सुनील बैनीवाल
सिरसा। मतदान केंद्रों पर सुबह सात बजे मतदाताओं ने पहुंचना शुरू कर दिया था। मतदान के दौरान बुजुर्ग से लेकर युवा तक जोश में दिखे। शहरों के मुकाबले गांवों में ज्यादा जोश नजर आया। ग्रामीणों ने आपसी भाईचारा भी बनाए रखा। आलम यह था कि मोघे की मांग के लिए जिस गांव के ग्रामीण भाजपा का विरोध कर रहे थे, उस गांव में भी भाजपा, कांग्रेस, इनेलो और जजपा सहित कई दलों के एजेंट बूथों पर मुस्तैद रहे।
चुनाव आयोग ने 85 वर्ष से अधिक उम्र के मतदाताओं को घर बैठे मतदान करने की सुविधा दी थी। इसके बावजूद कई बूथों पर 75 से 85 वर्ष तक के बुजुर्ग मतदान के लिए जूझते रहे। ऐसे में बुजुर्गों ने चुनाव आयोग से आगामी विधानसभा चुनाव में 75 वर्ष से अधिक आयु के सभी बुजुर्गों का मतदान घर से करवाने की मांग की।
गांव शाहपुर बेगू
गांव शाहपुर बेगू के सरकारी स्कूल में सात बूथ बनाए गए थे। इनमें से हर बूथ पर करीब 12 मतदाता मौजूद मिले। सुबह 11:30 बजे की धूप में भी महिलाएं मतदान के लिए आती रहीं। दोपहर 12 बजे तक मतदान केंद्र में करीब 200 मतदाता मौजूद थे। हालांकि गर्मी से बचने के लिए लोग सिर पर तौलिया, चुन्नी और साफा लेकर आए। परिजनों के साथ आए बच्चों ने बूथों के आसपास स्कूल में बने पार्कों और झूलों पर मस्ती की।
इस बार बूथवार जारी की गई मतदाता सूची में कई प्रकार की खामियां मिलीं। इस सूची में अपना वोट खोजने में लोगों को 20 से 25 मिनट तक लग रहे थे। कई लोगों के नाम ही नहीं मिल रहे थे। ऐसा हाल सभी बूथों पर रहा। कई पोलिंग बूथों पर डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी अधिक हैं। सभी सादगी के साथ वोट देते रहे। डेरे के संदेश पर सभी चुप रहे। हालांकि बाहर बने कांग्रेस और भाजपा के बूथों पर भीड़ जरूर रही। लोगों के अनुसार कांग्रेस और भाजपा के बीच ही मुकाबला होगा।
गांव नेजियाखेड़ा
सरकारी स्कूल में पोलिंग बूथ बनाए गए थे। गांव में कुल 1,700 वोट थे। दोपहर 12:47 बजे तक करीब एक हजार ग्रामीणों ने वोट डाले। उसके बाद मतदान की गति धीमी हो गई, क्योंकि तेज धूप में लोग घरों से कम निकले। कई राजनीतिक दलों के बैनर लगाकर बैठे कार्यकर्ता भी एक टेंट के नीचे बैठे नजर आए। कांग्रेसी नेता राममूर्ति, भाजपा कार्यकर्ता नेतराम, इनेलो के जयपाल सहित कई ग्रामीण साथ में बैठकर बतिया रहे थे। उन्होंने कहा कि चुनाव में हमारे लिए कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है। गांव में कांग्रेस का वोट बैंक ज्यादा है। भाजपा को भी काफी वोट मिले लेकिन इनेलो और जजपा का वोट बैंक घट गया। ऐसे में कांग्रेस और भाजपा में ही सीधा मुकाबला है।
गांव अहमदपुर
सरकारी स्कूल में दो बूथ बनाए गए थे। इनमें करीब 1,500 मतदाता पंजीकृत थे। सुबह 8:30 बजे तक 250 वोट पड़ गए जबकि दोपहर 3:30 बजे तक 850 लोगों ने ही वोट डाले। ऐसे में शाम के समय मतदाताओं में वोट डालने के लिए जोश दिखा। दोपहर एक से दो बजे के बीच मुश्किल से 20 से 30 लोगों ने मतदान किया। वहां कांग्रेस और भाजपा के साथ इनेलो को भी अच्छा वोट मिला।
गांव मीरपुर कॉलोनी
सरकारी स्कूल में एक बूथ बनाया गया था। इस बूथ पर एक हजार मतदाता पंजीकृत हैं। इस बूथ पर दोपहर एक बजे तक 40% और दोपहर तीन बजे तक 50% मतदान हो चुका था। वहां भी कांग्रेस और भाजपा के बीच ही मुकाबला दिखा।
गांव बाजेंका
गांव बाजेंका में करीब 6,000 मतदाता पंजीकृत हैं। गांव के दो स्कूलों में बूथ बनाए गए थे। दोपहर 12:30 बजे तक भीड़ रही। दोपहर दो बजे तक चुनिंदा मतदाता ही नजर आए। दोपहर 1:35 बजे मतदान केंद्र में करीब 30 मतदाता थे। एक बूथ खाली था। भाजपा और कांग्रेस के बूथ पर बैठे कार्यकर्ताओं ने बताया कि 3:30 बजे के बाद दोबारा मतदान तेज हुआ। प्राइमरी स्कूल में कुल 1,329 वोट थे। इनमें से 1:30 बजे तक करीब 620 वोट पड़े थे। दूसरे मतदान केंद्र में भी 40% मतदान हुआ था।
गांव कंगनपुर
गांव कंगनपुर के सरकारी स्कूल में दो बूथ बनाए गए थे। इनमें कुल 2,850 वोट थे। दोपहर 2:10 बजे तक 45% ही मतदान हुआ था। ऐसे में गर्मी के समय में दस से 15 लोग ही मतदान करते नजर आए। लोगों ने चुनावों को लेकर चुप्पी साधे रखी। कई कर्मचारी बरामदों और पेड़ों की छांव में बैठकर ड्यूटी करते नजर आए।