सिरसा। मानसून का सीजन शुरू हो चुका है। अभी बारिश का आना बाकी है। उसे पहले पहले कच्चे तटबंधों को मजबूत करने में पंचायत स्तर पर ग्रामीण सक्रिय हो गए हैं। एक साल तक सरकार की ओर आस लगाए बैठे किसानों को जब कोई उम्मीद नहीं दिखी तो अपने स्तर पर काम शुरू कर दिया। शुक्रवार को गांव मीरपुर व अन्य गांवों के लोगों ने मिलकर कच्चे तटबंध को मजबूत करने का काम शुरू किया।
यह वही हिस्सा है जो पिछली बार टूट गया था और हजारों एकड़ फसल पानी में डूब गई थी। इसलिए, गांव मीरपुर व अहमदपुर के पास से करीब 10 एकड़ के तटबंध को मजबूत करने का काम किया जा रहा है।
बता दें कि पिछले साल ठेके पर जमीन लेकर सपने संजोने वाले किसानों की आंखों में आंसू देखने को मिले थे। इन्हीं तटबंधों को अब पंचायत ने ग्रामीणों के सहयोग से मजबूत करने का काम शुरू किया है। जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉली की मदद से खेतों से मिट्टी उठाकर तटबंधों पर लगाई जा रही हैं ताकि मानसून में जब घग्गर का बहाव खतरे के निशान से ऊपर बहे तो यह कच्चे तटबंध टूटे नहीं।
मीरपुर के पास आ गई थी 150 से 200 फीट की दरार : पिछले साल घग्गर नदी जब खतरे के निशान से उपर बह रही थी तब मीरपुर के पास कच्चा तटबंध टूट गया था। 150 से 200 फीट की दरार आ गई थी और उसे पाट पाना मुश्किल था। पानी का बहाव इतना तेज था कि कुछ ही घंटों में हजारों एकड़ धान की भूमि जलमग्न हो गई। किसान बस अपनी आंखों के सामने फसलों को डूबते हुए देखते रहे। इस कट के कारण अहमदपुर, केलनियां, झोरड़नाली, मीरपुर आदि गांवों का रकबा प्रभावित हुआ था।
यह गांव होते हैं प्रभावित
मुसाहिब वाला
पनिहारी
फरवाई खुर्द
नेजाडेलाकला
झोपडा
मीरपुर कलोनी
मीरपुर
अहमदपुर+ढाणी सुख-चैन
केलनिया
अलानूर उर्फ नानकपुर
माधोसिघाना
खैरेका
बनसुधार
भावदीन
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गांव वालों से प्रति एकड़ पैसा किया जा रहा है इकट्ठा
गांव के सरंपच व पंच के अनुसार सरकार से अभी तक कोई सहयोग नहीं मिला है। ग्रामीणों से प्रति एकड़ के हिसाब से पैसा लिया जा रहा है और उसी आधार पर तटबंध मजबूत कर रहे हैं। मीरपुर, अहमदपुर सहित आसपास के गांव इस काम में लगे हुए हैं। हमारा प्रयास है कि कच्चे तटबंध को समय रहते मजबूत कर लिया जाए, ताकि घग्गर जब खतरे के निशान से ऊपर हो तो तटबंध टूटने का खतरा न रहे। क्योंकि सरकार कच्चे तटबंधों पर कोई ध्यान नहीं देती है। वह पक्के तटबंधों को मजबूत करने में लगी रहती है। इस बार तो उस ओर भी अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
किसानों का आज तक 2023 का मुआवजा नहीं मिला
गांव अहमपुर के सरपंच संदीप कुमार व पंच आशीष कुमार ने बताया कि गांव अहमदपुर पंचायत, सुखचैन ढाणी और ग्रामीण मिलकर इस बांध को अपने स्तर पर बांधने का काम कर रहे हैं। पिछले साल बांध के टूटने से हजारों एकड़ फसल जलमग्न हो गई थी। इसको लेकर न तो मौजूदा सरकार और ना ही प्रशासन की और से कोई सहायता किसानों को मिली है। सरकार का कहना था कि 2023 में आई बाढ़ के कारण हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाएगा, किसानों को आज तक ना तो 2023 का मुआवजा मिला और न ही बीते वर्ष का जिससे किसानों और पंचायतों में रोष भी है। अब फिर बाढ़ के डर से किसान और पंचायत अपने स्तर पर बांध को बांधने में लगी हुई हैं।