पूर्व सांसद डॉ. सुशील इंदौरा ने मंगलवार को सरकुलर रोड स्थित संत कबीर धर्मशाला में आयोजित बैठक में अपने नए राजनीतिक दल ‘आपणी पार्टी’ के गठन की घोषणा करते हुए कहा कि पार्टी संगठन में महिलाओं को 40 और जाटों को 20 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। वे दो बार सांसद रह चुके हैं।
इस मौके पर सिरसा और प्रदेश भर से आए सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में डॉ. सुशील इंदौरा ने अपनी नई पार्टी की घोषणा करते हुए कहा कि यह पार्टी 36 बिरादरी के लोगों को साथ लेकर चलते हुए कमजोर वर्ग के हकों के लिए संघर्ष करेगी, लेकिन संघर्ष का रास्ता पूरी तरह अहिंसात्मक होगा और सत्याग्रह की तर्ज पर आंदोलन चलाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि पार्टी की घोषणा से पहले उन्होंने गांव-गांव घर-घर जाकर आम लोगों की राय ली और सभी ने नई राजनीतिक पार्टी को समय की जरूरत बताते हुए कहा कि यह अत्यंत ही नेक काम है, जिसे अवश्य पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी में महिलाआें को 40 फीसदी, इतना ही युवाआें को आरक्षण दिया जाएगा। 15 से 20 सीटों पर जाट समाज और इतनी ही सीटों पर एससी, बीसी वर्ग के लोगों को चुनाव लड़ने का अवसर दिया जाएगा।
नई पार्टी का पूरा नाम बताते हुए डॉ. इंदौरा ने कहा ऑलवेज अमंग द पीपल, नेशनल्टी एंड इंटीग्रिटी। अंग्रेजी अल्फाबेट शब्दों को पढ़ा जाए तो यह आपणी पार्टी बनता है। उन्होंने कहा कि पार्टी का राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकरण करवाया जाएगा, लेकिन शुरू में इसका कार्य क्षेत्र हरियाणा होगा।
सबसे पहले 11 सदस्यों की एक कमेटी बनाई जाएगी, जो पार्टी की गतिविधियों का संचालन करेगी। इससे पहले आम सभा में डॉ. सुशील इंदौरा को नई पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक और राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव पारित किया गया। पार्टी की घोषणा से पूर्व वरिष्ठ नेता दरियाव सिंह धानक, सूरजभान खनगवाल, पूर्व तहसीलदार ओमप्रकाश लाडवाल, कृष्णा दुग्गल, राजेंद्र यादव सहित अनेक लोगों ने अपने सुझाव दिए। इस अवसर पर रणजीत सिंह, कृष्ण लाडवाल, गिरधारी लाल बागड़ी, जीत सिंह, श्याम भारती, नेजर सिंह, रामचंद्र, इकबाल सिंह, निर्मल इंदौरा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद थे।
इनेलो के टिकट पर 1998 में पहली बार बने सांसद
डॉ. सुशील इंदौरा का जन्म राजस्थान के रायसिंह नगर में 20 अगस्त 1960 को हुआ। प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने पीजीआई रोहतक से एमबीबीएस की। इसके बाद वे सरकारी नौकरी में गए। इस बीच उन्होंने चौ. देवीलाल के साथ रहकर राजनीति की ए बी सी डी सीखी।
फरवरी 1998 में इनेलो के टिकट पर उन्होंने सिरसा संसदीय सुरक्षित सीट से जीत हासिल कर पहली बार संसद में कदम रखा। फिर 1999 में हुए लोकसभा के चुनाव में इनेलो के टिकट पर सिरसा से जीत हासिल की। वर्ष 2004 में फिर इनेलो के टिकट पर सिरसा लोकसभा सीट से मैदान में उतरे, लेकिन कांग्रेस के आत्मा सिंह गिल से पराजित हो गए।
वर्ष 2005 में विधानसभा चुनाव में इनेलो की सीट पर ऐलनाबाद जीत हासिल की। इसके बाद 2014 में इनेलो को छोड़ दिया। वर्ष 2014 में उन्होंने भाजपा-हजकां गठबंधन के टिकट पर सिरसा से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। इसके बाद वे राजनीति से दूर रहे और नई पार्टी के गठन को लेकर क्षेत्र में दौरा करते रहे। मंगलवार को उन्होंने संत कबीर धर्मशाला में बैठक आयोजित कर आपणी पार्टी की घोषणा कर डाली।