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इस कॉलेज में नहीं पढ़ना चाहतीं लड़कियां

Sun, 05 Oct 2014 10:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा
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महिला विंग कॉलेज का मामला फिर मझधार में दिख रहा है। कॉलेज की शिफ्टिंग पर नई तलवार लटकने लगी है।
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प्रशासन का मानना है कि कॉलेज को पॉलीटेक्निक कॉलेज में शिफ्ट करने की बात से छात्राओं ने वहां नहीं जाने का मन बना लिया है।

कारण है, कॉलेज की दूरी जो छात्राओं के लिए परेशानी का सबब बन रही है। प्रशासन ने भी छात्राओं को बस देने से साफ मना कर दिया है।

क्योंकि समिति की ओर से चलाई जा रही बसें पहले से ही घाटे में चल रही हैं। ऐसे में महिला विंग कॉलेज के शिफ्टिंग का मामला चुनाव बाद भी फिर अधरझूल में फंस सकता है।

बस स्टैंड और स्टेशन के बीच में
महिला विंग कॉलेज छात्राओं की पहली पंसद है, यह बात कॉलेज प्रशासन की ओर से कराए गए सर्वे में साफ हो चुकी है।

कॉलेज की छात्राओं ने बताया कि सिर्फ 25 से 30 फीसदी छात्राएं ही कॉलेज शिफ्ट कराने की बात कर रही हैं। वहीं, आज भी कई सैकड़ा छात्राएं ऐसी हैं

जो महिला पॉलीटेक्निक कॉलेज में जाकर नहीं पढ़ता चाहतीं, क्योंकि महिला विंग बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन के पास और शहर के बीचोंबीच है, जिससे छात्राओं को कोई दिक्कत नहीं होती। वहीं महिला पॉलीटेक्निक जाना ही अपने आप में सहज नहीं है।
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नहीं मिलता जल्दी से साधन
महिला पॉलीटेक्निक कॉलेज शहर से करीब पांच किलोमीटर दूर है और उसका रास्ता भी अलग है। मेन रोड से काफी अंदर पैदल चलकर जाना पड़ता है।

अगर ऑटो को भी जाना पड़े तो स्पेशल ऑटो पॉलीटेक्निक कॉलेज तक जाता है। ऑटो एक सवारी के 10 से 15 रुपये मांगता है। ऐसे में रोजाना रुपये खर्च कर छात्राओं को जाना महंगा पड़ जाएगा। इसको लेकर भी छात्राएं चिंतित हैं।

प्रशासन ने शिफ्टिंग की बात टाली
प्रशासन भी पॉलीटेक्निक कॉलेज नहीं जाने की बात कह रही छात्राओं के पक्ष में दिख रहा है। उनका कहना है कि जाने का विरोध कर रहीं छात्राओं के साथ जबरदस्ती नहीं कर सकते।

फिर भी चुनाव तक प्रशासन कुछ भी खुलकर बोलने से बच रहा है। डीसी की तरफ से प्रशासन को स्पष्ट निर्देश हैं कि चुनाव तक कॉलेज के मुद्दे को ठंडा रखा जाए। इसलिए दूसरे अधिकारी भी इस मामले में कुछ बोलने से बच रहे हैं।
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प्रशासन का फैसला मंजूर : प्रिंसिपल
इस बारे में प्रिंसिपल सुमन गुलाब का कहना है कि प्रशासन जो फैसला करेगा, उन्हें मजूर होगा। कॉलेज शिफ्ट करने से परेशानी तो होगी ही।

छात्राओं के साथ-साथ प्राध्यापकों को भी इससे परेशानी होगी। फिर भी इस मामले में वे कुछ नहीं कह सकतीं।

प्रशासन के फैसले का करेंगे इंतजार
इस बारे में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्रीनिवास गौड का कहना है कि चुनाव तक प्रशासन के फैसले का इंतजार किया जाएगा। इसके बाद ही परिषद की ओर से अगला कदम उठाया जाएगा।

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