सिरसा। पाइप लाइन के सहारे नहरों से पानी उठाने वाले किसानों पर कार्रवाई के बाद पानी पर संग्राम तेज हो गया है। किसानों के आक्रोश को देखते हुए 15 गांवों के किसानों के साथ प्रशासन ने पानी को लेकर मीटिंग की लेकिन कोई फैसला नहीं हो सका। दोनों पक्षों ने कहा कि वे भाईचारा खराब नहीं करना चाहते लेकिन टेल तक पानी जरूर पहुंचना चाहिए। वहां पानी कैसे पहुंचे, यह प्रशासनिक अधिकारी समझें।
घग्गर के बरसाती पानी को विभाजित करने और किसानों को पानी उपलब्ध करवाने के लिए बरसाती खरीफ चैनल सहदेवा , मम्मड़ और रत्ताखेडा का निर्माण किया गया था। इन खरीफ चैनलों में अवैध पाइप लाइनों , मोटर व सोलर कनेक्शनों पर कार्रवाई दो सप्ताह से जारी है। इसी मामले में मंगलवार को पंचायत भवन में जिला परिषद के सीईओ सुभाष चंद्र व सिंचाई विभाग के एक्सईएन संदीप शर्मा के समक्ष दोनों पक्षों के ग्रामीणों को बुलाया गया। वहां पर पंंचायत भवन के सभागार को बंद कर ग्रामीणों और सरपंचों से चार घंटे तक बातचीत की। दोनों पक्षों की सुनवाई करने के बाद अधिकारियों ने निर्णय लिया कि एक कमेटी का गठन किया जाएगा। जो अवैध कनेक्शनों, पाइप लाइन आदि को उखाड़ने का काम करेंगी।
बता दें कि इन बरसाती खरीफ चैनलों के अंतिम छोर पर पड़ने वाले ग्रामीणों ने प्रशासन से गुहार लगाई थी कि उन्हें बरसाती पानी उपलब्ध करवाया जाए। अवैध रूप से डाली गई पाइप लाइनों व कनेक्शनों पर कार्रवाई की जाए। जिसके बाद सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने इस मामले में जेसीबी से लाइनें उखाड़ने, कनेक्शन काटने आदि का काम शुरू कर दिया है। कार्रवाई होने पर एक पक्ष के लोगों ने उपायुक्त से गुहार लगाई कि कार्रवाई को रोका जाए। ऐसे में अधिकारियों ने दोनों पक्षों को बुलाकर समाधान निकालने का प्रयास किया। प्रशासन के निर्णय के बाद पाइप लाइन नहीं उखाड़ने के पक्ष के ग्रामीणों ने कहा कि वह इस संबंध में उपायुक्त शांतनु शर्मा से मुलाकात करेंगे। जरूरत पड़ी तो रानियां के विधायक अर्जुन चौटाला से भी मुलाकात करेंगे। प्रशासनिक अधिकारी किसानों के साथ गलत कर रहे है और आपसी भाईचारा बिगाड़ने का काम कर रहे हैं जो बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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पाइप नहीं तोड़ने के पक्ष के किसानों के तर्क
झोरड़नाली, ढाणी बंगी, धोतड़ व खारियां किसानों ने कहा कि अधिकारी व कुछ गांवों के किसान कह रहे हैं कि टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा है। हमने सीईओ और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को वीडियो तक दिखाई है कि टेल तक पानी पहुंच रहा है। इसके बाद भी प्रशासन पाइप लाइन को उखाड़ने पर अड़ा हुआ है। प्रशासन हमारी जिम्मेदारी लगाए कि पाइप लाइन कितने दिन बंद रखनी है। हम जिम्मेदारी निभाएंगे। लेकिन प्रशासन हमारी बात नहीं सुन रहा है। दूसरा पक्ष हमारा ही भाई है। हम बैठकर बातचीत करने को तैयार हैं। प्रशासन ने किसानों को आपस में फंसा दिया है। हमारी भी मांग है कि टेल तक पानी पहुंचाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग बोरवेल रिचार्ज करने