संवाद न्यूज एजेंसी
रानियां। रानियां खंड के किसान जंगली सूअरों से परेशान हैं। घग्गर नदी के साथ बसे गांवों में जंगली सूअर किसानों की गेहूं की फसल बर्बाद कर रहे हैं। कड़ाके की ठंड में किसान खेतों की रखवाली को मजबूर हैं। वहीं, वन्य जीव प्राणी विभाग के अधिकारियों की माने तो घग्गर बेल्ट में गेहूं के सीजन में भोजन की कमी होने पर जंगली सूअर बाहर निकलते हैं। इनको पकड़ पाना संभव नहीं है। इसी कारण सरकार ने जंगली सूअरों से होने वाले नुकसान को लेकर भी मुआवजा पॉलिसी बनाई है।
जंगली सूअरों के कारण खंड के गांव खारियां, मैहना खेड़ा, घोड़ावाली, भून्ना, चक्कां, केहरवाला, मम्मड़ खेड़ा, मतुवाला, सेनपाल व सेनपाल कोठा आदि गांव प्रभावित हैं। ग्रामीणों के अनुसार जंगली सूअर गेहूं, जो, सरसों, आलू व चारे की फसल को खराब कर रहे हैं। जंगली सूअर सेनपाल कोठा में 5 एकड़ गेहूं व चक्कां के दो एकड़ सरसों की फसल खराब कर चुके हैं।
किसान सतपाल, सुभाष, सुरेश कुमार, परविन्द्र सिंह, हरदम सिंह, रामसिंह ने बताया कि पिछले करीब तीन सालों से उनके खेतों में जंगली सूअर फसल खराब कर रहे हैं। प्रतिवर्ष जनवरी के महीने में सूअर रात के समय में झुंड में आते हैं और गड्ढे खोदकर फसल को बर्बाद कर देते हैं। किसानों ने बताया कि उन्हें नहीं पता कि वे सूअर पकड़वाने के लिए किस विभाग के अधिकारियों से बातचीत करें। उन्होंने जिला प्रशासन से सूअरों को पकड़वाने की मांग की है, ताकि फसलों को बचाया जा सके।
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घग्गर में रखते है जंगली सूअर
वन्य जीव प्राणी विभाग के अधिकारी ने बताया कि गर्मी के दौरान जंगली सूअर घग्गर नदी के साथ-साथ जगह बनाकर रहते हैं। सर्दी में घग्गर के आस पास खाने की चीजों की कमी हो जाती है, तब ये बाहर निकलते हैं। इनको पकड़ पाना आसान नहीं होता है। ये फसलों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इन सूअरों की तादाद में इजाफा नहीं नही हुआ है।
किसानों ने बयां किया दर्द
मेरा खेत मैहना खेड़ा के रकबे में पड़ता है। रविवार रात को सूअरों के झुंड ने दो एकड़ मेंं सरसों की फसल में कई जगह गड्ढे कर दिए। करीब एक एकड़ की फसल खराब हो गई। पिछले साल भी गेहूं की फसल को सूअरों ने खराब किया था। सरकार को बर्बाद हुई फसल का मुआवजा या बीमा देना चाहिए। - सतपाल छापौला, किसान चक्कां।
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आठ से दस सूअरों ने गेहूं की एक एकड़ फसल को खोदकर नुकसान पहुंचाया है। ये सूअर धान की फसलों के निकलने के बाद खेतों में दिखाई देने लगते हैं। यह बहुत तेज दौड़ते हैं। जब इनको पकड़ने की कोशिश की जाती है, तो ये हाथ नहीं आते। कोई इनके पास चला जाता है तो ये आक्रामक होकर हमला कर देते हैं। प्रशासन से मांग है कि वे इन सूअरों को पकड़वाए। -परविंद्र सिंह, किसान सेनपाल कोठा।
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पिछले तीन सालों से जंगली सूअरों से परेशान हैं। जंगली सूअर गेहूं, जौ, सरसों व आलू की फसलों में नुकसान कर रहे हैं। ये रात के समय में फसलों का खराब करते हैं और सुबह होते ही कहीं छुप जाते हैं। बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के इन्हें पकड़ना खतरनाक होता है। अपने तेज दांत व सींग से ये व्यक्ति पर हमला करते हैं। -ईश्वर छापौला, किसान घोड़ावाली।
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पिछले साल सरसों की फसल में सूअरों ने नुकसान किया था। इसे बचाने लिए कई दिनों तक रात को खेतों में रखवाली की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। रात के समय में यह दिखाई नहीं देते। - सुरेश कुमार, किसान चक्कां।
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दो सालों में गेहू, सरसों व आलू की फसलों में जंगली सूअरों ने तबाही मचा रखी है। ये ऐसे समय में फसलों में प्रवेश करते हैं, जब न तो दोबारा बिजाई की जा सकती है और न ही कोई अन्य समाधान किया जाता है। कद में छोटे होने के कारण सरसों जैसी फसलों में दिखाई तक नहीं देते। प्रशासन को इस समस्या का समाधान करना चाहिए। खराब हुई फसलों का मुआवजा भी देना चाहिए। - रामसिंह धामू, किसान मम्मड़ खेड़ा।
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जंगली सूअर के कारण फसलों को होने वाले नुकसान को लेकर सरकार मुआवजा देती है। 10 प्रतिशत से ज्यादा होने वाले नुकसान की पटवारी से गणना करवाने के बाद किसान को विभाग में आवेदन करना होता है। इसके लिए विभाग मुआवजे की आगामी प्रक्रिया शुरू करता है। सूअरों को पकड़ना संभव नहीं है। - रामकेश, वाइल्ड लाइफ अधिकारी, सिरसा।