबूत, अच्छे आचरण की शर्त पर एक वर्ष की परिवीक्षा पर किया रिहा
सिरसा। पहली शादी रहते दूसरी करने के मामले में अदालत ने आरोपी महिला को दोषी करार दिया है। इस मामले में पीड़ित पति को सात साल तीन माह की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद न्याय मिला। पीड़ित की शादी वर्ष 2013 में हिसार बस स्टैंड के पास स्थित धर्मशाला संतो देवी में सामूहिक विवाह समारोह के दौरान अन्य जोड़ों के साथ संपन्न हुई थी।
मामले की सुनवाई के दौरान जिला अदालत के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि आरोपी महिला कुलविंदर कौर ने पहली शादी के रहते हुए ही 28 फरवरी 2018 को आनंद कारज की रस्म के अनुसार अमनदीप सिंह के साथ दूसरी शादी कर ली।
फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश गगनदीप गोयल ने कहा कि गवाहों के बयान बदल सकते हैं लेकिन दस्तावेज कभी झूठ नहीं बोलते। अदालत में प्रस्तुत विवाह प्रमाणपत्र और अन्य साक्ष्य यह साबित करने के लिए पर्याप्त हैं कि आरोपी ने पहली शादी खत्म किए बिना दूसरी शादी की। इसलिए अदालत आरोपी कुलविंदर कौर को दोषी करार देते हुए उसे अच्छे आचरण की शर्त पर एक वर्ष की परिवीक्षा पर रिहा करती है।
इसके तहत दोषी को 50 हजार रुपये का बॉन्ड और समान राशि का जमानती पेश करना होगा। साथ ही शर्त रखी गई है कि वह इस अवधि में किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं होगी अन्यथा उसे फिर अदालत में पेश होना पड़ेगा। संवाद
पति को सूत्र से दूसरी शादी का चला था पता
मामले के अनुसार, निशान सिंह निवासी सिरसा की शादी गांव भंभूर निवासी कुलविंदर कौर के साथ हिसार बस स्टैंड के पास स्थित धर्मशाला संतो देवी में 15-16 अन्य जोड़ों के साथ सदा नंद स्वामी सिलीगुड़ी वाले की उपस्थिति में संपन्न हुई थी। शादी के बाद वे कुछ समय तक प्रेम और स्नेह के साथ रहे लेकिन कुछ समय बाद कुलविंदर कौर का व्यवहार और रवैया पूरी तरह से बदल गया। अगस्त 2013 में निशान सिंह अपनी ड्यूटी के सिलसिले में शहर से बाहर था। पीछे से कुलविंदर कौर अपना सामान और कीमती चीजें लेकर अपने घर चली गई। एक मई 2016 को निशान सिंह को किसी से पता चला कि उसकी पत्नी ने बठिंडा निवासी अमनदीप सिंह से शादी कर ली है। यह शादी 28 फरवरी 2018 को गुरुद्वारा डेरा भूमण शाह में संपन्न हुई थी। इसके बाद न्याय के लिए निशान सिंह ने अदालत में इस्तगासा दायर कर दिया।