राजकीय महिला महाविद्यालय की छात्राओं व एसएफआई ने कॉलेज प्राचार्य पर कपड़ों को लेकर टिप्पणी व भारतगौरवशतकम नामक किताब देने के विरोध में सोमवार को तहसीलदार प्रदीप कुमार को ज्ञापन सौंपा। छात्राओं का आरोप है कि भारतगौरवकशतम किताब लेने के बाद ही स्कॉलरशिप फार्म पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। छात्राओं का कहना है कि किताब में अधिकतर बातें नारी के विरोध में है। सरकार द्वारा नारी शक्ति को सशक्त बनाने के लिए जिस संस्थान का निर्माण हुआ है। उसी संस्थान में नारी शक्ति का हनन करने वाली किताब प्राचार्य द्वारा दी जा रही है। इस पर तहसीलदार ने कहा कि वे इस मामले की जांच करवाएंगे।
लघु सचिवालय पहुंची छात्रा महक भारती, ज्योति, प्रियंका व प्रवीन ने बताया कि महाविद्यालय में आंबेडकर योजना, टॉप 10 व टॉप 20 के अनुसार स्कॉलरशिप के फार्म भरे गए थे। उन स्कॉलरशिप फार्म पर जब हस्ताक्षर करवाने के लिए प्राचार्य के पास पहुंचे तो उन्होंने पहले हिंदुत्व पर लिखी किताब जो कि सौ रुपये की थी, लेने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि यदि हम 100 रुपये देकर वो किताब नहीं खरीदेंगे तो हमारे फार्म पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे। प्राचार्य ने कहा सौ रुपये लेकर आना, किताब लेना और फार्म पर हस्ताक्षर करवा कर ले जाना।
कॉलेज की छात्राओं ने बताया कि महिला विद्यालय में हर एक धर्म की लड़कियां पढ़ती हैं फिर हिंदुत्व विचारधारा से संबंधित किताबें ही जबरदस्ती क्यों दी जा रही हैं। अब तक करीब स्कॉलरशिप फार्म पर हस्ताक्षर करवाने आई 70 लड़कियों को किताबें दी गई हैं। ऐसा लगता है कि प्राचार्य किताबें देकर हिंदुत्व को बढ़ावा दे रहे हैं। स्कॉलरशिप लेने वाली छात्राओं में से कुछ लड़कियां गरीब परिवारों से संबंध रखती हैं। ऐसे में जो छात्राएं किताब के लिए पैसे नहीं दे सकती वे स्कॉलरशिप से वंचित रह जाएंगी।
जबरन कटवाए जाते हैं नाखून, कपड़ों पर की जाती है अभद्र टिप्पणी
प्रथम वर्ष की छात्रा प्रवीन रानी, पिंकी व पूजा ने बताया कि कॉलेज में लाइब्रेरियन द्वारा किसी भी छात्रा के नाखून बड़े देखने पर उसका आई कार्ड ले लेता है। जब तक वह नाखून नहीं काटती तब तक उसे आई कार्ड वापस नहीं दिया जाता। लाइब्रेरियन का कहना है कि मुझे प्राचार्य ने यह आदेेेश दिया है। साथ ही हमारे प्राचार्य द्वारा लड़कियों के जींस पहनने पर अभद्र टिप्पणियां की जाती हैं।
नहीं है पाठ्यक्रम में, फिर भी जबरन दी जा रही है किताब
छात्राओं का कहना है कि यह किताब उनके पाठ्यक्रम से संबंधित नहीं है फिर भी प्राचार्य द्वारा उन्हें जबरदस्ती किताब दी जा रही है। प्राचार्य द्वारा उन्हें यह भी कहा गया है कि इसमें पढ़े लिखे श्लोक याद करो मैं कभी भी सुन सकता हूं।
यह किताब उन छात्रों को दी जा रही है जिनके अंक 75 प्रतिशत से अधिक हैं। देशप्रेम व आपसी भाईचारे पर लिखी इस किताब की परीक्षा भी ली जाएगी। जिसे महाविद्यालय की अन्य गतिविधियों में रखा जाएगा। हर संस्थान के कुछ नियम होते हैं। महाविद्यालय में छात्राएं आपस में कई बार झगड़ पड़ती हैं। चोट न लगे इसके कारण उनके नाखून कटवाए जाते हैं।
-डॉ. तेजा राम, प्राचार्य राजकीय महिला महाविद्यालय।