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तीन अध्यादेशों के विरोध में निकाला रोष मार्च, जिले भर में शुरू की बेमियादी हड़ताल

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the agents atarted the strike - फोटो : Sirsa
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केंद्र सरकार द्वारा पारित तीन अध्यादेशों के विरोध में शुक्रवार को पूरे जिले की अनाज मंडियों में आढ़ती अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। आढ़तियों ने कालांवाली, रानियां, डबवाली, ऐलनाबाद, डिंग, ओढां सहित सभी मंडियों में सरकार के तीन अध्यादेशों के खिलाफ रोष मार्च निकाला।
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जानकारी के अनुसार आढ़ती शुक्रवार सुबह अनाज मंडी सिरसा में एकत्रित हुए, इसका नेतृत्व दि आढ़तियान एसोसिएशन सिरसा के प्रधान हरदीप सरकारिया ने किया। रोष मार्च निकालने के बाद शाम चार बजे आढ़तियों ने सिरसा के एसडीएम जयवीर यादव को मांगों का ज्ञापन सौंपा। इससे पहले सुबह अनाज मंडी में आढ़ती, लेबर यूनियन, अकाउंट्स यूनियन के पदाधिकारी व सदस्य एकत्रित हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पूरी मंडी में रोष प्रदर्शन किया। प्रधान हरदीप सरकारिया ने कहा कि सरकार ने आढ़तियों व किसानों के साथ ज्यादती की है, जोकि अब बर्दाश्त की सीमा से बाहर है। सरकार को हर हाल में इसका हिसाब देना होगा। तीन अध्यादेश किसी काले कानून से कम नहीं है, जो आढ़तियों पर थोपे जा रहे है। अगर सरकार ने इसे वापस नहीं लिया तो आढ़तियों को मजबूरन अपना संघर्ष तेज करना होगा। सरकारिया ने कहा कि प्रदेश की मंडियां अनिश्चितकालीन समय के लिए बंद है अगर अब भी सरकार तीनों अध्यादेशों को वापस नहीं लेती है, तो आढ़ती व किसानों का प्रदर्शन तेज होगा, जो सरकार की चूले हिला देगा। आढ़तियों के इस धरने पर युवा नेता गोकुल सेतिया, वरिष्ठ कांग्रेस नेता होशियारी लाल शर्मा, इनेलो प्रवक्ता महावीर शर्मा ने भी पहुंचकर समर्थन दिया। युवा नेता गोकुल सेतिया ने कहा कि वे इस विपदा की घड़ी में आढ़तियों व किसानों के साथ खड़े है। सरकार की ज्यादती किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं होगा। सरकार को चाहिए कि वह जनहितैषी बने लेकिन सरकार निरंतर जनभावनाओं की हत्या करने पर आतुर है। इस मौके पर अकाउंट्स यूनियन के प्रधान प्रेम शर्मा, लेबर यूनियन के प्रधान कृष्ण लाड़वाल ने भी संबोधित किया।
आज फूंका जाएगा सरकार का पुतला
आढ़तियों की हड़ताल अनिश्चितकालीन है। ऐसे में अब आढ़ती न तो मंडी में किसान की फसल बेचेंगे और न ही खरीद करेंगे। इतना ही नहीं आढ़ती किसानों के साथ पैसों का आदान प्रदान भी नहीं करेंगे। शनिवार को आढ़ती सरकार का पुतला फूंकेंगे।
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