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Sirsa News: नरमे की गुणवत्ता ने बिगाड़ा समीकरण, कम भाव मिलने से बढ़ी परेशानी

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ओढां। नरमे की फसल ने इस बार किसानों को तिहरी चपेट मारी है। एक तो फसल कम हुई दूसरा कीटनाशकों का खर्च और तीसरा उचित दाम न मिलना। ग्रामीण क्षेत्रों में भाव के इंतजार में किसान नरमे की फसल को नहीं बेच रहे हैं वहीं व्यापारी भी नरमे की खरीद से दूरी बना रहे हैं। इसका मुख्य कारण नरमे की गुणवत्ता अच्छी न होना है।
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किसान असमंजस की स्थिति में हैं कि नरमे को बेचे या अपने पास रखे। नरमे की खरीदारी करने वाले व्यापारियों के अनुसार इस बार नरमे की गुणवत्ता अच्छी नहीं है। जिसके चलते नरमे के भाव में करीब 3200 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर है। वहीं मंडी में नरमा बिकता कुछ भाव है और मिल में उतारते समय नरमे के दाम और कम कर दिए जाते हैं। ये उतार-चढ़ाव किसानों के लिए झगड़े का कारण भी बन रहा है।
गांव नुहियांवाली निवासी व्यापारी साहिल मलिक व सुरेन्द्र कूकणा ने बताया कि हर वर्ष नरमे की खरीदारी अच्छी हो जाती है। लेकिन इस बार एक तो फसल कम हुई है, दूसरा भाव का बड़ा अंतर व तीसरा गुणवत्ता न होने से सारे समीकरण बिगाड़ दिए है। आढ़ती विजय कुमार के मुताबिक कालांवाली मंडी में नरमे का भाव चार हजार से लेकर सात हजार तक चल रहा है। नरमे में गुणवत्ता बिल्कुल भी नहीं है। यही कारण है कि नरमे के भाव का अंतर ज्यादा है। नरमे के दाम भी गुणवत्ता के मुताबिक अलग-अलग है। इतना ही नहीं बिनौले में तेल न के बराबर है।
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किसान जगदीश सहारण के मुताबिक इस बार एक तो फसल उम्मीदों के अनुसार नहीं हुई और दूसरा भाव कम है। शुरुआती दौर में नरमे के भाव करीब 7500 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास थे। लेकिन गुलाबी सुंडी के प्रकोप की वजह से नरमे के भाव गिरा दिए। इस समय नरमे का भाव मात्र पांच हजार से 5200 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है और उसमें भी व्यापारियों की मनमर्जी चल रही है। किसान जगदीश ने बताया कि उसने करीब 35 क्विंटल नरमे का स्टॉक कर रखा है। भाव को देखकर नरमा बेचने का मन नहीं कर रहा।
किसान लीलाधर शर्मा ने बताया कि उसने शुरुआती दौर में कुछ नरमा करीब 7500 रुपये के हिसाब से बेच दिया था। अब कुछ और नरमा भी पड़ा है, जिसका 4500 रुपये के हिसाब से रेट लग रहा है। किसान ने बताया कि इस बार किसानों पर तिहरी मार है। न फसल हुई और जो हुई वो भी कौडिय़ों के भाव बिक रही है। इसके अलावा जो नरमा स्टॉक किया हुआ है उसमें भी अभी तक सुंडी है जो बिनौले को धीरे-धीरे चट कर रही है। ऐसे में वजन में भी काफी फर्क आएगा। किसानों ने 15 से 20 रुपये प्रति किलो या 400 रुपये दिहाड़ी तक देकर नरमे की चुगाई करवाई है। किसानों की स्थिति काफी दयनीय है।
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