शहीद भगत सिंह स्टेडियम में धरने पर बैठे किसान।
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तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के आंदोलन में गुटबाजी हावी होने लगी है। आंदोलनरत किसानों का एक धड़ा जहां इस साजिश के पीछे प्रदेश सरकार का हाथ होने की बात कर रहा है। वहीं, दूसरे धड़े के नेताओं का कहना है कि किसानों के हक की लड़ाई हम लोग ही लड़ेंगे। इन लोगों ने सोमवार से लघु सचिवालय पर धरना देने का एलान किया है, जबकि शहीद भगत सिंह स्टेडियम के सामने पहले धड़े का धरना रविवार को छठे दिन भी जारी रहा।
मालूम हो कि किसान संगठनों ने नए कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन की शुरुआत सिरसा से की थी। छह दिन पहले उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला व बिजली मंत्री रणजीत सिंह चौटाला के निवास के घेराव की घोषणा के साथ आंदोलन की शुरुआत हुई थी। हालांकि प्रदेश भर से किसान जुटाने के बावजूद किसान संगठन मंत्रियों के आवास तक नहीं पहुंच सके। जिला प्रशासन की सख्ती के आगे किसानों का जोश ठंडा पड़ गया। विरोधी दलों के नेताओं के आने के बावजूद अशांति फैलाने के आरोप में पहले दिन ही सात प्रमुख नेताओं सहित 100 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया था। कई नेताओं को हिरासत में भी लिया गया। उसी दौरान प्रशासन के साथ वार्ता के बाद किसान नेशनल हाईवे के स्थान पर किसान शहीद भगत सिंह स्टेडियम के समक्ष धरना देने को तैयार हो गए। उसके बाद से यहां किसानों का धरना जारी है।
धरने को संबोधित करते हुए किसान नेता मंदीप नथवान ने कहा कि भाजपा सरकार हमारे आंदोलन को फेल करना चाहती है और दबाव बनाने के लिए नए-नए प्रयास कर रही है। लेकिन सरकार यह नहीं जानती कि वह आंदोलन को जितना दबाएगी, आंदोलन उतना ही तेज होगा। उन्होंने कहा कि डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला किसानों के आंदोलन को दो फाड़ करवाना चाह रहे हैं, जबकि हमारे साथ 12 जत्थेबंदियां हैं, हमें डिप्टी सीएम से इस्तीफा लेना है।
दूसरी तरफ किसानों का दूसरा गुट सोमवार को लघु सचिवालय के बाहर धरना लगाएगा। इस गुट के नेता राष्ट्रीय किसान संगठन के अध्यक्ष जसबीर सिंह भाटी का दावा है कि उनके साथ 11 किसान जत्थेबंदियां है। यह गुट 13 अगस्त को सांसद सुनीता दुग्गल के आवास का घेराव करेगा।