कालांवाली।
शहर कालांवाली के गैर सरकारी अस्पतालों से निकलने वाले कचरे के निस्तारण के लिए मुकम्मल व्यवस्था न कर एनजीटी के आदेश का सरेआम उल्लंघन किया जा रहा है। हालात ये है कि शहर के अस्पतालों में मरीजों को इंजेक्शन लगाने के बाद सिरिंज को भी खुले में फेंक दिया जाता है। अस्पतालों से बॉयो वेस्ट का निस्तारण भी नियमित रूप से नहीं होता। बॉयो वेस्ट सड़क किनारे कूड़ों में फेंक दिया जाता है।
इससे लोगों में संक्रमण फैलने की आशंका हमेशा बनी रहती है। इसके बावजूद बायोमेडिकल वेस्ट डिस्पोजल को लेकर संबंधित विभाग के अधिकारी गंभीर नहीं हैं। बता दें कि शहर के अस्पतालों से प्रतिदिन कई किलोग्राम बायोमेडिकल वेस्ट निकलता है। एनजीटी के नियमों का उल्लंघन करने वाले दोषियों के खिलाफ पांच साल की सजा व एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
कागजों में ही होता है बायोमेडिकल वेस्ट का निस्तारण
गौरतलब है कि जिले में बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए एजेंसी कार्यरत है। यह एजेंसी निर्धारित दरों पर बायो मेडिकल कचरा उठाती है और इस कचरे को निर्धारित स्थान पर ले जाकर उसका निपटान करती है, लेकिन नर्सिंग होम और अस्पताल संचालक कागजों में ही बायोमेडिकल वेस्ट का निस्तारण कर दे रहे हैं। जिस कंपनी को वह बायोमेडिकल वेस्ट देने का दावा करते हैं, वास्तव में उस कंपनी की गाड़ी का पता ही नहीं कि शहर में आती भी है या नहीं। नियम है कि 24 घंटे के अंदर बॉयोवेस्ट का निस्तारण कर दिया जाए लेकिन यहां खुले में बायोवेस्ट फेंका जा रहा है।
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अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए यह है अनिवार्य
अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए अलग-अलग रंग के कूड़ेदान लगाना अनिवार्य होता है। इसमें संक्रामक मेडिकल वेस्ट के लिए ओरेंज रंग का कूड़ेदान, गैर संक्रामक बायोमेडिकल वेस्ट के लिए काले व पीले रंग का कूड़ेदान, दवाइयों के पत्ते के लिए नीले रंग का कूड़ेदान, जहरीले बायोमेडिकल वेस्ट के लिए पर्पल रंग का कूड़ेदान लगाना होता है। इन कूड़ेदानों में एकत्रित बायोमेडिकल वेस्ट को चीफ मेडिकल अधिकारी के द्वारा अनुबंध की गई एजेंसी को सौंपना होता है।
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गत मई में 50 अस्पतालों को नोटिस थमाकर दी थी चेतावनी
नगरपालिका कालांवाली ने अस्पतालों से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट के उचित निस्तारण करने को लेकर इसी साल मई माह में शहर के करीब 50 अस्पतालों को नोटिस थमाये गए थे। नपा ने नोटिस जारी करके उन्हें बायोमेडिकल वेस्ट का उचित निस्तारण करने के लिए कहा गया था। बावजूद इसके अस्पताल संचालक कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है।
यह भी है नियम
अस्पतालों, लैबोरेट्री, ब्लड बैंक, पशु अस्पताल, आयुष अस्पताल, फार्मेसी तथा स्लाटर हाउस संचालकों को बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए अपना पंजीकरण सरल हरियाणा पोर्टल पर करवाते हुए ऑथोराइजेशन लेना होता है। इसके पश्चात संस्थान को वेस्ट मैनेजमेंट के संदर्भ में कॉन्ट्रेक्ट नोट को निर्धारित वेबसाईट पर अपलोड करना होता है। इसके साथ ही संस्थान में बायो कचरे को लेकर रखी गई, विभिन्न रंगों के डिब्बों के फोटो, संस्थान में बिस्तरों की संख्या तथा जीपीएस आदि की जानकारी भी अपलोड करनी होती है। संस्थान संचालक को अपने यहां एक रिकॉर्ड रजिस्टर भी रखना होता है, जिसमें बायो कचरा निपटान संबंधित जानकारियां दर्ज होती है। संस्थान के संचालकों को बायो कचरा निपटान के संबंध में वार्षिक रिपोर्ट भी संबंधित वेबसाइट पर डालनी होती है।
यदि ऐसा हो रहा है तो करेंगे सख्त कार्रवाई: सचिव
नगरपालिका प्रशासन ने पहले भी अस्पतालों की बैठक करके व नोटिस देकर बायोमेडिकल वेस्ट को खुले में ना फैंकने को लेकर सख्त दिशा-निर्देश दिए थे। फिर भी यदि कोई ऐसा कर रहा है तो उन अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- गिरधारी लाल, सचिव, नगरपालिका कालांवाली ।