की बात कहते हैं। गांव झोरडनाली, बणी ढाणी, धोतड का एक भी आदमी बोरवेल रिचार्ज इस पानी से नहीं करता है। धोतड़ व झोरड़नाली के लोग शपथ पत्र देने को तैयार हैं। यदि कोई डालता है तो एक लाख रुपये का जुर्माना वसूला जाएगा व टयूबवेल कनेक्शन काटा जाएगा। हमारी मांग है कि पानी का आपसी बंटवारा किया जाए। दो दिन हमें दिए जाए और बाकी दिन टेल वालों को दिए जाए। किसानों ने कहा कि पाइप लाइनों पर किसानों का 15 लाख से 50 लाख तक खर्च आया हुआ है। हैरानी कि बात है कि प्रशासन अब कह रहा है कि मोटरों और सोलरों से पानी किसान क्यों उठाते हैं। पहले सरकार कहती है कि सोलर ऊर्जा की प्लेट लगवाओ। अब कहती है कि क्यों लगाई हुई है।
टेल के गांवों के किसानों ने यह कहा
चक्का भूना, खारियां, सांदेवाला, घोडावाली के किसानों ने कहा कि सोमवार को भी दोनों पक्षों को बुलाया गया है। दूसरा पक्ष नहीं आया तो आज बैठक हुई है। तीन साल से टेल पर पानी नहीं पहुंचता है। इसमें हमारा क्या कसूर है। हमारे पास पानी पहुंचना चाहिए। प्रशासन इसको लेकर व्यवस्था करें, चाहे वह सफाई कराए या खरीफ चैनल की खुदाई करवाए। जहां तक टयूबवैलों को बंद करवाने की बात है और पाइपें उखाड़ने की बात है। इस पर फैसला सरकार व अधिकारियों को लेना है। हम भी नहीं चाहते है कि हमारे किसान भाइयों का नुकसान हो। पूर्व में सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर ने निरीक्षण किया था तब हमने कहा था कि शुरुआती गांवों को मोगे का साइज मंजूर कर दें ताकि टेल तक पानी पहुंच जाए।
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शुरुआत गांवों के किसानों की मांग
- नहर की 4 से 6 फीट खुदाई की जाए।
- सफाई नहीं की गई है, सफाई की जाए।
- खारिया से आगे के गांवों के लोग बोरवेल में पानी डालते हैं।
- उपायुक्त स्वयं मौका निरीक्षण करें। हालात देखकर आगामी कार्रवाई अमल में लाएं।
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टेल वाले गांवों के किसानों की मांग -
- टयूबवेल की मोटर बंद करवाई जाए।
- पाइपों को उखाड़ा जाए।
- खरीफ चैनल की खुदाई करवाई जाए।
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यह दिया है प्रशासन ने तर्क
प्रशासन के अनुसार खरीफ चैनल में किसान पाइप लाइन लगाकर बिजली कनेक्शनों और सोलर कनेक्शनों से पानी उठा रहे हैं। इस कारण टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा है। आंकड़ों के आधार पर उन्होंने कहा कि किसान आठ घंटे टयूबवेल की बिजली का प्रयोग करते हैं और सोलर से 12 घंटे तक पानी उठाते हैं। ऐसे में एक किसान 20 घंटे पानी उठाता है। इस कारण टेल तक पानी नहीं पहुंच पाता है।
70 फीट ऊंचाई तक पानी ले जाने वालों को करें सम्मानित
किसानों ने कहा कि भले ही सभी लोगों की पाइपों को तोड़ने का काम प्रशासन करें। जैसा उनका रूख नजर आ रहा है। लेकिन तीन पाइपों को नहीं तोड़ना चाहिए जो लोग 70 लाख रुपये खर्च कर 70 फीट ऊंचाई पर सिंचाई का पानी लेकर गए है। जहां तक सरकार पानी नहीं पहुंचा सकती थी, वहां पर किसानों ने इंजीनियरिंग का उदाहरण देते हुए पानी पहुंचाया है। इन किसानों को उपायुक्त व सरकार को सम्मानित करना चाहिए।