सिरसा। पिछले निकाय चुनाव में महिलाओं का दबदबा था। 31 में से 17 महिला पार्षद चुनकर सदन में पहुंची थीं। इस बार नगर परिषद चुनाव में 32 वार्डाें में 14 महिला पार्षद विजयी रहीं हैं। भले ही इस बार तीन महिलाएं कम जीती हैं लेकिन इस बार युवा पार्षद अधिक हैं।
24 से लेकर 38 वर्ष तक की महिला प्रत्याशी शहर के विकास की बागडोर संभाले नजर आएंगी। कई वार्डाें के मतदाताओं ने कहा कि महिलाओं का जीतकर आगे बढ़ाना अच्छा है। लेकिन पार्षद बनने के बाद उनके प्रतिनिधियों द्वारा हस्तक्षेप बड़े स्तर पर होता है। लंबे समय से ऐसा देखने को मिल रहा है। ऐसे में क्या सभी महिला प्रत्याशी प्रतिनिधि की छवि से बाहर आ पाएगी ये देखने वाली बात होगी।
इसलिए जरूरी है महिलाओं का जीतना
शहर के विकास में कई मुद्दे ऐसे होते हैं, जिसको पुरुष समझ नहीं पाते। उनकी संवेदनशीलता ज्यादा नहीं होती है। जैसे बीपीएल परिवार को आवास दिलाना, लोन दिलाना, मेरिज रजिस्ट्रेशन में नवविवाहिता के लिए व्यवस्था करवाना। इतना ही नहीं, नगर परिषद में अलग से महिलाओं के लिए व्यवस्था करवाना, जिससे महिलाओं को परेशानी न उठानी पड़े। सबसे ज्यादा अहम बात यह है कि शहर को स्वच्छ व सुंदर बनाने की दिशा में जागरूकता का कार्य महिलाओं से बेहतर कोई नहीं कर सकता। शहर की स्वच्छता रैंकिंग में महिला पार्षद अपना अहम रोल निभा सकती हैं। क्योंकि घर से निकलने वाले कचरे का सही निपटान करवाने की दिशा में जागरूकता महिला पार्षद ही ला सकती हैं।
उप प्रधान की दावेदारी भी पेश कर सकती हैं महिला पार्षद
32 पार्षदों में से 14 महिला पार्षदों की जीत के बाद महिलाओं के वर्चस्व को बनाए रखने के लिए उप प्रधान का पद महिलाओं को मिलना चाहिए। महिलाओं की ओर से इस पद को लेकर दावेदारी पेश की जा सकती है। जिससे महिलाओं की आवाज को बुलंद किया जा सका।