सिरसा। गेहूं की सरकारी खरीद में भी मुनाफाखोरों की ओर से लापरवाही बरती जा रही है। पहले मार्केट फीस चोरी से तो अब गेहूं में बिना पंखा लगाए ही बारदाने में गेहूं भरी जा रही है। और यही गेहूं बिना किसी रुकावट के सरकारी एजेंसियों के गोदामों में पहुंच रही है। यह उन किसानों की गेहूं में हो रहा है जो जल्द ट्रॉली खाली कर वापस लौटना चाहता है। बिना पंखा और जल्द खाली करने के लालच में ऐसे किसान 500 ग्राम क्विंटल काट देने के लिए भी तैयार हो जाते हैं।
सरकारी खरीद के प्रावधान के मुताबिक गेहूं की हर ढेरी में पंखा लगाया जाना अनिवार्य है। इस प्रक्रिया के पश्चात ही गेहूं की तुलाई होगी और बाद में बोरियां भरी जा सकती है। लेकिन अनाज मंडी में इन सरकारी प्रावधानों को पूरी तरह दर किनार किया जा रहा। क्योंकि मंडी में गेहूं की बोरियां भरी तो जा रही है परंतु उनमें पंखा नहीं लगाया जा रहा है और बाकायदा बोरियों में भी भरा जा रहा है। इस दौरान कुछ आढ़ती किसानों से बिना पंखा लगाने व गेहूं से भरी ट्रॉली को सीधे ही खाली कराने बात कर लेते हैं। यहां तक के वे आढ़तियों को 500 ग्राम से लेकर एक किलोग्राम तक प्रति क्विंटल गेहूं के पीछे काट देने पर राजी हो जाते हैं। किसान मंडी में ढेरी लगाकर रवाना हो जाता है फिर आढ़ती गेहूं की खरीद कर बिना पंखा के ही बारदानों में भरवा देते हैं।
धर्मकांटे का मान लिया जाता है तोल
गेहूं की ट्राली किसान धर्मकांटे पर तुलवा लेते हैं और इस पर आढ़ती भी अपनी सहमति जता देते हैं। किसानों को सिर्फ मंडी में ढेरी लगाने की आवश्यकता है, बाकी काम आढ़ती ही निभाते हैं। किसान समय की बचत पर खुश हो जाता है तो वहीं आढ़ती को प्रति ट्राली एक हजार से 500 रुपये की बचत के साथ ही खरीद प्रक्रिया में इजाफा कर लेते हैं। हैरानी की बात तो यह है कि सरेआम मंडी में यह खेल हो रहा है लेकिन विभागीय अधिकारियों की नजरों से दूर है। खरीद एजेंसियों के गोदामों में यह गेहूं आसानी से पहुंच रहा है और उन्हें इस बात की भनक तक नहीं लग रही है।
सफाई कर्मचारी व तोल करने वाले नहीं खोलते मुंह
जब इस संबंध में गेहूं का तौल करने वाले व सफाई कर्मचारियों से पूछा जाता है तो वे अपना मुंह खोलने को तैयार नहीं होते। पंखा न लगाने की वजह पूछी जाती है तो सिर्फ एक ही जवाब देते है बाबू से पूछ लो।
कई किसान मिलकर एक ही स्थान पर लगा देते हैं ढेर
अनाज मंडी में एक साथ लगाई गई अनेक ढेरियों के विषय में जब आढ़ती से पूछा गया तो उसने बताया कि कई किसान मिलकर एक ही जगह पर गेहूं की ढेरी लगा देते हैं। तौल होने के बाद वे अपना-अपना हिस्सा बांट लेते हैं। ऐसे किसान धर्मकांटे पर तोल करवा लेते हैं और उसी आधार पर बंटाई करते हैं।
गेहूं की एक ढेरी भी बिना पंखा लगाए नहीं खरीदी जा सकती है। हमारे संज्ञान में ऐसी सूचना नहीं आई है वैसे ही हर जगह पर निरीक्षण किया जा रहा है अगर कहीं गड़बड़ी पाई गई तो उचित कार्रवाई होगी। वहीं खरीद एजेंसियों को भी ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि कोई इस तरह की हरकत न कर सके।
-विरेंद्र मेहता, सचिव मार्केट कमेटी
डेढ़ लाख के करीब पहुंचा गेहूं आवक का आंकड़ा, 6 हजार क्विंटल प्राइवेट खरीद
मंडी में रविवार तक करीब 1 लाख 23 हजार क्विंटल गेहूं की आवक हो चुकी है। वहीं 6 हजार क्विंटल निजी खरीद की गई है, जिनमें मार्केट कमेटी की फीस भरवाई जा चुकी है। हालांकि मंडी में अभी तक उठान को लेकर कोई समस्या उत्पन्न नहीं हुई है।
सिरसा अनाज मंडी में की जा रही गेहूं की सरकारी खरीद।- फोटो : Sirsa