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Sirsa News: वैदवाला के किसान चार दिन से टंकी पर बैठे, नहीं हुआ समाधान

Sun, 16 Aug 2026 11:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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सिरसा गांव वेदवाला में धरने पर बैठे किसान। संवाद
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बिजली टावरों के मुआवजे के लिए
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फोटो -64
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। वैदवाला गांव में बिजली टावरों के मुआवजा विवाद में चार दिनों से खेत मालिक भूपेंद्र सिंह वैदवाला और दिव्यांग किसान वेद प्रकाश जलघर की पानी की टंकी पर बैठे हुए हैं। इन चार दिनों में कांग्रेस के नेताओं को समर्थन देने का दौर जारी है।
विधायक शीशपाल केहरवाला और सांसद कुमारी सैलजा धरने पर पहुंच चुकी है। वहीं, रानिया विधानसभा से चुनाव लड़ चुके कांग्रेसी नेता सर्वमित्र कंबोज भी रविवार को धरनारत किसानों से मिलने के लिए पहुंचे। किसानों के साथ बातचीत करने के लिए धरने पर कई अधिकारी पहुंच चुके हैं मगर कोई स्थायी समाधान नहीं हो रहा है।
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इतना ही नहीं, एडीसी से बातचीत का भी कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। सोमवार को प्रशासनिक तौर पर किसानों के धरने को लेकर क्या रुख रहता है। यह देखने वाला है। हालांकि, जबरदस्ती टंकी से नीचे उतारने के लिए अधिकारियों को पहले ही किसान चेतावनी दे चुके है कि वे टंकी से नीचे कूद जाएंगे।

समझौते के बावजूद लाइन बिछाने का आरोप

किसान भूपेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि मुआवजे को लेकर पहले प्रशासन के साथ किसानों की बैठक हुई थी। बैठक में जमीन के मुआवजे का दोबारा मूल्यांकन करवाने और तब तक बिजली लाइन बिछाने का काम रोकने पर सहमति बनी थी। किसानों का कहना है कि उन्होंने प्रशासन के आश्वासन पर खेत खाली रखे। बाद में पुलिस की मौजूदगी में बिजली लाइन बिछाने का काम कर दिया गया। किसानों ने सवाल उठाया कि जब मुआवजे का विवाद अभी सुलझा नहीं था तो खेतों में बिजली लाइन बिछाने की जल्दबाजी क्यों की गई। किसानों ने मांग की कि बिछाई गई लाइन हटाई जाए और जमीन का दोबारा मूल्यांकन करवाकर उचित मुआवजा निर्धारित किया जाए।
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दूसरे गांवों से कम मुआवजा मिलने का आरोप

भूपेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि हांडीखेड़ा, कासनखेड़ा और फरवाई गांवों में किसानों को कलेक्टर रेट के पांच गुना तक मुआवजा दिया गया है जबकि वैदवाला के किसानों को अपेक्षित मुआवजा नहीं मिल रहा। किसानों के अनुसार, गांव में जमीन का कलेक्टर रेट करीब 90 लाख रुपये तक है जबकि सड़क के आसपास जमीन की बाजार कीमत करीब एक करोड़ से 1.10 करोड़ रुपये तक बताई जा रही है। किसानों का दावा है कि कुछ जमीन की बिक्री चार से पांच करोड़ रुपये तक की दर पर हुई है। किसानों की मांग है कि जमीन का दोबारा मूल्यांकन करवाकर वास्तविक बाजार मूल्य के आधार पर चार से पांच गुना तक मुआवजा निर्धारित किया जाए।
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