एसएफआई (स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया) के आह्वान पर मंगलवार को राजकीय नेशनल कॉलेज के विद्यार्थियाें ने चौ. देवीलाल विश्वविद्यालय के खराब परीक्षा परिणामाें के विरोध में हड़ताल की और सीडीएलयू प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
इससे पूर्व कॉलेज के प्रधान राकेश यादव के नेतृत्व में हड़ताल पर बैठे छात्राें को संबोधित करते हुए एसएफआई के प्रदेशाध्यक्ष शाहनवाज ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा जारी सभी परीक्षा परिणामाें में सभी विद्यार्थियाें को फेल दिखाया है, जो कि असंभव है, लेकिन विश्वविद्यालय की इस गलती से छात्राें का भविष्य अधर में लटक गया है।
इस दौरान विद्यार्थियों ने सीडीएलयू प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। उन्होंने कहा कि अंतिम वर्ष के छात्राें के पांचवे सेमेस्टर में फेल होने पर उन्हें अपनी डिग्री पूरी करने के लिए एक वर्ष अतिरिक्त लगाना पड़ेगा।
इसके अलावा सिरसा, फतेहाबाद जैसे पिछड़े जिलाें में अधिकांश छात्राआें को अतिरिक्त वर्ष की वजह से पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ेगी। उन्हाेंने कहा कि छात्राें के भविष्य को देखते हुए एसएफआई ने सिरसा और फतेहाबाद के कॉलेजाें में हड़ताल करने का निर्णय लिया है।
प्रदेशाध्यक्ष ने मांग की कि सभी परीक्षा परिणामाें की नि:शुल्क दोबारा चैकिंग की जाए, विश्वविद्यालय द्वारा ठोस कार्य योजना बनाकर परिणामाें में जारी अनियमितताआें को दूर किया जाए, विश्वविद्यालय में स्थाई शिक्षकाें एवं गैर-शिक्षक कर्मचारियाें की भर्ती की जाए,
विश्वविद्यालय की रि-चैकिंग, रि-अपीयर, रि-वेलुवेशन फीस कम की जाए। छात्राें को धर्मेंद्र, प्रवीन राठौर, पवन, कुलदीप सुथार, संदीप रिंकू, जसबीर आदि छात्र नेताआें ने भी संबोधित किया।
कुछ विद्यार्थियों ने यह भी बताया कि कॉलेज प्रशान की ओर से उन्हें जानकारी नहीं दी गई है कि सीडीएलयू में कमेटी ने उत्तर पुस्तिकाओं की जांच का कार्य शुरू कर दिया है।
सीडीएलयू के डिप्टी रजिस्ट्रार (परीक्षा) रमेश मेहता ने बताया कि बीते दिनों विभिन्न कॉलेजों के विद्यार्थियों द्वारा किए गए विरोध के बाद कमेटी की देखरेख में उत्तर पुस्तिकाओं की जांच शुरू कर दी गई है।
सोमवार को बीकॉम की करीब 1900 पुस्तिकाओं की जांच की गई। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान संबंधित कॉलेज के प्राचार्य, शिक्षकों के अलावा विश्वविद्यालय के शिक्षक और कमेटी के सदस्य उपस्थित रहते हैं। विद्यार्थियों के पहले से ही बता दिया गया है कि एक सप्ताह में उत्तर पुस्तिकाओं की जांच कर ली जाएगी।
मेहता ने बताया कि मंगलवार को बीएससी की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच की जा रही है। दोबारा जांच के बाद परिणाम क्या आता है, इसकी रिपोर्ट कमेटी करेगी। यदि शिक्षकों गलती के कारण विद्यार्थियों को नुकसान हुआ है तो शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उधर, सूत्रों का कहना है कि सोमवार को जिन विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं की जांची गई हैं, उनमें ज्यादा अंतर नहीं है। बताया जा रहा है कि अधिकतर विद्यार्थियों ने पेपर में इतना कुछ नहीं लिखा है कि उन्हें पास कर दिया जाए। अब देखना यह है कि कमेटी की रिपोर्ट क्या आती है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की सिरसा इकाई के कार्यकर्ता विवि प्रशासन से मिले। परिषद के कार्यकर्ता नगर मंत्री सुमित के नेतृत्व में नेशनल कॉलेज में इकट्ठा हुए और छात्रों के खराब परीक्षा परिणाम का जल्द समाधान कराने के लिए विवि प्रशासन से मिले।
