339 में 56 पंचायतें ही करवा पाईं ग्राम सभाएं, छोटी ग्राम पंचायतों के लिए आसानी, बड़ी उलझन में
- सरपंच एसोसिएशन की उपाध्यक्ष बोलीं- आपसी भाईचारा हो रहा है खराब
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। ग्राम सभाओं में कोरम पूरा करने की कठिनाई और प्रक्रियाओं में बाधाओं पर सरपंचों ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को सात पंचायतों के सरपंचों ने प्रशासन को अपना ज्ञापन सौंपा था। वहीं, सरपंच एसोसिएशन की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संतोष बैनीवाल ने भी सरपंचों की बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। क्योंकि सरकार की यह प्रक्रिया आपसी भाईचारे के लिए खतरा बन गई है।
सरपंचों का कहना है कि बड़ी ग्राम सभाओं में 10 प्रतिशत ग्रामीणों को इकट्ठा करना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। ऐसे में 339 ग्राम सभाओं में से केवल 56 ग्राम सभाएं ही कोरम पूरा कर पा रही हैं। इसी कारण सरपंचों ने संबंधित नियमों में बदलाव की मांग उठाई है।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने कहा कि इस संबंध में मुख्यमंत्री से बातचीत करने के लिए आगामी प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी। ताकि सरपंच अपनी समस्याओं और सुझावों से उन्हें अवगत करा सकें। यदि इन नियमों में आवश्यक संशोधन नहीं किया गया तो ग्राम स्तर पर संचालन प्रभावित हो सकता है। संतोष बैनीवाल ने कहा कि ग्राम सभाओं की पारदर्शिता और कार्यकुशलता बनाए रखने के लिए नियमों में व्यावहारिक बदलाव आवश्यक हैं। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि सरपंचों की ओर से उठाई गईं समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया जाए। इस प्रयास से न केवल ग्राम सभाओं की कार्रवाई सुचारु होगी, बल्कि ग्रामीण स्तर पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया और निर्णय लेने की क्षमता भी मजबूत होगी।
ये आ रहीं दिक्कतें
- 40 से लेकर 20 प्रतिशत का कोरम भी नहीं हो रहा पूरा।
- बार-बार पोर्टल पर अपलोड कर आगे की तारीख सरपंचों को देनी पड़ रही है।
- ग्राम सभाओं में लोगों को इकट्ठा करने के लिए सरपंचों के अन्य काम प्रभावित होते हैं।
इस प्रकार पैदा होता है विवाद
सरपंच चुनावों के दौरान कई धड़े गांवों में बने हुए हैं। कई गांवों में आपसी विवाद हो चुके हैं। बड़ी पंचायतों में खासतौर पर आपसी विवाद की स्थिति है। ऐसे में कोरम पूरा करना संभव नहीं होता है। वहीं, आपसी सहमति भी नहीं बन पाती है। क्योंकि सरपंच विकास कार्य न करवा पाए, दूसरे पक्ष की यही मंशा रहती है। इसलिए अपने-अपने समर्थकों को रोकने का प्रयास किया जाता है। साथ ही प्लानिंग के तहत विरोध जैसी स्थिति भी पैदा की जा सकती है। इसी डर से बड़ी पंचायतों के लिए ग्राम सभाएं आफत बन गई हैं।