गेहूं खरीद को लेकर सरकारी बंदोबस्त आढ़ती और किसानों को रास नहीं आ रहे हैं। गेहूं खरीद का मंगलवार को दूसरा दिन था और जिले में 186 खरीद केंद्रों पर 101 खरीद केंद्रों पर खरीद हुई। गेहूं खरीद के लिए सिरसा मंडी में करीब 100 किसानों को बुलाया गया था। लेकिन मंगलवार को आढ़तियों ने अपना काम बंद कर दिया। आढ़तियों ने कहा कि सरकार ने जो परफोर्मा जारी किया है उसे आढ़ती को ढाई प्रतिशत आढ़त देने का कहीं भी जिक्र नहीं किया। वहीं सिरसा मंडी के आढ़तियों ने सरकार के आश्वासन के बाद शाम को हड़ताल न करने का फैसला लिया है। इसकी जानकारी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान हरदीप सरकारिया ने दी। हरदीप सरकारिया ने बताया कि खरीद एजेंसियां आई फार्म में किसान का आधार नंबर व खाता नंबर अंकित करने के लिए कह रही थी। लेकिन एसोसिएशन ने इंकार कर दिया।
गेहूं खरीद को लेकर सिरसा अनाज मंडी में सुबह कुछ समय के लिए आढ़तियों ने अपना काम बंद कर दिया। आढ़ती और किसान मैपिंग के कारण परेशान हो रहे हैं। दी आढ़तियन एसोसिएशन के महासचिव कश्मीर कंबोज ने बताया कि लॉकडाउन के चलते सरकार ने किसानों की फसल खरीदने के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया का सहारा लिया है। इस प्रक्रिया में ई-मैपिंग के माध्यम से पंजीकृत किसानों की गेहूं खरीद के लिए मंडी बुलाया जा रहा है, ऐसे में अधिकतर किसानों ने अपनी फसल ही नहीं काटी और कुछ को मैसेज देर रात तक मिलने के कारण वह सुबह मंडी में गेहूं नहीं ला पा रहे हैं। आढ़तियों का कहना है कि किसानों ने फसल काटी है या नहीं, इसका पता नहीं चलता और किसान को गेहूं खरीद का मैसेज चला जाता है। ऐसे में प्रशासन ई-मैपिंग का प्रयोग न कर आढ़तियों द्वारा जारी किसानों की सूची को मैपिंग के आधार पर प्रयोग करें। अगर प्रशासन ऐसा नहीं करता तो मंडी आढ़ती हड़ताल पर होंगे। वहीं आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान हरदीप सरकारिया के साथ हरियाणा मार्केटिंग बोर्ड के सीएमईओ राजकुमार बैनीवाल ने फोन पर बात की। आढ़तियों की मांगे पूरी करने का आश्वासन दिया। आढ़ती अब किसानों की सूची बनाकर मार्केट कमेटी को सौंपेंगे, जिसके अनुसार ही किसानों को फसल बेचने के लिए संदेश भेजा जाएगा।
आढ़ती एसोसिएशन ने करवाया डोर टू डोर सर्वे
जिसके बाद दी आढ़तियन एसोसिएशन के प्रधान हरदीप सरकारिया ने डोर टू डोर सर्वे कर आढ़तियों की राय लेने का विचार बनाया। जिसमें उनसे गेहूं खरीद को लेकर आढ़तियों की हड़ताल रहेगी या नहीं इसका पता चल सके। सर्वे में अगर आढ़ती सरकार द्वारा खरीद नियमों से संतुष्ट है तो खरीद होगी, नहीं तो हड़ताल। हड़ताल में सहयोग देने वाले आढ़तियों की खरीद रजिस्ट्र और लाइसेंस मार्केट कमेटी में जमा होंगे। यह सर्वे देर शाम तक चला।
ई-मैपिंग खरीद का गलत आधार
आढ़तियों का कहना है कि ई-मैंपिंग से मंडी में बहुत कम किसान पहुंच रहे हैं। खरीद का मैसेज उन किसानों को पहुंच रहा है जिन्होंने अपनी फसल काटी नहीं है। मैसेज देर रात को उन्हें मिलता है जिससे सुबह मंडी में फसल नहीं ला पा रहे हैं। किसानों को रकम का भुगतान करने के लिए कई-पेमेंट का विकल्प रखा गया है। आढ़तियों ने किसानों को एडवांस में रकम दे रखी है, ठेके पर काश्त कर रहे किसानों ने आढ़तियों से रकम उठाकर जमीन के ठेके का भुगतान किया है, जिससे आढ़तियों को भी नुकसान होगा।
कॉट्स
गेहूं खरीद के लिए होने वाली मैपिंग के लिए आढ़तियों से किसानों की सूची मांगी गई है। मंडी में गेहूं लेकर आने वाले किसान अब आढ़तियों के सूची अनुसार होंगे।
- विकास सेतिया, मार्के सचिव सिरसा।
सरकार ने एक आन लाइन परफोर्मा भेजा है, लेकिन इस परफोर्मा में आढ़तियों को ढाई प्रतिशत आढ़त देने का कोई जिक्र नहीं किया गया। इसलिए आढ़तियों में संशय है कि सरकार उन्हें आढ़त देगी भी या नहीं?
- हरदीप सरकारिया, आढ़ती एसोसिएशन सिरसा।