विभाग संगठन मंत्री कुलदीप पूनियां ने बताया कि छात्रों के खराब परीक्षा परिणाम के समाधान के लिए महाविद्यालयों के विद्यार्थी निरंतर प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि विवि प्रशासन ने 20 मार्च को समस्या के समाधान का आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अपनी संपत्ति है।
उसकी रक्षा करना भी अपना काम है, इसलिए विद्यार्थी परिषद के छात्रों से आह्वान करती है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने जो आश्वासन 27 मार्च तक दिया है, तब तक समस्या का समाधान हो जाएगा। इस अवसर पर जगदीप कुमार, रजत मंत्री, हिमांशु, सूरजभान, प्रदीप, कुलदीप, सुनील, मनोज, श्रवण, चरणपाल, मोहित, योगेश, मणि, करण व अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे।
स्नातक कक्षाओं के खराब परिणाम पर विद्यार्थियों द्वारा क्रमवार किए जा रहे प्रदर्शन से सवाल यह उठने लगा है कि उन्हें ऐसा करने के लिए कौन गाइड कर रहा है।
विद्यार्थियों का पता है कि उन्होंने पेपर में कितना लिखा है। इतना ही नहीं क्रमवार किए जा रहे प्रदर्शन से जाहिर होता है, चुनावों के माहौल में इन विद्यार्थियों को उकसाने में कोई तो है।
हालांकि सीडीएलयू के कुल परीक्षा परिणाम पर नजर डालें तो गत वर्ष के अनुसार ही है। इससे पूर्व कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का परीक्षा परिणाम का प्रतिशत लगभग इतना ही रहता था।
ऐसे में इस बार ऐसा क्या हो गया कि एक के बाद एक कॉलेज के विद्यार्थियों को न केवल प्रदर्शन करने की बल्कि तोड़-फोड़ की नौबत आ गई है। इस बार सीडीएलयू का बीए का परीक्षा परिणाम 29.40 प्रतिशत है, जबकि अंग्रेजी विषय के लिए बवाल मचा हुआ, लेकिन अंग्रेजी विषय का परिणाम 37 प्रतिशत है।
इसी प्रकार बीकॉम का परिणाम 34.85 है। सीडीएलयू द्वारा 15 मार्च सायं को घोषित किया गया था। उसके बाद रविवार और सोमवार को छुट्टी के बाद जैसे ही मंगलवार को विश्वविद्यालय खुला तो राजकीय नेशनल कॉलेज की केवल छात्राएं ही प्रदर्शन करती हुईं सीडीएलयू पहुंची थी।
विरोध करने वालों में छात्र क्यों शामिल नहीं हुए, यह भी एक सवाल है। इसके अलावा छात्राओं ने बिना किसी की बात सुने ही तोड़-फोड़ शुरू कर दी यह बात भी संदेह के घेरे में है। अगले दिन 19 मार्च को सीएमके की छात्राएं प्रशर्दन करने पहुंचती हैं।
इसी प्रकार 20 मार्च को डबावली के विद्यार्थी पहुंचे, 21 मार्च को फिर सीएमके की छात्राओं ने सीडीएलयू पहुंचेकर प्रदर्शन किया। मंगलवार को नेशनल कॉलेज के विद्यार्थी भी कॉलेज में हड़ताल कर नारेबाजी करते हुए सीडीएलयू पहुंचे, जबकि सीडीएलयू द्वारा उत्तर पुस्तिकाओं की जांच का कार्य शुरू कर दिया गया है और मामले को स्पष्ट करने के लिए दस दिन का समय मांगा गया है।
कमेटी का समय पूरा होने से पहले ही सीएमके और नेशनल कॉलेज के विद्यार्थियों द्वारा किए गए प्रदर्शन और क्रमवार मामले को उठाए रखने की बात अब हजम नहीं हो रही है। पूरे मामले को देखने के बाद लगता है कि कोई तो है, जो विद्यार्थियों को ऐसा करने के लिए प्रेरित कर रहा है।
पूरे एपिसोड से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कहीं न कहीं चुनावी समय में राजनीतिक दखल जरूर है।
फोटो नंबर 36: सिरसा में मंगलवार को खराब परीक्षा परिणाम को लेकर प्रदर्शन करते राजकीय नेशनल कॉलेज के विद्यार्थी।