हर वर्ष बरसाती सीजन में शहर में जलभराव की समस्या को देखते हुए जन स्वास्थ्य विभाग ने बरसाती पानी की निकासी के लिए कमर कस ली है। सरकार से हरी झंडी मिलते ही काम शुरू हो जाएगा।
इसके बाद सीवर लाइनों को भी राहत मिलेगी। इसी सप्ताह सरकार के पास प्रक्रिया शुरू करने की रिपोर्ट पहुंच जाएगी जिसके बाद तकनीकी तैयारियां शुरू हो जाएंगी।
शहर में करीब तीन दशक पूर्व डाली गई सीवर लाइनें अब छोटी पड़ गई हैं। बरसात के दिनों में सीवर व्यवस्था चरमरा जाती है।
इसके समाधान के लिए केंद्र सरकार की एक लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में जल निकासी योजना के तहत विभाग ने फाइल तैयार करनी शुरू कर दी है।
इसी सप्ताह प्रदेश सरकार को रिपोर्ट सौंपी जाएगी और मंजूरी मिलने के बाद तकनीकी प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इसके बाद बरसात का पानी मात्र आधे घंटे में शहर से बाहर निकाला जा सकेगा।
यह कार्रवाई सिरे चढ़ने के बाद सीवर लाइनों को काफी हर तक राहत मिलेगी क्योंकि अब तक बरसात का पानी भी सीवर लाइनों के माध्यम से निकाला जाता था।
अधिकतर कॉलोनियों में बरसाती पानी के कारण सीवर बैक मारने लगते थे। बता दें कि अब तक केवल हुडा सेक्टर में ही बरसाती पानी की निकासी के लिए अगल से पाइप लाइन डाली गई है।
इस बारे में जन स्वास्थ्य विभाग के अधीक्षण अभियंता केके वर्मा ने कहा कि बरसाती पानी की निकासी के लिए अभी तक प्रक्रिया प्रारंभिक चरण में हैं।
सरकार को रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के बाद एस्टीमेट बनेगा और प्रोजेक्ट की कीमत मंजूरी के लिए सरकार के पास भेजी जाएगी।
उन्होंने बताया कि एक लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में जल निकासी के लिए केंद्र सरकार की योजना के तहत 50 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी, 30 प्रतिशत राशि जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा और 20 प्रतिशत राशि नगर परिषद द्वारा प्रदान की जाएगी।
यह प्रोजेक्ट सिरे चढ़ता है तो न केवल बरसाती पानी के जल भराव की समस्या से मुक्ति मिल सकेगी बल्कि सीवरेज व्यवस्था में भी सुधार होगा।
सीवर लाइन से निकाला जाता है बरसाती पानी
सिरसा। शहर से बरसाती पानी की निकासी के लिए अब तक कोई प्रबंध नहीं हैं। तकनीकी तौर पर बात करें तो सीवर लाइन से केवल घरों का पानी ही निकाला जाता है और सीवर लाइन भी घरों के अनुसार डाली जाती है।
बरसात के पानी की निकासी के लिए इसी लाइन का प्रयोग किया जाता है जिससे लाइन पर दबाव बढ़ जाता है और जगह-जगह से सीवर ओवरफ्लो होने लगता है।
सीवर पानी की निकासी के लिए करोड़ों रुपये की लागत से केलनियां और नटार में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगाए गए हैं। केलनिया प्लांट की क्षमता बढ़ाने पर कार्य जारी है।
सीवरेज पानी को ट्रीटमेंट के बाद का घग्घर में डाल दिया जाता है जिसके किसान सिंचाई के लिए प्रयोग करते है। अब इन दोनों सीवर ट्रीटमेंटों की क्षमता बढ़ाई जाएगी जिसके बाद सीवर व्यवस्था पटरी पर लौट आएगी।
ट्रीटमेंटों की क्षमता बढ़ने और बरसाती पानी की अलग से व्यवस्था होने के बाद शहर में जल भराव की समस्या नहीं रहेगी। इससे पूर्व शहरवासी जल भराव की समस्या से जूझ रहे हैं।
बरसात के बाद गलियों में दो-दो फुट पानी भर जाता है।