ताऊ देवी लाला चिल्ड्रन पार्क में योग करते हुए साधक।
सिरसा। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ने आरोग्य नाम से स्वास्थ्य जाग्रति कार्यक्रम चलाया है। इसके तहत शनिवार को ताऊ देवी लाला चिल्ड्रन पार्क में विलक्षण योग शिविर का आयोजन किया गया।
इसमें संस्थान की ओर से आशुतोष महाराज के शिष्य योगाचार्य स्वामी विज्ञानानंद ने योग को भारतीय संस्कृति की उत्कृष्ट विरासत बताया। उन्होंने कहा कि योग भारत की प्राचीन परंपरा का अमूल्य उपहार है। यह तन, मन और आत्मा की एकात्म अवस्था का परिचायक है। मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य है। संयम, पूर्ति प्रदायक, स्वास्थ्य और भलाई के लिए समग्र दृष्टिकोण भी योग से विकसित होता है। यह व्यायाम मात्र नहीं बल्कि अपने भीतर एकता, दुनिया और प्रकृति की खोज का विषय है।
विज्ञानानंद ने बताया कि मूलत: कुछ योगासनों और प्राणायामों को ही संपूर्ण योग पद्धति माना जाता है लेकिन ऐसा है नहीं। योग शब्द संस्कृत की युज धातु से बना है। इसका अर्थ होता है जुड़ना। इसलिए हमारे तन, मन और आत्मा की एकात्म अवस्था ही योग है। महर्षि पतंजलि के मुताबिक योग: चित्त वृत्ति निरोध: अर्थात् चित्त की वृत्तियों का निरोध ही योग है। फिर ही योग: कर्मसु कौशलम की अवधारणा सिद्ध होती है।