अब तक दो साल में 5 हजार के आसपास पकड़े जा चुके हैं बेसहार पशु
- बेसहारा पशुओं की कम नहीं हो रही है तादाद, डेयरियों पर नहीं होती है कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। शहर में बेसहारा पशुओं की समस्या से निजात दिलाने के लिए दो साल से लगातार पशु पकड़ो अभियान चल रहा है। दो साल में 5 हजार के आसपास पशुओं को पकड़ा जा चुका है। इसके बाद भी नगर परिषद के टेंडर के अनुसार 2500 पशु शहर में बेसहारा घूम रहे हैं।
इन पशुओं को पकड़वाना जरूरी है ताकि सड़कों पर कोई हादसा न हो। इसी कड़ी में वीरवार को नगर परिषद की ओर से 2500 पशुओं को पकड़वाने के लिए टेंडर लगाया गया है। इन पशुओं पर तकरीबन 73 लाख रुपये प्रशासन खर्च करेगा। अहम बात यह है कि नगर परिषद प्रशासन की योजना थी कि पूर्व फर्म को एक्सटेंशन दे दिया जाए लेकिन बार-बार होने वाले हमलों से तंग आकर एजेंसी ने टेंडर लेने से इन्कार कर दिया।
डेयरियाें को नोटिस जारी नहीं होना बड़ी समस्या
विभाग की ओर से शहर में अवैध रूप से बनीं डेयरियों को लेकर कोई नोटिस जारी नहीं किया जाता है। उन्हें हटाने के लिए आज तक कोई प्रक्रिया नहीं हुई है। यही कारण है कि शहर में बेसहारा पशुओं की तादाद कम नहीं हुई। जो पशु दूध नहीं देते हैं उन्हें वे खुले में छोड़ देेते हैं।
वहीं, कालांवाली व पंजाब के क्षेत्र में पशु मेले लगते हैं। इनमें कम दूध देने वाले पशु 10 से 20 हजार रुपये तक मिल जाते हैं। इन पशुओं को अवैध रूप से पशु डेयरी चलाने वाले लेकर आते हैं। जब ये पशु दूध देना बंद कर देते हैं तो इन्हें खुला छोड़ दिया जाता हैं। वहीं, प्रशासन ने आज तक शहर में अवैध रूप से चल रहीं 100 डेयरियों पर कोई कार्रवाई नहीं की है।
पूर्व जिला नगर आयुक्त सुरेंद्र बैनीवाल के समय में इन डेयरियों को नोटिस जारी किया गया था। उनके जाने के बाद अधिकारियों ने इस दिशा में कोई ध्यान नहीं दिया।
जिलेभर में है समस्या
अकेले सिरसा ही नहीं, जिलेभर में बेसहारा पशुओं की समस्या बनी हुई है। नगर परिषद व पालिकाएं बड़े स्तर पर रुपये इन पर खर्च कर रही हैं लेकिन समाधान कोई नहीं कर पा रहा है। हर कोई बेसहारा पशु मुक्त शहर बनाने के बड़े-बड़े दावे करता है लेकिन वे धरातल पर सच साबित नहीं हो रहे हैं। सबसे ज्यादा हादसों की बात करें तो डबवाली में पिछले तीन माह में कई लोग घायल हो चुके हैं।
एप बनाने में जुटी नगर परिषद
इस समस्या को लेकर नगर परिषद हर स्तर पर प्लानिंग बना रही है। विशेष रूप से एप तैयार किया जा रहा है ताकि पशुओं की पहचान और आंकड़ा स्टोर किया जा सके। कोई पशु मालिक बार-बार अपना पशु खुले में न छोड़ पाए। उस पर जुर्माने कार्रवाई की जा सके। अभी एप प्राथमिक स्टेज पर है। सभी कमियों को दुरुस्त करने पर काम किया जा रहा है। अधिकारियों की मानें तो जल्द ही एप तैयार कर लिया जाएगा। एप से गोशालाओं से लेकर डेयरी मालिकों की गतिविधियों पर नकेल कसी जा सकेगी।
कोटस
बेसहारा पशु पकड़ने के लिए विशेष रूप से टेंडर लगाया गया है। 73 लाख रुपये का खर्च इस पर आएगा और 2500 पशुओं को पकड़वाया जाएगा। डेयरियों को भी नोटिस जारी किए जाएंगे।
-जयवीर सिंह, सीएसआई, नगर परिषद।