चोपटा (सिरसा)। राजस्थान की सीमा से सटे चोपटा क्षेत्र के लोगों का मुख्य व्यवसाय खेती और पशुपालन ही है। खेती और किसानी से जुड़े लोग पशुपालन व्यवसाय को भी बढ़ावा देने में लगे हुए हैं। कई किसान खेती और दूध का व्यवसाय करके लाखों रुपये की अतिरिक्त कमाई कर अपने घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखे हुए हैं।
गांव जमाल के रोहतास और उनकी पत्नी सरस्वती दोनों गाय का पालन कर दूध और घी बेचने का व्यवसाय कर सालाना करीब 5 लाख रुपये की अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं। वर्तमान में उनके पास 100 गोवंश है। जिसमें से 30 गाय दूध देती हैं। इस कार्य में रोहतास के भाई प्रिंसिपल भरत सिंह और उसकी पत्नी निर्मला भी गायों की सेवा और देखभाल करने में सहायता करते हैं। सहारण परिवार के सभी सदस्य गायों की सेवा करने के साथ-साथ दूध और घी से कमाई करने के लिए अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं। सबसे अलग बात यह है कि गायों के लिए हरा चारा ऑर्गेनिक ही उगाया जाता है। जिसमें रासायनिक खादों का बिल्कुल भी प्रयोग नहीं करते। इसके अलावा घर में जरूरत के लिए मौसमी सब्जियां ऑर्गेनिक तरीके से उगाकर प्रयोग की जाती है।
स्वास्थ्य को सही रखने के लिए गायों को पालना शुरू किया और फिर धीरे-धीरे गायों की संख्या बढ़ाकर व्यवसाय बना लिया
रोहतास और सरस्वती ने बताया कि देसी खानपान को अपनाने के लिए साल 2014 में उन्होंने गायों को पालना शुरू किया। इस कार्य में उनके भाई भरत सिंह और उनकी पत्नी निर्मला के सहयोग से सबसे पहले 10 गाय साहिवाल और राठी नस्ल लाकर दूध और घी का प्रयोग करना शुरू किया। दूध और घी ज्यादा होने पर उन्होंने डेयरी में बेचना शुरू किया तथा धीरे-धीरे गायों की संख्या बढ़ा ली। करीब 7 साल बाद अब उनके पास 100 साहिवाल और राठी नस्ल की गाय हैं। जिनके दूध और घी बेचने से उन्हें करीब 5 लाख रुपये से अधिक की आय सालाना हो जाती है। हर समय 20 से 30 गायें दूध देती रहती हैं। इस कार्य को शुरू करने का उनका मकसद लोगों का स्वास्थ्य बेहतर रखना और गो सेवा ही था। लेकिन धीरे-धीरे आर्थिक लाभ मिलने से घर के सभी सदस्यों की इस व्यवसाय में रुचि बढ़ गई।
हरे चारे और मौसमी सब्जियों में नहीं करते रासायनिक खाद का प्रयोग
स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए गायों के लिए हरे चारे को ऑर्गेनिक खाद से ही उगाना शुरू किया है। जिसमें कभी भी रसायनिक खादों का प्रयोग नहीं करते। इससे दूध भी बढ़िया होता है और गायों को कोई बीमारी नहीं होती। इसके साथ ही मौसमी सब्जियां लहसुन, प्याज, गोभी, आलू, मटर इत्यादि ऑर्गेनिक रूप से तैयार करते हैं तथा कभी भी बाजार से खरीद कर नहीं लाते। अपने खेतों में गेहूं, सरसों, कपास, नरमा की फसलों में भी गोबर की खाद का ही प्रयोग करते है। घी-दूध के साथ-साथ गोबर की खाद भी बेची जाती है जिससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक लाभ होता है।
पशुओं के लिए चिकित्सा व्यवस्था करने की मांग
पशुपालन कर रहे रोहतास का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में पशुपालन को सरकार द्वारा बढ़ावा देना चाहिए। सरकार ने भले ही पशुओं के लिए अस्पताल बना रखे हैं। परंतु उनमें बेहतर चिकित्सा सेवाएं नहीं है। उनमें हमेशा ही दवाओं का अभाव बना रहता है। जब भी गाय बीमार होती है तो मजबूरन उन्हें निजी चिकित्सक को बुलाना पड़ता है। इसके अलावा सरकार को पशुपालन व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए अनुदान जैसी योजनाओं के साथ-साथ पशु चिकित्सा व्यवस्था पर भी गौर करना चाहिए।