राजस्थान की जीवनधारा कही जाने वाली इंदिरा गांधी नहर (राजस्थान कैनाल) पर हरियाणा सीमा में बने दो पुल गिरने की हालत में हैं। पुलों पर आवाजाही हो रही है, जिससे हर पल हादसे की आशंका बनी रहती है। नहर समेत पुलों की देखभाल का कार्य पंजाब के हाथ में होने के कारण हरियाणा बेबस नजर आ रहा है।
वहीं पंजाब ने पुलों की मरम्मत करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। पंजाब ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर केंद्र सरकार 2000 करोड़ रुपये देगी, तभी पुलों की मरम्मत या निर्माण हो सकेगा।
सतलुज और ब्यास नदियों के संगम के नीचे पंजाब के सुल्तानपुर के नजदीक हरिके बैराज से शुरू होने वाली इंदिरा गांधी नहर पंजाब में करीब 137 और हरियाणा में करीब 30 किलोमीटर है। वर्ष 2006 में लोक निर्माण विभाग (भवन एवं पथ) हरियाणा ने उपमंडल डबवाली के गांव अबूबशहर के निकट राजस्थान नहर पर बने दो पुलों को कंडम घोषित कर दिया था।
कंडम घोषित आरडी-526 (डबवाली से चौटाला रोड टू गांव सुकेराखेड़ा), आरडी-520 (अबूबशहर से काला तितर) पुलों पर अभी भी आवाजाही होती है।
क्यों कंडम घोषित किया गया
आरडी-520 पुल का पियर क्रेक हो चुका है। वहीं आरडी-526 पुल की स्लैब नीचे बैठ गई है। इन दोनों पुलों पर अक्सर आवाजाही रहती है। ग्रामीणों और किसानों के वाहनों के साथ-साथ प्रतिदिन यहां से स्कूल बसें गुजरती हैं। पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण कभी भी बड़ा हादसा घटित हो सकता है।
वर्ष 2006 में लोक निर्माण विभाग (भवन एवं पथ) डबवाली के एसडीई से नहरी विभाग, गिदड़बाहा (पंजाब) को पत्र भेजकर पुलों के कंडम होने का मुद्दा उठाया था, लेकिन पंजाब ने इस पर गौर नहीं किया। एसडीई से शुरू हुआ पत्र व्यवहार चीफ इंजीनियर स्तर तक हो चुका है, लेकिन पंजाब ने इन पत्रों पर आज तक गौर नहीं फरमाया है। उल्टा ठीकरा हरियाणा पर फोड़ते हुए एक पत्र में जवाब दिया कि अगर पुल की वजह से कोई हादसा होता है तो इसकी जिम्मेवारी हरियाणा की होगी।
चूंकि पुल पर बनी सड़क हरियाणा के अंतर्गत आती है। अब पंजाब ने उपरोक्त पुलों की मरम्मत करवाए जाने से सरासर इंकार कर दिया है। हालांकि नहर की संभाल पंजाब के पास है, लेकिन पैसा राजस्थान सरकार देती है। कुछ वर्ष पहले पंजाब ने राजस्थान नहर की संभाल के लिए करोड़ों रुपये का प्रोजेक्ट बनाकर केंद्र सरकार के पास भेजा था। नहरी विभाग पंजाब के अधिकारियों के अनुसार जिसका पैसा अभी तक नहीं मिला है। पैसा न मिलने के कारण मरम्मत नहीं हो रही है।
कोट
दोनों पुल क्षतिग्रस्त हैं। कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। आठ सालों से लगातार पंजाब से पत्र व्यवहार हो रहा है। पंजाब से जवाब मिला कि राजस्थान से पैसा आने के बाद मरम्मत जल्द करवाई जाएगी, लेकिन मरम्मत नहीं हुई।
- अनिल भारद्वाज, एसडीई, लोक निर्माण विभाग, डबवाली
इंदिरा गांधी नहर 1958 में बनी थी। निर्माण के बाद पहली बार इसकी लाइनिंग होगी। इस पर बने पुलों को स्टील बेस बनाए जाने की योजना है। इसके लिए वर्ष 2007-08 में करीब 2000 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट बनाकर केंद्र सरकार को भेजा हुआ है। जैसे ही पैसा अलॉट होगा, उपरोक्त नहर की लाइनिंग के साथ-साथ सभी पुलों का निर्माण नए सिरे से हो जाएगा। पुलों पर बनी रोड पर आवाजाही बंद करने की जिम्मेवारी हरियाणा की है। चूंकि सड़क उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
-परमवीर सिंह, एसडीई नहरी विभाग, गिदड़बाहा (पंजाब)