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Sirsa News: हर घर में नल पर बिना जल

Tue, 19 May 2026 12:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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चोपटा। हर घर स्वच्छ जल के नारे पर सवाल खड़ा करती हुए ​ महिला  घड़े से अपने बच्चे के साथ टयूबवेल
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- जलघर के टैंक सूखे, कोई कैंपर तो कोई मटकों से ला रहा पानी
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- पैंतालिसा क्षेत्र में गर्मी में गहराया पेयजल संकट
800 से 1300 रुपये प्रति टैंकर के हिसाब से खरीद कर पी रहे पानी
फोटो -
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संवाद न्यूज एजेंसी
चोपटा। तपिश बढ़ने के साथ ही राजस्थान की सीमा पर बसे गांवों में पेयजल समस्या गहरा जाती है। ऐलनाबाद विधानसभा के पैंतालिसा क्षेत्र में आने वाल इन गांवों की कोई सुध नहीं लेता है। हर साल इसी प्रकार मई और जून में यहां के लोगों को पीने के पानी के लिए तरसना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां घर में नल तो पर बिना जल का।

ग्रामीणों की मानें तो मौजूदा समय में हालात बेहद खराब हो चुके हैं। जलघर के टैंकों में पानी खत्म हो चुका है। वे सूख गए हैं। नहरों में पानी एक माह से नहीं आया है। हर साल जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अपने कार्यालयों में बैठकर पैंतालिसा क्षेत्र को लेकर बड़े बड़े प्रोजेक्ट बनाने का दावा करते हैं। धरातल पर सब शून्य हो जाता है। बचता है तो महिलाओं के सिर पर पानी का घड़ा और राजस्थान के गांवों से पानी की उम्मीद।
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जलघर सूखे तो टयूबवेल के खारे पानी से चला रहे काम
गांवों में पेयजल आपूर्ति का साधन नहीं है। टैंकर 800 से 1300 रुपये का मिल रहा है। गरीब व मजदूरी करने वाला व्यक्ति अपने घर का खर्च चलाए या पानी खरीदे। इसलिए गांव के लोग टयूबवेलों के खारे पानी को पीने के लिए मजबूर हैं। पशुओं को भी यही पानी पिलाना पड़ रहा है। तालाब सूखने के कारण उनके पास कोई विकल्प नहीं है।

इन गांवों में बदतर हालात
पैंतालिसा क्षेत्र के जोडकियां, खेडी, कुम्हारिया, कागदाना, हंजीरा, राजपुरा साहनी, जोडकिया, रामपुर बगड़िया, जमाल, कुतियाना, बरासरी, रूपावास, रायपुर, ढूकड़ा सहित आसपास के गांवों में जलघरों की डिग्गियां खाली पड़ी हैं। लू के मौसम में लोग घरों से बाहर नहीं निकलते हैं क्योंकि धूप में ज्यादा जाने पर प्यास लगेगी और पीने का पानी सीमित है। ऐसे में लोग सुबह व शाम के समय ही घरों से बाहर निकल रहे हैं।
ग्रामीण जगदीश, महेंद्र सिंह, राजकुमार, महावीर, विमला देवी, सुनीता, संतोष ने बताया कि भयंकर गर्मी में पीने के पानी की कमी एक गंभीर समस्या बनी हुई है। खेतों में काम करके लौटकर आने के बाद घरों में पानी नहीं मिलता है। ऐसे में बाहर से टैंकर मंगवाना पड़ता है। उसमें भी ट्यूबवेल का खारा पानी मिल रहा है। इससे कई प्रकार की शारीरिक दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने बताया कि 800 से 1300 प्रति टैंकर के हिसाब से पानी मंगवाना पड़ रहा है।
ऐलनाबाद के विधायक भरत सिंह बैनीवाल ने पिछले साल पानी की समस्या का मुद्दा विधानसभा सत्र में भी उठाया था लेकिन विपक्ष का विधायक होने के कारण कोई सुनवाई नहीं हुई।
कोट्स
पीने के पानी के बुरे हालात हैं। जलघरों के टैंक खाली चुके हैं। नलों से पानी की एक बूंद नहीं आती है। बड़े किसी तरह से अपना गुजारा कर सकते हैं लेकिन छोटे बच्चों को ज्यादा परेशान होना पड़ता है। खारा पानी बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालता है। सरकार की ओर से कोई सुध नहीं ली जा रही है। विभाग के अधिकारी सालों से आश्वासन ही दे रहे हैं। लू के मौसम में जीना मुश्किल हो जाता है। रुपये देकर पानी मंगवाना पड़ता है।
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-पंकज सिहाग, गांव ढूकड़ा
कोट्स
महिलाएं घर का काम करें या पानी लेकर आएं। मजबूरन हमें पानी लाना पड़ रहा है ताकि परिवार का काम चल सके। टयूबवेल का पानी मिलता है तो वही लेकर आते हैं। मोल पानी खरीदना महंगा पड़ता है। गांव में पानी के बेहद खराब हालात हैं। स्वच्छ जल का वादा करने वाली सरकार जल मुहैया नहीं करवा पा रही है। इससे बेहतर तो राजस्थान के लोग हैं। उन्हें पीने का पानी तो मिल रहा है। -कृष्ण कुमार, गांव ढूकड़ा
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