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Sirsa News: श्रीकृष्ण और राधा का मिलन परमात्मा का आत्मा से मिलन

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औढ़ा। कथा में प्रवचन करते हुए स्वामी सुरेश मुनि व कथा वाचक अश्वनी शास्त्री। संवाद
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कालांवाली। श्री गीता भवन में स्वामी सुरेश मुनि के सानिध्य में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथावाचक अश्वनी शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और राधा का मिलन परमात्मा का आत्मा से मिलन है। उन्होंने कहा कि आत्मा का मन और इंद्रियों पर अनुशासन ही मनुष्य को महान बनाता है। उन्होंने कहा कि परमात्मा श्री कृष्ण है और आत्मा राधा।
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दोनों के मिलन को आत्मा से परमात्मा का मिलन बताया गया है। उन्होंने श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कंस वध और अन्य राक्षसों के अंत पर चर्चा की। भागवत कथा के दौरान श्री कृष्ण और राधा के विवाह व सखियों संग रास की सुंदर झांकियां प्रस्तुत की गईं। अश्वनी शास्त्री ने कहा कि आत्मा का मन और इंद्रियों पर शासन मनुष्य को महान बनाता है।
भागवत में व्यक्ति के सर्वांगीण विकास के चार सूत्र दिए गए हैं। इनमें संयम, श्रेष्ठ कर्म, नाम जप और यज्ञ है। उन्होंने कहा कि वेदानुकूल शुभ कर्म, आचरण, धन, यश, मन, सुख-सम्मान का दाता है, जबकि पाप निकृष्ट कर्म मानव को पतन की और ले जाता है। संयम का अर्थ-शरीर, इंद्रियों और मन पर अनुशासन है। इंद्रियों और मन का स्वभाव है-विषयभोगों, विलास और निकृष्ट कर्मों का आचरण।
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स्वामी सुरेश मुनि ने कहा कि जैसे पानी का स्वभाव नीचे की और बहना है, वैसे ही इंद्रियों का स्वभाव भी भोग और वासना की और जाना है। इसके कारण शारीरिक, मानसिक, बौधिक व आत्मिक शक्तियों का हस होता है। उन्होंने कहा कि मानव की मानवता पर दानवता हावी होती जा रही है। मनुष्य देव न रहकर नीचे गिरकर पशु स्तर का होता जा रहा है।
ऐसे पतित मानव के लोक और परलोक दोनों बिगड़ जाते हैं। उन्होंने कहा कि मानव को अपनी इन भटकती हुई इंद्रियों को काबू में करना होगा। इन पर कड़ा संयम धारण करना होगा। स्वामी ने कहा कि मानव के सामने लक्ष्य परमात्मा को आत्मा के साथ जोड़ना है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए वैदिक मार्ग पर चलना होगा।
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