संगीत न केवल मनुष्य की भावनाओं को प्रभावित करता है बल्कि मानव मस्तिष्क भी इससे प्रभावित होते हैं। संगीत एवं नृत्य के माध्यम से पूरे विश्व को एक सूत्र में पिरोया जा सकता है।
पूरे विश्व का भाईचारा संगीत की देन है और संगीत का केंद्र है भारत है।
ये विचार पूर्व मंत्री प्रो. गणेशी लाल ने चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में युवा कल्याण निदेशालय द्वारा आयोजित युवा महोत्सव 2015 के दूसरे दिन शुक्रवार को बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए व्यक्त किए।
प्रो. गणेशी लाल ने कहा कि संगीत में वह शक्ति है जिसके माध्यम से मानव के अंदर अनेक प्रकार के गुण व संस्कार विकसित होते हैं।
उन्होंने अंग्रेजी लेखक शेक्सपियर द्वारा कही गई बातों को विद्यार्थियों के सामने साझा करते हुए कहा सुर मानवता की भाषा है और यह भाषा संपूर्ण विश्व को एक रिश्ते में बांधने की ताकत रखती है।
इससे पूर्व युवा कल्याण निदेशालय की निदेशिका डॉ. दीप्ति धर्माणी ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया और बताया कि युवा महोत्सव का थीम बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, भ्रूण हत्या सहित महिला सशक्तिकरण के इर्द-गिर्द रखा गया है।
मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्जवलित कर दूसरे दिन के रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आगाज किया।
इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. असीम मिगलानी, प्रो. सुरेश गहलावत, प्रो. विक्रम सिंह, डॉ. ईश्वर मलिक, डॉ. अमित सांगवान, राजेश छिकारा, डॉ. दिलबाग सिंह, डॉ. विष्णु भगवान,
डॉ. राजकुमार, डॉ. कासिफ, डॉ. रंजीत कौर डॉ. विजय तौमर, डॉ. सुमन गुलाब, डॉ. जयप्रकाश, डॉ. शमीम शर्मा, डॉ. रेखा शर्मा, डॉ. अपूर्वा शर्मा सहित अनेक प्राध्यापक व महाविद्यालयों से आए हुए टीम इंचार्ज उपस्थित थे।
कार्यक्रम में मंच का संचालन सहायक प्रो. गीतू व अलपना द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
युवा महोत्सव में दूसरे दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा दिखाई। बहुउद्देश्यीय हॉल में आयोजित युवा महोत्सव 2015 में प्रथम मंच पर राजस्थानी, पंजाबी व हरियाणवी संस्कृति का मिलाजुला रूप देखने को मिला।
राजस्थानी कालबेलिया नृत्य, पंजाबी भंगड़ा व गिद्दा ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरी। हरियाणवीं समूहगान में ऋतुओं, तीज त्योहार कृषि व किसानों के जीवन से जुड़ी गाथाओं बड़े ही बेहतरीन ढंग से प्रस्तुत किया गया।
सामान्य लोकगीत की शृंखला में छह टीमों ने अपनी प्रस्तुति दी और इनके माध्यम से मिर्जा, विरह आदि के दर्द का एहसास करवाने की कोशिश कलाकारों द्वारा की गई।
हरियाणवी आर्केस्ट्रा के माध्यम से वाद्य यंत्र जैसे डेरू, खड़ताल बेंजो, तबला, मटका आदि का बेहतरीन प्रदर्शन किया गया। महोत्सव में हरियाणवी पॉप गीतों ने भी दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
खुदा की इबादत कर अल्लाह से जोड़ा जाता है नामक कव्वाली ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरी। इसी प्रकार दूसरी स्टेज पर पाश्चात्य संस्कृति का बड़ा ही बेहतरीन प्रदर्शन विद्यार्थियों द्वारा किया गया।
वेस्टर्न सोलो में आठ टीमों ने अपना जौहर दिखाया जबकि सामान्य समूहगान में नौ टीमों ने अपनी प्रस्तुति दी। इसी प्रकार गजल गायन, क्लासिकल वॉकल व इंडियन आर्केस्ट्रा के कार्यक्रम इस मंच पर प्रस्तुत किए गए।
प्रसिद्ध हरियाणवी हास्य कलाकार डॉ. जनार्द्धन शर्मा ने भी विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझे किए और उन्हें अच्छा दर्शक एवं अच्छा कलाकार बनने के लिए प्रेरित किया।
अपनी प्रस्तुति के दौरान डॉ. जनार्द्धन ने हरियाणवी फिल्म के एक गीत को गाकर नृत्य करके दर्शकों मंत्र मुग्ध कर दिया।
इसी प्रकार हिसार से आए हुए हास्य कलाकार आजाद सिंह के चुटकलों ने भी दर्शकों को हंसी में लोटपोट कर दिया। मंच का संचालन डॉ. वीरेंद्र अटवाल, डॉ. गीतु व अल्पना द्वारा किया गया।