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Sirsa News: घग्गर नदी में जहर घोलते पानी पर भड़के ग्रामीण, एसडीएम कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे

Tue, 13 Oct 2026 10:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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एसडीएम को ज्ञापन सौंपते किसान। 
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ऐलनाबाद। घग्गर नदी में दूषित पानी छोड़ने के विरोध में मंगलवार को दर्जनभर गांवों के ग्रामीणों और किसानों का आक्रोश फूट पड़ा। ग्रामीणों ने एसडीएम कार्यालय के बाहर धरना देकर प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया।
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उन्होंने उपमंडल अधिकारी अदिति सिंघानिया को ज्ञापन सौंपकर नदी में गंदा और कथित केमिकलयुक्त पानी छोड़ने पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। साथ ही सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से पानी का शत-प्रतिशत ट्रीटमेंट सुनिश्चित करने और समस्या का स्थायी समाधान करने की अपील की।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा। आरोप है कि लंबे समय से सीवरेज का पानी बिना समुचित ट्रीटमेंट के घग्गर नदी में छोड़ा जा रहा है। इससे आसपास के गांवों में प्रदूषण बढ़ रहा है। नदी से उठने वाली दुर्गंध भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है।
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ग्रामीणों ने कैंसर, पीलिया, काला पीलिया और सांस संबंधी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ने की आशंका जताई। उन्होंने प्रशासन से मामले की गंभीरता से जांच करवाने और जनस्वास्थ्य व पर्यावरण की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
खेती और पशुधन पर नुकसान की आशंका
किसान नेता प्रकाश ममेरा, सुरेंद्र सिद्धू, गोपी गिल, गुरविंद्र सिंह भट्टी, कामरेड सुरजीत सिंह और गुरलाल सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि नदी के आसपास खेतों में सिंचाई करने वाले किसानों को परेशानी हो रही है। उनका आरोप है कि दूषित पानी से फसलों को नुकसान पहुंचने और उपजाऊ भूमि की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा है।

ग्रामीणों ने दावा किया कि प्रदूषित पानी पीने से पशु भी बीमार हो रहे हैं। इससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि रात के अंधेरे में सीवरेज का पानी नदी में छोड़ा जाता है। संबंधित स्थान पर दुर्गंध इतनी अधिक रहती है कि सांस लेने में भी परेशानी होती है। ग्रामीणों ने वायु गुणवत्ता जांच से संबंधित विवरण भी ज्ञापन के साथ संलग्न करने की बात कही।
तीन प्रमुख मांगें रखीं
ग्रामीणों ने नदी में गंदा और कथित केमिकलयुक्त पानी छोड़ने पर तत्काल रोक लगाने, एसटीपी को सुचारु रूप से चलाकर पानी का शत-प्रतिशत ट्रीटमेंट करने और समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर भी जोर दिया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि कार्रवाई नहीं होने पर किसान संगठन एकजुट होकर प्रदर्शन करेंगे। जरूरत पड़ी तो वे दूषित पानी नदी में छोड़ने का रास्ता अपने स्तर पर बंद करने के लिए मजबूर होंगे।
किसानों की मौजूदगी में फिर लिए जाएंगे सैंपल
एसडीएम अदिति सिंघानिया ने बताया कि पहले भी घग्गर नदी में छोड़े जा रहे सीवरेज के पानी के सैंपल लिए गए थे। हालांकि किसान सैंपल लेने की प्रक्रिया से संतुष्ट नहीं थे। इसलिए अब किसानों की टीम और एसडीएम कार्यालय के कर्मचारी की मौजूदगी में दोबारा सैंपल लिए जाएंगे। रिपोर्ट आने के बाद उसके आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।
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