संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। पुलिस लाइन सिरसा के प्रशासनिक भवन में वीरवार को सभी थाना प्रभारियों,मुंशी व कंप्यूटर ऑपरेटर को प्रोजेक्टर के माध्यम से ई-चालन व ई-साक्ष्य एप के बारे में प्रशिक्षण दिया गया। पुलिस अधीक्षक विक्रांत भूषण ने कहा कि सभी थाना प्रभारी, जांच अधिकारी, मुंशी व कंप्यूटर ऑपरेटर आधुनिक तकनीक से अपने आप को पूरी तरह से परिचित रखें।
उन्होंने सभी जांच अधिकारियों व कंप्यूटर ऑपरेटरों से कहा कि किसी भी अभियोग का चालान अदालत में पेश करने से पहले सभी प्रकार के फार्म ई-चालान एप के माध्यम से पूरी तरह से भरना सुनिश्चित करें, ताकि अनुसंधानकर्ता को अदालत में चालान पेश करते समय किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि सीसीटीएनएस मॉड्यूल में सभी प्रकार के फॉर्म ऑनलाइन भरना सुनिश्चित करें ताकि अभियोगों का चालान अदालत में पेश करते समय किसी भी प्रकार की परेशानी न आएं। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि यह तकनीक पुलिस विभाग के लिए कारगर सिद्ध होगी और पुलिस विभाग के कार्यों में और अधिक पारदर्शिता आएगी। उन्होंने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश देते हुए कहा कि लंबित मामलों को शीघ्र निपटाएं तथा जिन मामलों में आरोपियों की गिरफ्तारी बकाया है उन्हें महत्वपूर्ण सुराग जुटाकर शीघ्र गिरफ्तार करें।
वीडियो बनाकर ई साक्ष्य एप में डाउनलोड करें
पुलिस अधीक्षक विक्रांत भूषण ने सभी अनुसंधानकर्ताओं व पुलिस अधिकारियों से कहा कि देश भर में लागू किए गए तीन नए कानूनों के तहत नए नियम बनाए गए हैं, जिसके तहत घटनास्थल का टाइम, वीडियोग्राफी बनाकर ई-साक्ष्य मोबाइल एप पर डाउनलोड करना सुनिश्चित करें, ताकि न्यायालय में चालान पेश करते समय जांच अधिकारी को किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। पुलिस अधीक्षक विक्रांत भूषण ने कहा कि तीन नए कानून के मद्देनजर अब न्यायालय में केस की सुनवाई के दौरान ई-साक्ष्य एप से की गई वीडियोग्राफी ही न्यायालय में प्रस्तुत करनी होगी। पुलिस अधीक्षक विक्रांत भूषण ने कहा कि ई-साक्ष्य एप पर वीडियो ग्राफी सबमिट करने के बाद यह स्थायी रिकॉर्ड के रूप में काम करेगा। यदि न्यायालय चाहे तो किसी भी वक्त अपने आप इस एप के जरिए रिकॉर्ड को चेक कर सकता है।
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ई मेल से भेज सकते हैं वारंट और समन
पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को ई-समनिंग के महत्व बारे बताते हुए कहा कि डिजिटल संचार के माध्यम से नए नियमों के तहत समन और वारंट अब ईमेल ,व्हाट्सएप या अन्य डिजिटल संचार माध्यमों से भेजे जा सकते हैं। दरअसल इससे पहले वारंट या सम्मन तामील करवाने की प्रक्रिया काफी लंबी थी, लेकिन अब यह प्रक्रिया सरल हो जाएगी और वारंट या समन की तामील नहीं होने की शिकायत में भी कमी आएगी व इसका बड़ा असर अदालत के फैसलों पर भी पड़ेगा।