सिरसा। गेहूं की तूड़ी का उत्पादन कम होने के कारण अब धान की पराली की मांग भी पहले से बढ़ी है। राजस्थान के गोशाला संचालक और पशुपालक अब सिरसा के किसानों से पराली खरीद कर एकत्र कर रहे हैं। जिसका उपयोग पशुओं के चारे के लिए किया जाएगा। राजस्थान के पशुपालक सात से आठ हजार रुपये एकड़ के अनुसार पराली की खरीद कर रहे हैं और ट्रैक्टर ट्रालियों के माध्यम से इसे राजस्थान पहुंचाया जा रहा है।
जिले में इस वर्ष गेहूं की तूड़ी का उत्पादन बेहद कम हुआ था। जिसके कारण इसकी कीमत भी एक हजार रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई। ऐसे में सिरसा व राजस्थान की गोशालाओं में तूड़ी की पहुंच नाम मात्र ही हो पाई है। धान की कटाई होने के बाद अब गोशाला संचालकों और पशुपालकों ने धान की पराली का चारे में इस्तेमाल करने के लिए इसकी खरीद कर रहे है। जिसका किसानों के साथ गोशाला संचालकों और पशु पालकों को भी लाभ हो रहा है। जिले के किसानों से पशुपालक व गोशाला संचालक प्रति एकड़ के अनुसार सात से आठ हजार रुपये में पराली की खरीद कर रहे हैं। जबकि पराली की तैयार गांठों को छह हजार रुपये प्रति एकड़ के अनुसार खरीद कर रहे हैं।
ट्रैक्टर ट्राली से गांठों को पहुंचाया जा रहा है राजस्थान
चारे के लिए इस्तेमाल में लाई जा रही पराली की मांग बढ़ने के बाद किसान अपने स्तर पर धान की पराली की गांठों को तैयार कर रहे हैं और पशुपालक ट्रैक्टर ट्राली के माध्यम से पराली की गांठों को राजस्थान के हनुमानगढ़, नोहर, भादरा, गंगानगर सहित अन्य स्थानों पर पहुंचा रहे हैं। जिले में प्रति एकड़ में 30 से 40 क्विंटल तक का पराली का उत्पादन हो रहा है।
बीते वर्ष से 200 कम आए पराली जलने के मामले
पराली का प्रबंधन होने के चलते इस वर्ष किसानों ने कम धान की पराली को आग के हवाले किया है। जिले में बीते वर्ष हरसेक की ओर से 551 पराली जलने की लोकेशन आई थी। लेकिन इस वर्ष अब तक केवल 124 लोकेशन ही ट्रेस हुई है। जिसके बाद विभाग की ओर से तीन लाख 40 हजार रुपये का जुर्माना किसानों पर लगाया गया है। पराली जलने के मामले कम होने के चलते लोगों को भी इससे काफी राहत मिल रही है।
गेहूं की तूड़ी कम हुई थी। इसके कारण राजस्थान में स्थित गोशालाओं और पशुपालकों के पास पशुओं के चारे के लिए कोई भी साधन नहीं है। पशुओं को चारा देने के लिए अब धान की पराली की खरीद कर रहे हैं। प्रति एकड़ के अनुसार आठ हजार रुपये की धान की पराली खरीदी है। इससे पशुओं का चारा बनेगा। आस पड़ोस के ग्रामीण और गोशाला संचालकों की ओर से भी पराली एकत्र की जा रही है।
गिरधारी, निवासी साहवा, राजस्थान, खरीदार
कृषि विभाग की ओर से किसानों के लिए जागरूकता अभियान चलाया गया है। इसी का परिणाम है कि इस बार किसान जागरूक हुए हैं और पिछले वर्षों के मुकाबले इस बार कम केस आग लगाने के सामने आए हैं।
डॉ. बाबूलाल, कृषि उपनिदेशक, सिरसा।