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एचआईवी संक्रमित का उपचार करने से डॉक्टर का इनकार

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जनता को समझदारी और जागरुकता का पाठ पढ़ाने वाले कुछ चिकित्सक एक चेहरे पर कई चेहरे लगाए हुए हैं। जनता से कहते हैं एड्स छूने से नहीं फैलता, लेकिन एड्स पीड़ित घायल का उपचार करने से उन्हें भय लगता है। यही नहीं घायल को अस्पताल में दाखिल तक नहीं किया जाता है।
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 घंटों सिरसा के सामान्य अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर मां अपने घायल पुत्र को लेकर बैठे रही। महिला को रोता देख सिविल सर्जन सुरेंद्र नैण ने उससे कारण पूछा तो उसने अपनी व्यथा बताई। इस पर उन्होंने घायल को भर्ती करने का आदेश दिया।

सिरसा क्षेत्र निवासी एक युवक को बुधवार सुबह अज्ञात वाहन की चपेट में आकर घायल हो गया था। राहगीर उसे एक निजी अस्पताल में ले गए। अस्पताल के चिकित्सक ने उपचार शुरू किया। रक्त जांच के दौरान जब डॉक्टर को पता चला की घायल युवक एचआईवी संक्रमित है तो उसने घायल युवक की मां को युवक को अस्पताल से ले जाने को कहा।
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 विधवा मां अपने घायल पुत्र का उपचार करवाने के लिए उसे सरकारी अस्पताल में ले आई। घायल को इमरजेंसी में ले जाया गया, जहां ड्यूटी डॉक्टर ने घायल की रिपोर्ट पढ़ी तो उसमें एचआईवी पॉजिटिव लिखा देखा तो वह घायल का उपचार करने की बजाए दूर हट गए।

चिकित्सा धर्म भूल डॉक्टर ने घायल को अस्पताल में दाखिल करने से मना कर दिया। घायल युवक चोट के दर्द से कराहाता रहा और उसकी विधवा मां अस्पताल स्टॉफ से उसके पुत्र का उपचार करने की गुहार लगाती रही। किसी ने मां के आंसुओं की तरफ ध्यान देने तक की जहमत तक नहीं उठाई।

 भीषण गर्मी में मां अपने घायल पुत्र को इमरजेंसी के बाहर अपनी गोद में लेकर बैठी रही। मीडिया कर्मियों के पहुंचने पर सिविल सर्जन डॉ. सुरेंद्र नैण ने मामले की जानकारी ली, जिसके तुरंत बाद घायल को दाखिल करने और उसका उपचार शुरू करने के निर्देश दिए।

जो हुआ चिकित्सक की अज्ञानता के कारण हुआ : एमएस
इस संबंध में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुभाषिणी ने कहा कि जो कुछ हुआ चिकित्सक की अज्ञानता के कारण। चिकित्सक नए हैं, मैं जांच करूंगी और चिकित्सक को समझाऊंगी ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटना न हो।
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