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आतंकी 60 किलोमीटर दूर हैं, आप घबराइये नहीं

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बुधवार रात करीब 8 बजकर 44 मिनट पर मेरे भाई दीपू का इराक से फोन आया कि वह इस समय फैक्टरी में है। फैक्टरी से करीब 60 किलोमीटर दूर सेना और आतंकियों में मुठभेड़ हो रही है। मैंने उससे कहा कि मेरा मन बहुत घबरा रहा है। बस, तुम वापस चले आओ। दीपू ने कहा कि आप घबराइये मत, फैक्टरी वाले कह रहे हैं कि अगर परिस्थितियां ज्यादा खराब होंगी तो फैक्टरी में कार्यरत सभी भारतीयों को वापस भेज दिया जाएगा।
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यह कहना है इराक में फंसे हेमंत उर्फ दीपू के भाई पिंटू का। इराक में फैली दो समुदायों की हिंसा की वजह से वहां अस्थिरता का माहौल है। इस वजह से उसे वहां काम कर रहे अपने भाई की चिंता सता रही है। उसके मां-बाप ने तो खाना-पीना भी छोड़ दिया है। उसके भाई समेत उसके यूपी स्थित गांव ईटहइयां के सात और लड़के वहां पर काम करते हैं। उनके परिजनों का भी रो-रोकर बुरा हाल है।
 
दस साल पहले दोनों भाई आए थे डबवाली
दस साल पहले उत्तरप्रदेश के जिला गोरखपुर के गांव ईटहइयां से दोनों भाई डबवाली में काम की तलाश में आए थे। दोनों पीओपी का काम करते थे। करीब छह माह पूर्व दीपू (24) इराक चला गया और वह अपने परिवार के साथ यहां गौशाला रोड पर रह रहा है। उनके चचेरे भाई शिंटू ने उसके कागजात तैयार करवाकर उसे वहां बुलाया था। उसका भाई इराक के ईरबिल शहर में स्थित एक लोहे की फैक्टरी में काम करता है।
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पिंटू ने बताया कि वह डबवाली में किराए के मकान में अकेला ही रहता है, जबकि उसके पिता रामवति और माता सुबावति गांव ईटहइयां में ही रहते हैं। वे लोग जब से इराक में फैली हिंसा के बारे में सुन रहे हैं, तब से उन्हें दीपू की चिंता सता रही है। मैंने रात से अब तक रोटी का एक निवाला ही खाया है। गांव ईटहइयां में बैठे परिवार ने तो खाना-पीना ही छोड़ दिया है। पूरा परिवार घबराया हुआ है।

हरियाणा सरकार की हेल्पलाइन भी नहीं आई काम
रात को कुछ समय के लिए हुई बातचीत के बाद दीपू का कोई अता-पता नहीं है। बृहस्पतिवार सुबह को पिंटू ने अपने भाई का पता करने के लिए हरियाणा सरकार द्वारा जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर पर बातचीत की। वहां उसने नाम और पता नोट करवा दिया। पिंटू के अनुसार अब तक कोई सूचना नहीं आई है, जिसके कारण वह अपने भाई की खैर खबर पाने के लिये भटक रहा है।

न कोई मोबाइल नंबर, न कोई संपर्क
पिंटू ने बताया कि दीपू के पास कोई मोबाइल नंबर नहीं है। न ही उसका कोई संपर्क नंबर। उसका चचेरा भाई शिंटू भी गांव में आया हुआ है। पिंटू के अनुसार जिस लोहे की फैक्टरी में उसका भाई कार्यरत हैं, उस फैक्टरी में उनके ही गांव के सात और लड़के हैं, लेकिन उनमें से वह किसी का मोबाइल नंबर नहीं जानता। उन्हें किसी के बारे में भी जानकारी नहीं मिल रही है।
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