संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। सियाचिन की दुर्गम और ठिठुरती चोटियों पर देश की सेवा करते हुए गांव झोपड़ा निवासी सूबेदार बलदेव सिंह ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स की 18वीं रेजीमेंट में सेवा दे रहे सूबेदार बलदेव सिंह को पिछले वर्ष ही पदोन्नति मिली थी। वे लद्दाख स्थित सियाचिन ग्लेशियर के नॉर्थ सेक्टर की ''कुमार पोस्ट'' पर तैनात थे। रविवार सुबह अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें सीने में तेज दर्द हुआ और इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
उनके शहीद होने की खबर जैसे ही गांव पहुंची, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। सोमवार को जब उनका पार्थिव शरीर गांव लाया गया तो हर आंख नम थी। सोमवार शाम साढ़े छह बजे पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके बेटे उपराज सिंह ने मुखाग्नि दी। प्रशासनिक और सैन्य अधिकारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
शहीद सूबेदार बलदेव सिंह शनिवार रात को ठीक सोए थे। रविवार सुबह उठे तो उनकी तबीयत खराब हो गई। पहले उन्हें उल्टी हुई। इसके बाद उन्होंने घबराहट होने की बात साथियों को कही। इसके बाद सेना के जवान उन्हें इमरजेंसी मेडिकल मदद के लिए अस्पताल ले गए। यहां डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू कर दिया, लेकिन उनकी तबीयत बिगड़ती चली गई और रविवार की सुबह 11 बजे उन्होंने आखिरी सांस ली। सूबेदार के शहीद होने का पता चलते ही नॉर्दर्न कमांड चीफ समेत सेना के अन्य अधिकारी वहां पहुंचे। उनका पार्थिव हवाई जहाज के जरिये लद्दाख से दिल्ली लाया गया। इसके बाद सेना के जवान दिल्ली से गांव झोपड़ा शहीद का पार्थिव शरीर लेकर पहुंचे। जब सूबेदार बलदेव सिंह का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा हुआ गांव पहुंचा, तो हर उम्र का इंसान उन्हें अंतिम विदाई देने उमड़ पड़ा। गांव झोपड़ा की गलियां उनके जयकारों से गूंज उठीं। लोगों ने शहीद बलदेव सिंह अमर रहें, भारत माता की जय के नारे लगाए। लोगों ने नम आंखों से अपने वीर सपूत को विदाई दी।
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2001 में सेना में भर्ती हुए थे बलदेव सिंह
शहीद बलदेव सिंह मूल रूप से सिरसा की बीरपुर कॉलोनी के निवासी थे। उनके पिता बलवंत सिंह का पहले ही निधन हो चुका है। परिवार में मां रचना कौर, भाई हरदेव सिंह, पत्नी गुरविंदर कौर और बेटा उपराज सिंह और बेटी मनरीत कौर हैं। बलदेव सिंह वर्ष 2001 में भारतीय सेना भर्ती हुए थे। बीते 23 वर्षों से उन्होंने देश सेवा को ही अपना धर्म माना।
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परिवार का भारतीय सेना से गहरा जुड़ाव
बलदेव सिंह के परिवार का भारतीय सेना से गहरा जुड़ाव है। उनके पिता बलवंत सिंह के चारों भाइयों का एक-एक बेटा देश की सेवा में लगा है। बलदेव सिंह के भाई हरदेव सिंह मिल्क प्लांट में काम करते हैं। उनकी पत्नी गुरविंदर कौर हाउस वाइफ हैं। बलदेव सिंह ने वर्ष 2001 में वह जेएंडके राइफल्स की 18वीं रेजिमेंट में सिपाही के तौर पर भर्ती हुए थे। छह माह पहले ही अमृतसर में तैनाती के दौरान छुट्टियों में घर पर आए थे। उनके साथ पढ़ने वाले दोस्तों व ग्रामीणों ने बताया कि वह मिलनसार आदमी थी। शांत स्वभावी थे।
शहीद के पार्थिव शरीर से लिपटकर विलाप करते परिजनशहीद के पार्थिव शरीर से लिपटकर विलाप करतीं पत्नी
शहीद के पार्थिव शरीर से लिपटकर विलाप करते परिजनशहीद के पार्थिव शरीर से लिपटकर विलाप करतीं पत्नी