सिरसा में चौटाला माइनर के पास धरने पर बैठे सात गांवों के किसान।
सिरसा। गांव चौटाला की टेल तक पानी पहुंचाने के विवाद में दूसरे गांवों के मोगों को छोटा करने के बाद विवाद बढ़ता जा रहा है। हालांकि सोमवार को गांव चौटाला, लंबी और गिदड़खेडा के ग्रामीण भी प्रदर्शन करने वाले चार गांवों के किसानों के समर्थन में उतर आए। सभी ने स्वर में कहा कि पानी को लेकर पुराना सिस्टम लागू किया जाए। किसी गांव के मोगों को छोटा करना और टेल तक पानी पहुंचा नियमानुसार गलत है। इसलिए प्रशासनिक अधिकारी पानी की क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम करें या जलघरों को लेकर अलग से व्यवस्था करें। किसानों को उनकी भूमि की सिंचाई के लिए पूरा पानी मिलना चाहिए।
बता दें कि रविवार को गांव जंडवाला बिश्नोईयान, आसाखेड़ा, सुकेराखेडा, भारुखेडा के ग्रामीणों ने चोटाला माइनर पर धरना शुरू कर दिया था। इस संबंध में जानकारी देते हुए जंडवाला बिश्नोईयान के सरपंच मिठूराम, आसाखेड़ा के सरपंच भादर, भाजपा नेता गगनदीप सहित अन्य किसानोंं ने बताया कि चौटाला डिस्ट्रीब्यूटरी से आसाखेडा, जंडवाला बिश्नोईयान, भारुखेडा और सुखेरा खेडा के अतिरिक्त आसपास के कई गांवों को सिंचाई के लिए पानी मिलता है। कई सालों से माइनर से बने मोगों से किसान पानी से अपनी भूमि की सिंचाई कर रहे हैं। विभाग अपने स्तर पर ही इनको कम ज्यादा करता आया है, लेकिन पहले वह किसानों को नोटिस देता था और बातचीत करता था। इस बार बिना किसानों को नोटिस दिए रातों रात चोरी छिपे गांव के मोगों का साइज कम कर दिया।
इस संबंध में जब किसानों ने अधिकारियों से बातचीत की तो उन्होंने पुरानी मशीनों के खराब होने व टेल तक पानी पहुंचाने का दबाव होने की बात उन्होंने कहीं। अधिकारियों के दबाव की बात कहने पर बीते दिन गुस्साए किसानों ने माइनर पर बने मोगों को स्वयं ही दीवार बनाकर बंद कर दिया था। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि उन्हें पानी नहीं चाहिए। आप पहले टेल तक पानी ले जाए। वहीं, किसानों ने कहा कि जब तक उनके मोगों का साइज पुराना नहीं दिया जाता। वे अपना संघर्ष जारी रखेंगे।