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Sirsa News: कड़ी मेहनत, संघर्ष और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर विक्रम सेना में चयनित

Tue, 13 Jan 2026 11:26 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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विक्रम सिंह।
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सिरसा। गांव खैरेकां निवासी विक्रम सिंह ने कड़ी मेहनत, संघर्ष और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर भारतीय सेना में चयनित होकर गांव और जिले का नाम रोशन किया है। विक्रम का चयन स्पोर्ट्स कोटे के तहत हुआ है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से ताल्लुक रखने वाले विक्रम की यह सफलता युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है।
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विक्रम सिंह के माता-पिता मजदूरी का काम करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण विक्रम के लिए खेल के संसाधन जुटाना आसान नहीं था। कई बार तो हालात ऐसे रहे कि वह खेल ग्राउंड तक भी नहीं आ पाता था। इसके बावजूद विक्रम ने हार नहीं मानी। वह सुबह अपने पिता के साथ मजदूरी पर जाता था और शाम को समय निकालकर खेल अभ्यास करता था। मेहनत और लगन ही उसका सबसे बड़ा सहारा बनी। विक्रम हैंडबॉल का खिलाड़ी है। उसकी प्रतिभा को देखते हुए कोच और सीनियर खिलाड़ियों ने उसका पूरा सहयोग किया। जब आर्थिक मजबूरी के चलते वह कई बार खेल मैदान छोड़ने को मजबूर हुआ, तब कोच और सीनियर खिलाड़ी उसके घर जाकर उसे अभ्यास के लिए बुलाकर लाते थे। उनका मानना था कि विक्रम एक अच्छा खिलाड़ी है और उसे खेल जारी रखना चाहिए। कोच ने तो कई बार घर से ही बुलवाकर अभ्यास भी करवाया, ताकि उसकी तैयारी में कोई कमी न रहे।

तीन से चार बार पहले भी दे चुका परीक्षा

18 वर्ष की उम्र में विक्रम खैरेकां के खेल मैदान में नियमित अभ्यास करने लगा। इस दौरान उसने कई उतार-चढ़ाव देखे। वह तीन-चार बार भारतीय सेना की भर्ती परीक्षा भी पास कर चुका था, लेकिन अंतिम चयन में हर बार कुछ अंकों या कारणों से पीछे रह जाता था। लगातार असफलताओं के बावजूद उसने हिम्मत नहीं हारी और मेहनत जारी रखी। आखिरकार अपने अंतिम मौके में विक्रम ने सफलता हासिल कर ली और भारतीय सेना में उसका चयन हो गया। यह चयन स्पोर्ट्स कोटे के तहत हुआ है, जिसमें उसकी खेल उपलब्धियों ने अहम भूमिका निभाई।
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राज्य स्तर पर 6 मेडल

विक्रम के पास 2025 में उत्तर प्रदेश में आयोजित जूनियर नेशनल हैंडबॉल प्रतियोगिता में जीता गया गोल्ड मेडल है। इसके अलावा उसने राज्य स्तर पर एक सिल्वर और दो ब्रॉन्ज मेडल हासिल किए हैं। कुल मिलाकर राज्य स्तर पर उसके नाम छह मेडल हैं, जिनमें सिल्वर और ब्रॉन्ज शामिल हैं। विक्रम की इस उपलब्धि पर गांव खैरेकां में खुशी का माहौल है। परिवार, कोच, साथी खिलाड़ी और ग्रामीणों ने उसे बधाई दी है। विक्रम ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, कोच और सीनियर खिलाड़ियों को दिया है। उसने कहा कि अगर सही मार्गदर्शन और मेहनत हो तो कोई भी परिस्थिति सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती।

विक्रम शुरू से ही मेहनती और अनुशासित खिलाड़ी रहा है। आर्थिक परेशानियों के बावजूद उसके अंदर कुछ कर दिखाने का जज्बा था। कोच के अनुसार कई बार विक्रम आर्थिक मजबूरी के कारण अभ्यास के लिए मैदान पर नहीं आ पाता था, लेकिन उसकी लगन को देखते हुए वह खुद विक्रम के घर जाकर उसे अभ्यास के लिए बुलाकर लाते थे। आज उसी के मेहनत का नतीजा है कि उसका चयन सेना में हुआ है। - नवजोत रंधाव, कोच हैंडबॉल, खैरेकां।
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