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जीवन में हर समस्या का समाधान संभव, बस नजरिया हो सकारात्मक : रजत रश्मि

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सिरसा। साध्वी प्रवचन देते हुए। संवाद
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डबवाली। जैन स्थानक में विराजमान महासाध्वी रजत रश्मि महाराज ठाणे-4 ने रविवार सुबह प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करते हुए जीवन को सकारात्मक सोच, संयम और धर्म के मार्ग पर चलकर सार्थक बनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसका समाधान संभव न हो, आवश्यकता केवल सकारात्मक दृष्टिकोण रखने, निराशा से दूर रहने और पूरे मनोयोग व लगन से प्रयास करने की है।
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महासाध्वी ने जीवन प्रबंधन पर विशेष बल देते हुए कहा कि जब जीवन का मैनेजमेंट सही हो जाता है, तो परिस्थितियां स्वयं अनुकूल होने लगती हैं। उन्होंने समझाया कि आज के दौर में मानसिक अशांति का सबसे बड़ा कारण अव्यवस्थित जीवनशैली और नकारात्मक सोच है, जबकि शांति प्रत्येक व्यक्ति चाहता है।
यदि हम अपने जीवन को संतुलित ढंग से जीना सीख लें, तो भीतर की अशांति स्वत: समाप्त हो सकती है। प्रवचनों में उन्होंने बच्चों के संस्कारों पर भी विशेष रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अभिभावकों का कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों को केवल पढ़ाई-लिखाई तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें धर्म, संस्कार और नैतिक मूल्यों से भी जोड़ें, ताकि वे डॉक्टर, इंजीनियर या किसी भी क्षेत्र में सफल बनने के साथ-साथ एक अच्छे और संवेदनशील इंसान भी बन सकें।
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महासाध्वी रजत रश्मि ने जियो और जीने दो के सिद्धांत को जीवन में उतारने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वयं धर्म के प्रति समर्पित होकर शांतिपूर्ण जीवन जीना चाहिए और दूसरों को भी चैन से जीने देना चाहिए। उन्होंने आत्ममंथन का संदेश देते हुए कहा कि हमें यह आकलन करना चाहिए कि हम धर्म के मार्ग पर कितनी दूर तक आगे बढ़ पाए हैं।
उन्होंने पुराने समय की तुलना करते हुए कहा कि पहले भले ही मकान कच्चे हुआ करते थे, लेकिन लोग धर्म के प्रति पक्के थे। आज मकान तो पक्के हो गए हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश हम धर्म और मूल्यों के प्रति कच्चे होते जा रहे हैं। इसलिए आवश्यक है कि हम अपने धर्म और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को समझें और वही संस्कार आने वाली पीढ़ी को भी दें।

महासाध्वी ने कशाय-मुक्त जीवन जीने का संदेश देते हुए कहा कि कशाय वह है जो हमारी आत्मा के भावों को कसैला बनाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी के प्रति गलत भावना रखना, निंदा करना, कटु वाणी बोलना भी कशाय का ही रूप है। इसलिए हमें अपनी वाणी को शुद्ध रखना चाहिए और क्रोध, अभिमान, माया और द्वेष जैसे दुर्गुणों से दूर रहना चाहिए।

प्रवचनों के दौरान जैन श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में उपस्थित रहकर आध्यात्मिक विचारों का लाभ लिया और जीवन को धर्म, संयम व सकारात्मकता के साथ जीने का संकल्प लिया। जैन सभा प्रधान सुभाष जैन पप्पी ने नव वर्ष के उपलक्ष्य में 1 जनवरी को जैन स्थानक में महासाध्वी रजत रश्मि महाराज द्वारा सुबह 8:30 बजे से 9:30 बजे तक विशेष प्रवचन कर श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया जाएगा।
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