जिले में पांच माह बाद बरसात से जहां किसानों के चेहरे खिल उठे तो वहीं जिले के कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि ने फसलों में तबाही मचाई। बीती रात जिलेभर में बूंदाबांदी हुई, जिसके बाद फसलें खिल उठीं। जहां यह बरसात गेहूं की फसल के लिए लाभकारी रही, वहीं सरसों और सब्जियों की फसलों में ओलावृष्टि ने जमकर तबाही मचाई। इससे पूर्व अगस्त में बरसात हुई थी।
शुक्रवार देर रात बादल छा गए थे। आधी रात के बाद बूंदाबांदी शुरू हुई। जिलेभर में बूंदाबांदी रिकॉर्ड की गई है, जबकि पंजुआना वर्षा मापक केंद्र से दो एमएम बरसात रिकॉर्ड किए जाने का समाचार है। ओलावृष्टि और अंधड़ से काफी नुकसान हुआ है। जब बूंदाबांदी शुरू हुई तो किसानों के चेहरे खिल उठे। धुंध के साथ इस प्रकार बूंदाबांदी ने फसलों में घी का काम किया है।
लंबे समय से किसान बरसात के लिए दुआ कर रहे थे। गांव दड़बा के किसान ओमप्रकाश सुथार ने बताया कि अब मार्च मध्य तक जितनी बार बरसात होगी, फसलों को बहुत लाभ मिलेगा। गांव बरासरी के किसान सुलतान सिंह बैनीवाल का कहना है कि जनवरी से लेकर मार्च तक बरसात सभी फसलों को लाभ पहुंचाती है। इससे फसलें बीमारियों से बच जाती हैं और उत्पादन बंपर होता है। बिजली और तेल की बचत होती है जिससे किसानों को आर्थिक लाभ भी होता है।
कृषि विशेषज्ञ डॉ. दिनेश सिद्धू ने बताया कि गेहूं, चना, जौ और सरसों की फसलों में एक-दो बरसातें न आए तो उत्पादन बहुत कम रहता है। अब बरसात शुरू हुई है, उम्मीद है कि फरवरी और मार्च में भी बरसात होगी। बता दें कि जिले में तीन लाख हेक्टेयर में गेहूं, 50 हजार हेक्टेयर में सरसों और 10 हजार हेक्टेयर में चना और जौ आदि फसलों की बिजाई हुई है।
कृषि विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र शेरड़िया का कहना है कि बरसात से फसलों में तेला-चेपा आदि बीमारियों से बचाव होता है। बरसात और धुंध से फसलें फुटाव अधिक करती हैं, जिससे उत्पादन अधिक होता है।